
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : August 27, 2022 1:16 PM IST
Children using bad word: ऐसा कहा जाता है कि बच्चों का मन एक कोरा कागज होता है और वे जो भी देखते हैं वही सीख जाते हैं। इसलिए पेरेंट्स बचपन से ही अपने बच्चों को अच्छी आदतें सिखाना शुरू कर देते हैं। लेकिन जरूरी नहीं है कि बच्चा सभी अच्छी आदतें ही सीखे। बाहर दूसरे बच्चों के साथ खेलते हुऐ और उन्हें देखते हुए बच्चा नटखट व शरारती बन जाता है और यह आम बात है। लेकिन कई बार देखा गया है कि छोटे-छोटे बच्चों को गाली देने की आदत पड़ जाती है। अगर बच्चा बचपन में ही गाली देना सीख जाए तो उससे उसके पूरे जीवन पर असर पड़ता है। अगर आपका बच्चा भी बुरी संगत में पड़कर गाली देना सीख गया है, तो उसकी यह आदत छुड़ाने का मौका सिर्फ अभी है। ऐसा इसलिए क्योंकि जब बच्चा बड़ा हो जाता है, तो उसकी यह गाली देने की आदत छूटना मुश्किल हो जाती है। इस लेख में 5 ऐसे उपाय बताए गए हैं, जो बच्चे की गाली देने की आदत को बंद करेंगे।
वैसे तो बच्चे घर वालों के सामने गाली नहीं देते हैं और आगे-पीछे ही अपशब्दों का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन यह आदत लंबे समय तक नहीं छिपती है और बच्चा गलती कर ही देता है। अगर बच्चा आपके सामने गाली ते तो उसे तुरंत रोकें और प्यार से समझाएं। उसे बताएं कि वह एक अच्छा बच्चा है और उसके मुंह से गालियां सुनना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता है
अगर आपने बच्चे को सामने गाली देते नहीं देखा है, लेकिन आपको पता है कि वह गलत संगत में पड़ रहा है, तो आपको ध्यान रखना होगा। इसलिए सिर्फ आपको अपने बच्चों पर नहीं बल्कि उसके दोस्तों पर भी नजर रखनी है। अगर उसके दोस्त गाली देते हैं, तो आपका बच्चा भी जरूर गाली देना सीख जाएगा। इसलिए उसे बुरी संगत से दूर रखना जरूरी है।
बच्चा पढ़ाई में कैसा परफॉर्म कर रहा है, यह भी देखना बहुत जरूरी है। अगर उसके मार्क्स अच्छे नहीं आ रहे हैं और घर पर उसका पढ़ाई में मन नहीं लग रहा है, तो उसे समझना बेहद जरूरी है। ऐसा इसलिए क्योंकि बच्चे जब बुरी संगत में पड़ जाते हैं, तो उन्हें पढ़ाई करना अच्छा नहीं लगता है। बच्चे के पढ़ने की आदत डालें और नियमित रूप से उसके टीचर के संपर्क में बने रहें।
अपने बच्चे को बचपन से ही प्रेरणात्मक कहानियां सुनाना शुरू कर दें। रामायण, महाभारत और दूसरी प्रेरणात्मक कहानियां सुनाएं। उससे बच्चे में नैतिक शिक्षा का विकास होगा और उस पर किसी बुरी संगत का असर नहीं होगा। जो माता-पिता बच्चों को बचपन से ही अच्छी आदतें सिखाने लग जाते हैं, वे कभी बुरी संगत में पड़ते ही नहीं हैं।
बच्चे को अच्छाई और बुराई व उनके परिणाम में फर्क बताना जरूरी होता है। जब तक आप उसे यह नहीं बताएंगे उसे कैसे पता चलेगा कि वह किस लाइन में है। उन्हें अच्छे और बुरे लोगों की पहचान करना सिखाएं ताकि कभी भी वह भविष्य में कभी भी वह बुरे लोगों के जाल में न फंसे।