
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Written By: Kishori Mishra | Published : February 12, 2026 2:05 PM IST
Medically Verified By: Dr. Shorouq Bhagwandas Kalyandas Motwani
Is it okay to be scared of ghosts
डॉक्टर शोरौक का कहना है कि सात साल से कम उम्र के बच्चे कल्पना और असलियत के बीच का अंतर पूरी तरह नहीं समझते हैं। उनका दिमाग अभी भी डेवलप हो रहा होता है। जब वे भूतों या मॉन्स्टर्स के बारे में बार-बार धमकियां सुनते हैं, तो एमिग्डाला (दिमाग का डर का सेंटर) एक्टिव हो जाता है। शरीर कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हॉर्मोन रिलीज़ करता है, जैसे कि खतरा सच में मौजूद हो। दिल तेज़ी से धड़क सकता है। मसल्स में खिंचाव आ सकता है।
डॉक्टर कहती हैं कि बच्चा शायद इसे तुरंत न दिखाए, लेकिन आपकी इन बातोंको उनका नर्वस सिस्टम याद रखता है। समय के साथ, यह चुपके से बच्चे के व्यवहार पर असर डाल सकता है, जिसकी वजह से उन्हें आगे चलकर परेशानियां हो सकती हैं, जैसे-
डॉक्टर का कहना है कि जब बच्चा आपके पास रहने को लेकर या फिर कहीं न जाने को लेकर जिद्द करता है, तो ये आपको एक "जिद्दीपन" लग सकता है, लेकिन असल में इस तरह का व्यवहार उनका डरा हुआ मन होता है जो सुरक्षित महसूस करने की कोशिश कर रहा होता है।
डॉक्टर कहती हैं कि डर से तुरंत बात मान ली जा सकती है, लेकिन इससे इमोशनल ताकत नहीं बनती। डर पर आधारित अनुशासन के बार-बार संपर्क में आने से इमोशनल रेगुलेशन और बच्चे की सुरक्षा की भावना पर असर पड़ सकता है। इसलिए उनपर एक सुरक्षित अनुशासन बनाएं, बच्चे इन पर बेहतर रिस्पॉन्स देते हैं-
● साफ और शांत बाउंड्री
● उनकी उम्र के हिसाब से आसान एक्सप्लेनेशन
● चाहे गए व्यवहार के लिए पॉजिटिव रीइन्फोर्समेंट
● इमोशनल वैलिडेशन बनाएं।
लास्ट लाइन डॉक्टर कहती हैं कि एक सुरक्षित माहौल हेल्दी ब्रेन डेवलपमेंट और स्टेबल सेल्फ-एस्टीम में मदद करता है। जब गाइडेंस डराने-धमकाने के बजाय भरोसे से मिलता है, तो बच्चे कॉन्फिडेंस के साथ जिम्मेदारी सीखते हैं। वे इसलिए बर्ताव करना शुरू नहीं करते क्योंकि वे डरते हैं, बल्कि इसलिए करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उन्हें समझा जा रहा है और वे सुरक्षित हैं।