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Written By: Anshumala | Updated : October 11, 2018 12:16 PM IST
टीनएज लड़कियों के लिए उम्र का यह पड़ाव जितना खूबसूरत है, उतना ही चुनौती भरा भी होता है। © Shutterstock
आज है ''इंटरनेशनल गर्ल चाइल्ड डे''। किशोरावस्था यानी टीनएज उम्र का नाजुक दौर होता है। जब बच्ची टीनएज में आती है तो उसमें शारीरिक व मानसिक बदलाव शुरू हो जाते हैं। टीनएज लड़कियों के लिए उम्र का यह पड़ाव जितना खूबसूरत है, उतना ही चुनौती भरा भी होता है। उसके मन में कई जिज्ञासाएं होती हैं। उस समय पेरेंट्स को उस के साथ बैठ कर उस के सवालों के तार्किक रूप से जवाब देने चाहिए। उनके सवालों को हवा में न उड़ा दें, हंसे नहीं, मजाक न बनाएं। वरना वे आपसे कोई भी बात शेयर नहीं करेंगे। इस उम्र में खासतौर पर दिशा-निर्देश के लिए और अपने जीवन के अनुभवों को बांटने के लिए पेरेंट्स का भावनात्मक सहयोग जरूरी होता है।
5 मुख्य समस्याएं जिससे टीनएज लड़कियां गुजरती हैं
बॉडी इमेज
टीनएज लड़कियों की समस्याओं की सूची सबसे ऊपर इसे ही माना जाता है। इस उम्र आते-आते लड़कियां अपनी बॉडी और अपीयरेंस को लेकर बहुत सचेत हो जाती है। इस समय शरीर में कई तरह से हॉर्मोनल बदलाव होते हैं जिसके कारण वह कई बार सहज महसूस नहीं करती। इस उम्र में पिंपल्स की समस्या आम होती है। इसके कारण उनमें हीनभावना भी पनपने लगती है। ड्रेसिंग सेंस से लेकर हेयर, फिगर को भी कूल दिखने की होड़ होती है।
समाधान
-बारीकी से टीनएजर बेटी को मॉनिटर करें।
- हार्मोनल बदलाव होने से उनके मूड और व्यवहार पर गहरा प्रभाव पड़ता है इसलिए मूड देखकर उनसे उनकी दिल की बात जानने की कोशिश करें।
- पिंपल्स की समस्या से परेशान लड़कियों को समझाएं कि यह इस उम्र की आम समस्या है, जो कुछ समय बाद ठीक हो जाएगी।
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पीरियड्स
यह वह समय है जब पहली बार वह मासिक धर्म की अवस्था में प्रवेश करेगी। ऐसे समय में वह अपने मासिक धर्म चक्र के संबंध में कई गलत धारणाओं और प्रश्नों का विकसित कर सकती है। इस उम्र में पीरियड्स की शुरुआत किसी भी लड़की के जीवन में आने वाला सबसे बड़ा बदलाव है। ऐसे में हर मां की जिम्मेदारी बनती है कि वह अपनी बेटी का खास तौर से ख्याल रखे।
समाधान
- आप अपनी बेटी को इस उम्र तक आते-आते मासिक धर्म के संबंध में पूरी जानकारी देने की कोशिश करें।
- उसे यह समझाएं कि यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है और सभी लड़कियां इससे गुजरती हैं।
- उन्हें इस संबंध में हाइजीन से संबंधित पूरी जानकारी दें।
बारीकी से टीनएजर बेटी को मॉनिटर करें। © Shutterstock
डेटिंग
टीनएज कई सारी समस्याएं और चुनौतियां लेकर आता है। शरीर में सेक्स हॉर्मोंस के प्रवाह अचानक बढ़ने से यह समस्या और ज्यादा बढ़ जाती है। ऐसे में आप अपनी टीनएज बेटी को पहले क्रश में डूबा पा सकते हैं। इस उम्र में विपरीत सेक्स के प्रति आकर्षण बढ़ता है। अपने पेरेंट्स के साथ की बजाय रोमांस और डेटिंग करना, लड़कों से दोस्ती बढ़ाना ज्यादा अच्छा लगता है। यह समय उनके लिए बहुत दुविधा से भरा होता है। ऐसे समय में सुरक्षित सेक्स, सावधानियों को लेकर पूरी जानकारी देना जरूरी है।
समाधान
- उन्हें सेक्स एजुकेशन देने में हिचकिचाएं नहीं। जरूरी जानकारियां टीनएज बेटी तक पहुंचाना बहुत जरूरी है। मां इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। सेक्स से जुड़ी चर्चा के लिए ओपन रहें। इसे हौवा न समझें।
- उन्हें इस बात का एहसास कराएं कि आप उनकी भावनाओं को समझ रही हैं। यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, जिससे हर कोई गुजरता है।
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बुलीइंग
टीनएजर लड़कियों के साथ एक बड़ी समस्या बुलीइंग की भी होती है जो उन्हें बहुत परेशान करती है। यह उनके व्यक्तित्व और व्यवहार को प्रभावित करना शुरू कर देती है। आजकल स्कूलों में बुलीइंग काफी बढ़ गया है। इसकी शिकार होने वाली लड़कियां कई बार डिप्रेशन की शिकार हो जाती हैं।
समाधान
- यह सुनिश्चित करें कि आपकी टीनएज बेटी आपसे सब बातें शेयर करती है।
- अगर आपको महसूस होता है कि वह इस समस्या से घिरी है तो उन्हें इसका सामना करने के लिए प्रोत्साहित करें और इसका विरोध करने का जज्बा उनमें जगाए।
सेल्फ-एस्टीम
इन्हें दूसरों से तुलना करने की आदत होती है। वे अपनी उम्र की लड़कियों से अपनी बॉडी और अपीयरेंस को लेकर कम्पेयर करती रहती हैं। इसके कारण न चाहकर भी वे दबाव महसूस करती हैं। बॉडी में होने वाले बदलावों को लेकर वे खुद पर डाउट करने लगती है। इसके कारण वह अपने चलने, उठने-बैठने, पहनने से लेकर बोलने, सभी को लेकर सतर्क हो जाती हैं। यह उनके सेल्फ-एस्टीम को प्रभावित करता है।
समाधान
- इस बात का ध्यान रखें कि टीनएज बेटी मॉडल्स या एक्ट्रेसेज को अपना आदर्श न मानती हो।
- उन्हें धैर्य से समझाएं कि हर कोई एक-दूसरे से अलग है। हम सभी यूनिक हैं और हमारे खुद के सकारात्मक व नकारात्मक पहलु हैं।