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Written By: Yogita Yadav | Published : September 11, 2018 3:08 PM IST
इस उम्र में बच्चे प्राइवेसी चाहते हैं पर मां बाप की और भी है जिम्मेदारी। © Shutterstock
किशोर उम्र तक पहुंचते-पहुंचते अचानक बच्चों की दुनिया बडी होने लगती है। उनके भीतर स्व की भावना आने लगती है। वे माता-पिता के सामने खुलकर कुछ बोलने में हिचकने लगते हैं, इसके विपरीत दोस्तों के साथ समय बिताने की उनकी इच्छा बढने लगती है। वे अपना अलग स्पेस मांगने लगते हैं। पर इन दिनों तेजी से बढ़ रहे अपराधों के बारे में सुनकर डर भी लगता है। इस दुविधा में जानें कितना सही है बच्चों का पर्सनल स्पेस-
यह है टीनएज
यह वह दौर है, जहां एक ओर बचपन छूटने का अफसोस होता है, वहीं युवावस्था में पहुंचने की उत्सुकता रहती है। तेजी से हो रहे शारीरिक-मानसिक विकास के साथ ही हार्मोन संबंधी बदलाव भी आ रहे होते हैं। वे खुद को भी नए सिरे से पहचानने की कोशिश कर रहे होते हैं। अपनी पसंद और रुचि से जुडे कार्य अपने ही ढंग से करना चाहते हैं। मेरा सामान, मेरे दोस्त, मेरे खिलौने जैसे एहसास उनके मन में एक खास अधिकार भावना जगा रहे होते हैं। वे छोटी-छोटी चीजों को प्यार से संभाल कर रखना सीख जाते हैं और जब कोई दूसरा व्यक्ति उनकी चीजों को छूता है तो वे नाराज हो जाते हैं। उनमें शीघ्र ही बडों की तरह दिखने और व्यवहार करने की तीव्र आकांक्षा भी जाग उठती है।
जरूरी है थोडा अकेलापन
यह सहज बदलाव है कि इस उम्र में बच्चे माता-पिता और परिवार से थोडा कटा हुआ महसूस करते हैं और उन्हें कुछ वक्त अकेले अपने साथ बिताना अच्छा लगने लगता है। किशोरों के व्यक्तित्व विकास में निजता की भावना (पर्सनल स्पेस) का महत्वपूर्ण योगदान होता है। यही वह समय है, जब उन्हें अपने वजूद का एहसास होता है।
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उन्हें अपने बारे में सोचना अच्छा लगता है, उनकी कल्पनाओं के पंख फैलने लगते हैं। रचनात्मक अभिरुचि वाले बच्चे इसी उम्र में अकेले बैठकर पेंटिंग करने और कविताएं-कहानियां लिखने की कोशिश करते हैं। इसलिए बौद्धिक विकास के लिए थोडा पर्सनल स्पेस बच्चे के लिए फायदेमंद साबित होता है। दरअसल यह विकास की स्वाभाविक प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से उनके स्वतंत्र व्यक्तित्व का निर्माण हो रहा होता है। इसलिए किशोर उम्र में यह जरूरी है कि अपने बच्चों को थोडा पर्सनल स्पेस दें।
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अभिभावकों की जिम्मेदारी
पर्सनल स्पेस बच्चों के विकास के लिए बहुत जरूरी है। एक उम्र के बाद उनकी निजता और एकाकीपन का सम्मान भी किया जाना चाहिए, लेकिन इसके साथ अभिभावकों को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।