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Written By: Anshumala | Updated : May 9, 2019 4:06 PM IST
Newborns breathe faster than adults. © Shutterstock.
शिशु के जन्म के बाद उसके लिए अगला 48 घंटा बेहद महत्वपूर्ण और नाजुक होता है। ऐसे में पेरेंट्स को उसका खास ख्याल रखना चाहिए। बच्चा एक नई दुनिया, वातावरण और माहौल में आता है। उसके लिए तुरंत इस तरह के वातावरण में खुद को ढालने में थोड़ा समय लगता है। इन 48 घंटों के दौरान की जाने वाली देखभाल ही आने वाले दिनों में बच्चे के स्वास्थ्य के स्तर को निर्धारित करता है।
48 घंटे तक खास ख्याल
बच्चे के जन्म के 48 घंटों तक नवजात शिशु पर नजर बनाए रखना चाहिए। उनकी त्वचा और आंखों पर गौर करें। देखें कि कहीं उनका रंग तो नहीं बदल रहा है। शिशु का रंग पीला तो नहीं पड़ रहा है। यदि वो पीला नजर आए तो डॉक्टर से तुरंत मिलें। बच्चे के सोने और जागने पर भी पूरी नजर रखें। शिशु को समय-समय पर दूध पिलाती रहें। जब वह दूध ना पिए या बार-बार उल्टी कर दे तो भी डॉक्टर से मिलना चाहिए। शिशु में लगे नाल प्लग (cord plug) पर भी ध्यान दें। बदलाव दिखे या उस जगह से खून आए, तो भी डॉक्टर से मिलें।
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स्तनपान है जरूरी
बच्चे के जन्म के बाद से ही मां के शरीर में दूध बनने लगता है। शिशु के लिए मां के स्तन से आने वाला पीला तरह पदार्थ बहुत हेल्दी होता है। उसे जरूर पिलाएं। नवजात शिशु को दूध पीने में समय लगता है, क्योंकि उसके लिए यह बिल्कुल नया अनुभव होगा, जिस तरह आपके लिए पहली बार अपने बच्चे को दूध पिलाना नया अनुभव होगा। स्तनों को ठीक से पकड़ कर शिशु को दूध पिलाएं। ध्यान रखें कि बच्चा अधिक दूध ना पी ले। अधिक दूध पीने से बच्चे को दिक्कत हो सकती है। इन घंटों में सही मात्रा में शिशु को दूध देना और सही अवस्था में दूध देना बहुत जरूरी होता है। शिशु को किस तरह से पकड़ना है, किस तरह से गोद लेना है, इन बातों का भी विशेष ध्यान रखें। इन 48 घंटों में ब्रेस्टफीडिंग बहुत महत्वपूर्ण होता है।
शिशु के साथ जुड़ाव
जन्म ही नहीं गर्भधारण के साथ ही मां और बच्चे दोनों के बीच अनदेखा, भावनात्मक और प्यार सा रिश्ता बन जाता है। जन्म के बाद शिशु अपने पेरेंट्स और पूरे परिवार के बीच जाता है। इस समय शिशु के साथ जुड़ाव बहुत महत्व रखता है। मां को अपने बच्चे को गोद में लेकर रखना चाहिए। उसे अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। ऐसा करने से मां और बच्चे के बीच भावनात्मक जुड़ाव बनता है। 48 घंटे के अंदर जब आप अपने बच्चे को दूध पिलाती हैं, तो यह दूध पोषक तत्वों में परिपूर्ण तो होता ही है, इस बदले हुए वातावरण में बच्चे के लिए बहुत जरूरी भी होता है। अपने बच्चे के साथ बातें करने की कोशिश करें। इस बात का भी ध्यान रखें कि आपका बच्चा आपके साथ एक ही रूम में हो।
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