क्या बच्चों को भूत से डराना है सही? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट

Are ghosts suitable for children : बच्चों को भूत से डराकर उसे शांत कर लेना भले ही आपके लिए एक सुविधा जनक है, लेकिन आगे चलकर बच्चों के व्यवहार पर यह असर डालती है। आइए जानते हैं इस बारे में-

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Written By: Kishori Mishra | Published : February 12, 2026 2:05 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Shorouq Bhagwandas Kalyandas Motwani

Is it okay to be scared of ghosts : जब बच्चा सो नहीं रहा होता या फिर यहां-वहां जाता है, तो अक्सर आपने बड़े-बुजुर्गों को कहते सुना होगा कि  “अभी सो जाओ वरना कोई आ जाएगा,” “वहां मत जाओ, एक मॉन्स्टर छिपा है।” आपके लिए इस लाइन का कोई अर्थ नहीं होता है, यह  बड़ों के लिए बस कुछ ही शब्द होते हैं। लेकिन छोटे बच्चे को ये बिल्कुल असली लग सकता है। बच्चों के अंदर के इस डर के बारे में अधिक जानकारी के लिए हमने मुंबई स्थित नारायणा हेल्थ एसआरसीसी चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल की चाइल्ड एंड एडोलसेंट साइकियाट्री, कंसल्टेंट डॉ. शोरौक मोटवानी से बातचीत की है।
डॉक्टर शोरौक का कहना है कि सात साल से कम उम्र के बच्चे कल्पना और असलियत के बीच का अंतर पूरी तरह नहीं समझते हैं। उनका दिमाग अभी भी डेवलप हो रहा होता है। जब वे भूतों या मॉन्स्टर्स के बारे में बार-बार धमकियां सुनते हैं, तो एमिग्डाला (दिमाग का डर का सेंटर) एक्टिव हो जाता है। शरीर कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हॉर्मोन रिलीज़ करता है, जैसे कि खतरा सच में मौजूद हो। दिल तेज़ी से धड़क सकता है। मसल्स में खिंचाव आ सकता है।

भूतों का डर क्या डालता है बच्चों पर असर?

डॉक्टर कहती हैं कि बच्चा शायद इसे तुरंत न दिखाए, लेकिन आपकी इन बातोंको उनका नर्वस सिस्टम याद रखता है। समय के साथ, यह चुपके से बच्चे के व्यवहार पर असर डाल सकता है, जिसकी वजह से उन्हें आगे चलकर परेशानियां हो सकती हैं, जैसे-

  1. बुरे सपने या अकेले सोने का डर
  2. अचानक अलग होने की चिंता
  3. बिस्तर गीला करना इमोशनल स्ट्रेस से जुड़ा है
  4. चिड़चिड़ापन, चिपकूपन या बिना वजह रोना
  5. एंग्जायटी से होने वाली पेट दर्द जैसी शारीरिक शिकायतें

डर जाता है उनका मन

डॉक्टर का कहना है कि जब बच्चा आपके पास रहने को लेकर या फिर कहीं न जाने को लेकर जिद्द करता है, तो ये आपको एक "जिद्दीपन" लग सकता है, लेकिन असल में इस तरह का व्यवहार उनका डरा हुआ मन होता है जो सुरक्षित महसूस करने की कोशिश कर रहा होता है।

सुरक्षा पर बना अनुशासन, डर पर नहीं

डॉक्टर कहती हैं कि डर से तुरंत बात मान ली जा सकती है, लेकिन इससे इमोशनल ताकत नहीं बनती। डर पर आधारित अनुशासन के बार-बार संपर्क में आने से इमोशनल रेगुलेशन और बच्चे की सुरक्षा की भावना पर असर पड़ सकता है। इसलिए उनपर एक सुरक्षित अनुशासन बनाएं, बच्चे इन पर बेहतर रिस्पॉन्स देते हैं-

● साफ और शांत बाउंड्री

● उनकी उम्र के हिसाब से आसान एक्सप्लेनेशन

● चाहे गए व्यवहार के लिए पॉजिटिव रीइन्फोर्समेंट

● इमोशनल वैलिडेशन बनाएं।

लास्ट लाइन डॉक्टर कहती हैं कि एक सुरक्षित माहौल हेल्दी ब्रेन डेवलपमेंट और स्टेबल सेल्फ-एस्टीम में मदद करता है। जब गाइडेंस डराने-धमकाने के बजाय भरोसे से मिलता है, तो बच्चे कॉन्फिडेंस के साथ जिम्मेदारी सीखते हैं। वे इसलिए बर्ताव करना शुरू नहीं करते क्योंकि वे डरते हैं, बल्कि इसलिए करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उन्हें समझा जा रहा है और वे सुरक्षित हैं।

Highlights

  • बच्चों के अंदर डर बैठाने से कॉन्डिफेंट कम होता है।
  • बच्चों को अनुशासित बनाएं।
  • डर बच्चों के इमोशनल व्यवहार पर असर डालता है।
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