बुखार में बच्चों को एंटीबायोटिक देना सही या गलत? हर माता-पिता को जाननी चाहिए ये बात

घर में जब छोटे बच्चों को बुखार आता है तो पेरेंट्स अक्सर घबरा जाते हैं और जल्दबाजी में अक्सर उसे एंटीबायोटिक दवा दे देते हैं, लेकिन क्या ऐसा करना सही है? आइए डॉक्टर से जानते हैं पेरेंट्स को क्या करना चाहिए...

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Written By: Ashu Kumar Das | Published : August 5, 2026 1:05 PM IST

रात के 12 बजे। बच्चा तप रहा है। थर्मामीटर में 101 दिख रहा है। बच्चे क बुखार में देखकर पेरेंट्स का रिएक्शन क्या होता है? अलमारी खोलो  वो वाली दवाई निकालो जो पिछली बार डॉक्टर ने यही जिससे बच्चे का बुखार उतर गया था। अगर आप भी ऐसा ही करते हैं तो रुकिए। भारत में हर 3 में से 2 मम्मी-पापा बच्चों को बुखार देखते ही एंटीबायोटिक की शीशी ढूंढने लगते हैं। लेकिन क्या ये सही है? क्या हर बुखार का इलाज एंटीबायोटिक है? फरीदाबाद स्थित फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल के डायरेक्टर (पीडियाट्रिक्स) डॉ. अमित गुप्ता कहते हैं कि हर बार बुखार आने पर बच्चे को एंटीबायोटिक दवा देना सही नहीं है।

बुखार को लेकर डरना है गलत

डॉक्टर बताते हैं कि बुखार कोई बीमारी नहीं है। ये एक संकेत है। बुखार एक तरह से शरीर का अलार्म है, जब शरीर में कोई वायरस या बैक्टीरिया घुसता है, तो हमारी इम्यून सिस्टम उसे मारने के लिए शरीर का तापमान बढ़ा देती है। ताकि कीटाणु मर जाएं। मतलब बुखार आना मतलब शरीर लड़ रहा है। इसलिए बच्चों को बुखार आने के बाद सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि उसका शरीर लड़ किस चीज से रहा है वायरस से या बैक्टीरिया से?

हर बुखार में एंटीबायोटिक दवा देना गलत है।

एंटीबायोटिक किस पर काम करता है और किस पर नहीं?

डॉ. अमित गुप्ता के अनुसार कोई भी एंटीबायोटिक = सिर्फ बैक्टीरिया का दुश्मन। इसलिए एंटीबायोटिक को वायरस के खिलाफ सही नहीं माना जाता है। बच्चों को बुखार आने पर माता- पिता को पहले यह समझना होगा कि 80 % से ज्यादा मामलों में उन्हें बुखार वायरस से आता है। बच्चों को होने वाला सर्दी, जुकाम, फ्लू, वायरल फीवर, चिकनपॉक्स, हाथ-पैर-मुंह की बीमारी, पेट का वायरल - सब वायरस से ही होता है। ऐसे में अगर आप वायरल बुखार में एंटीबायोटिक देंगे तो 2 चीजें होंगी। पहली बुखार वैसे भी 3-5 दिन में अपने आप ठीक हो जाएगा। क्रेडिट एंटीबायोटिक ले जाएगा और साथ में बच्चे के पेट में गैस, डायरिया और इम्यूनिटी कमजोर करने वाला तोहफा भी दे जाएंगे।

बुखार को सबसे पहले थर्मामीटर से मापना जरूरी है। बुखार को सबसे पहले थर्मामीटर से मापना जरूरी है।

बच्चे को बुखार आने की स्थिति में क्या करें?

बच्चों को बुखार आने की स्थिति में सबसे पहले पेरेंट्स को घबराना नहीं चाहिए। बुखार में 90% मामलों में घर पर ही देखभाल काफी होती है और बुखार ठीक हो जाता है-

  1. शरीर का तापमान मापिए- बुखार होने पर सबसे पहले थर्मामीटर से बच्चों के शरीर का तापमान मापने की कोशिश करें। अगर 100.4 F से कम बुखार में दवाई की भी जरूरत नहीं। सिर्फ खूब पानी पिलाइए। इसके साथ ही बच्चे के सिर पर ठंडे पानी की पट्टी करिए। कुछ ही समय में बच्चे के शरीर का तापमान नॉर्मल हो जाएगा।
  2. हाइड्रेशन - पानी, ORS, दाल का पानी, सूप बुखार के समय बच्चों को देना सही रहता है। डॉ. बताते हैं कि बुखार में शरीर बहुत पानी निकलता है। इस स्थिति में शरीर को हाइड्रेशन लेवल बनाए रखना बहुत जरूरी है।

बच्चों को बुखार आने पर डॉक्टर को कब दिखाएं?

अगर इनमें से कोई भी लक्षण है तो 24 घंटे का इंतजार मत कीजिए:

  1. बुखार 3 दिन से ज्यादा है और पेरासिटामोल से भी नहीं उतर रहा
  2. बच्चा बहुत सुस्त है, रिस्पॉन्ड नहीं कर रहा
  3. बच्चे के शरीर पर रैश, उल्टी रुक नहीं रही
  4. 3 महीने से छोटे बच्चे को 100.4 से ज्यादा बुखार होने पर

डॉ. अमित गुप्ता कहते हैं कि बच्चों को बुखार आने की स्थिति में माता- पिता का घबराना बहुत ही आम बात है। लेकिन इस स्थिति में शांत रहना जरूरी है। बुखार आने पर तुरंत बच्चों को एंटीबायोटिक दवा नहीं देनी चाहिए। बुखार आने पर कम से कम 24 घंटे इंतजार करना जरूरी है।

Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। बुखार या किसी अन्य समस्या में बच्चे को किसी प्रकार की दवा या अन्य घरेलू नुस्खा आजमाने से पहले पीडियाट्रिशियन से सलाह जरूर लें।