
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Updated : April 28, 2026 12:32 PM IST
Medically Verified By: Dr. Hiremath Sagar
Image credits by: फोटो साभार- ChatGPT
गर्मियों की छुट्टियां बच्चों के लिए खेल-कूद और मस्ती का समय होती हैं, लेकिन बढ़ता तापमान उनकी सेहत के लिए गंभीर चुनौतियां भी लेकर आता है। अक्सर माता-पिता यह मान लेते हैं कि गर्मी का असर बच्चों पर भी वैसा ही होता है जैसा बड़ों पर, लेकिन चिकित्सा विज्ञान के अनुसार बच्चे 'छोटे वयस्क' नहीं होते। बच्चों के शरीर की बनावट और उनकी आंतरिक प्रणाली बड़ों से काफी अलग होती है। उनके शरीर में गतिविधि के दौरान वजन के अनुपात में अधिक गर्मी पैदा होती है और उनके पसीने की ग्रंथियां अभी पूरी तरह विकसित नहीं होतीं, जिससे वे गर्मी को कुशलता से बाहर नहीं निकाल पाते।
नारायणा हेल्थ सिटी, बेंगलुरु के सीनियर पीडियाट्रिशियन डॉ. हिरेमंत सागर कहते हैं कि ‘विशेष रूप से छह महीने से कम उम्र के शिशुओं में खुद को ठंडा रखने की क्षमता लगभग शून्य होती है। वहीं, थोड़े बड़े बच्चे खेल में इतने खो जाते हैं कि वे प्यास लगने या थकान महसूस होने पर भी रुकना पसंद नहीं करते।’ ऐसे में हम उन्हें तो नहीं रोक सकते, लेकिन सेफ्टी टिप्स को जरूर फॉलो कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में माता-पिता कैसे अपने बच्चों को गर्मी के मौसम से बचाएं, आइए डॉक्टर से ही जानते हैं।
गर्मी से लड़ने के लिए सबसे महत्वपूर्ण हथियार सही हाइड्रेशन होता है। हमें यह समझना होगा कि प्यास लगना डिहाइड्रेशन का एक देर से आने वाला संकेत है। इसका मतलब है कि जब बच्चे को प्यास महसूस होती है, तब तक उसका शरीर पहले ही पानी की कमी से जूझना शुरू कर चुका होता है। इसलिए डॉक्टर के बताए और नीचे दिए गए बिंदुओं को ध्यान में रखें जैसे-
सूरज की हानिकारक किरणों से बचने के लिए सिर्फ सनस्क्रीन लगाना ही काफी नहीं है। डॉक्टर ने कुछ टिप्स दी हैं, जिन्हें आप फॉलो कर सकते हैं। जैसे-
डॉक्टर बताते हैं कि अगर खेलते समय बच्चा अचानक सुस्त पड़ने लगे, उसे चक्कर आएं या शरीर बहुत गर्म हो जाए, तो इसे हीट एग्जॉशन का संकेत मानें। ऐसी स्थिति में बच्चे को तुरंत किसी ठंडी या छायादार जगह पर ले जाएं और उसके शरीर से अतिरिक्त कपड़े हटा दें। ठंडे (बर्फ जैसे नहीं, बल्कि सामान्य ठंडे) गीले कपड़ों को उसकी गर्दन, बगल और माथे पर रखें। बच्चे को धीरे-धीरे घूंट-घूंट कर पानी पिलाएं।
एक और बहुत जरूरी बात यह है कि कभी भी, किसी भी परिस्थिति में बच्चे को खड़ी कार के अंदर अकेला न छोड़ें। कार के भीतर का तापमान बाहर की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ता है और यह कुछ ही मिनटों में जानलेवा साबित हो सकता है।
आखिर में, बच्चों के आहार पर भी ध्यान दें। गर्मी में पाचन शक्ति थोड़ी धीमी हो जाती है, इसलिए उन्हें भारी और तैलीय भोजन देने के बजाय हल्का और सुपाच्य भोजन दें। ताजे फल जिनमें पानी की मात्रा अधिक हो, जैसे तरबूज, खीरा और संतरा, उनके लिए बेहतरीन स्नैक्स हैं।
बच्चे के खेल शुरू करने से लगभग आधा घंटा पहले दिया हल्का नाश्ता कराएं। यह उन्हें एनर्जी भी देगा और पाचन तंत्र पर बोझ भी नहीं डालेगा। बच्चों की सेहत की कमान आपके हाथों में है, इसलिए उनकी सक्रियता के साथ-साथ उनके आराम और सुरक्षा का तालमेल बनाए रखें।
Disclaimer: गर्मियों में थकान, कमजोरी, पसीना अधिक आना और सिर दर्द होना आम समस्या है, लेकिन इस पर ध्यान देना बहुत ही ज्यादा जरूरी है। ऐसे में बच्चों को धूप में घर से बाहर निकलने से मना करें और जब बाहर जाना जरूरी हो तो पानी की बोतल और भरे पेट के साथ ही भेजें। अगर आपको बच्चे में ज्यादा कमजोरी दिख रही है तो किसी विशेषज्ञ या चिकित्सक से परामर्श जरूर करें।
अत्यधिक प्यास या निर्जलीकरण गहरे रंग का मूत्र सामान्य से अधिक चिड़चिड़ा शरीर का तापमान बढ़ना या 105°F (40.5°C) से अधिक तेज बुखार होना।
बच्चों को तेज धूप (सुबह 10 से शाम 4 बजे) में खेलने से रोकने के लिए उन्हें घर के अंदर दिलचस्प गतिविधियों, जैसे- पेंटिंग, पहेलियां, या बोर्ड गेम्स में व्यस्त रखें।
दही-चावल, मूंग दाल-खिचड़ी या लौकी की सब्जी और रोटी, जो पचाने में सबसे हल्के होते हैं।
थकान दूर करने के लिए पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लें और पानी जरूर पिएं।
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