... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
Written By: Yogita Yadav | Published : August 14, 2018 12:24 PM IST
हाल ही में हुए एक शोध में सामने आया है कि सात समंदर पार रहने वाले भारतीयों ने अब भी अपनी सांस्कृतिक आदतों को भुलाया नहीं है। वे अन्य अमेरीकियों की तुलना में कम शराब पीते हैं और बच्चों को अपने साथ सुलाते हैं। साथ ही उनके बच्चों को दादी-नानी का प्यार भी ज्यादा मिलता है।
क्या कहता है शोध
अमेरिका के न्यूजर्सी राज्य में जातीय समूहों के बीच, बच्चों को साथ में सुलाने वाले भारतीय मूल के अमेरिकियों का प्रतिशत सबसे अधिक है, लेकिन उनमें बिस्तर साझा करने के कारण होने वाली आकस्मिक अनपेक्षित शिशु मौत (एसयूआईडी) की दर सबसे कम है. यह जानकारी रटगर्स बायोमेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज के अध्ययन में सामने आई है।
मानते हैं जोखिम कारक
आमतौर पर अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स, बिस्तर साझा करने को एसयूआईडी में एक उच्च जोखिम कारक मानती है। एसयूआईडी में एक साल तक की उम्र के बच्चों की आकस्मिक मौत, दुर्घटनावश दम घुटना, बिस्तर पर गला दब जाना, बीमारी और अन्य अज्ञात कारण शामिल हैं। शोधकर्ताओं ने इस स्थिति के लिए जिन कारकों को जिम्मेदार माना है उनमें भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों की, बच्चों की तरफ पीठ कर सोने की आदत भी शामिल है।
परिवार का मिलता है साथ
रटगर्स रॉबर्ट वुड जॉन्सन मेडिकल स्कूल में बाल चिकित्सा की एक प्रोफेसर बारबरा ओस्टफेल्ड ने बताया, ‘‘एसयूआईडी के जोखिम को काफी हद तक बढ़ाने वाले कारकों में धूम्रपान करना, मद्यपान करना और मां की थकान आदि हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय मूल के अमेरिकी अन्य लोगों की तुलना में कम शराब पीते हैं और धूम्रपान भी कम करते हैं। इसके अलावा बच्चों की देखभाल में दादा-दादी बहुत सक्रिय होते हैं जिस कारण मां को कम थकान होती है। बिस्तर साझा करने के अलावा, गरीबी भी एसयूआईडी का खतरा बढ़ाती है जबकि भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों की आमदनी अच्छी खासी है।’’
कम थकती है मां
यह अध्ययन न्यूजर्सी पीडियाट्रिक्स पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन के दौरान शोधार्थियों ने न्यूजर्सी में जन्मे, एशियाई भारतीय वंश के 83,000 बच्चों की 15 साल से अधिक अवधि तक मृत्यु दर तथा इस आबादी के सोने के तरीकों पर गौर किया। परिणामों से पता चला कि एशियाई भारतीय वंश की अमेरिका में जन्मी जिन महिलाओं को सर्वे में शामिल किया गया था उनमें से 97 फीसदी ने बच्चों के लिए पालना का उपयोग किया। जबकि बच्चों के लिए पालने का उपयोग करने वाली विदेशी महिलाओं की संख्या 69 फीसदी थी।
चित्रस्रोत: Shutterstock.
Disclaimer: The content on TheHealthSite.com is only for informational purposes. It is not at all professional medical advice. Always consult your doctor or a healthcare specialist for any questions regarding your health or a medical condition.