... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
Written By: Editorial Team | Published : November 3, 2017 4:03 PM IST
इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि हमारी संस्कृति में से बहुत सी चीजें ऐसी हैं जिसकी वजह से हमें हमारे शरीर को लेकर बहुत जुनूनी बना दिया है। चाहे हम अपने शरीर, वर्कआउट या अपनी डायट में कितने ही बदलाव ना कर लें लेकिन ज़रूरी नहीं कि हम अपने शरीर की स्थिति से कभी खुश होते हैं। लेकिन हम अकेले ऐसे नहीं जिनके साथ ऐसा होता है। हम जो कहते हैं और जिसपर विश्वास करते हैं, उससे हमारे बच्चों भी प्रभावित हो सकते हैं। बहुत कम उम्र से ही, बच्चे अपनी धारणा और अपनी सोच बना लेते हैं जिनपर अक्सर हमारे विचारों का या दूसरों क्या कहते हैं उसका असर होता है। उनके मन कोमल नरम होते हैं। इसलिए अगर कोई बच्चा किसी के शरीर के बारे में कुछ कहता है तो आपको इसपर हैरान नहीं होना चाहिए।
हर बार जब हम अपनी झुलती बाहों या मोटी जांघों के बारे में बात करते हैं, तो हम अपने बच्चे को एक नया विचार पैदा कर सकते हैं। और समय के साथ, बच्चे को विश्वास करना शुरू हो जाएगा कि हमारे शरीर की बनावट या हमारा रुप ही अच्छे व्यवहार या सफलता का मापदंड है। तो ऐसे में हम अपने बच्चे को इन विचारों पर भरोसा करने से कैसे रोक सकते हैं? हम उसे सोशल मीडिया में शरीर को लेकर शर्मिंदा करने वाले लोगों से कैसे बचा सकते हैं? हमें पहले होमवर्क करना होगा, और अपने बच्चे को उसके शरीर को जैसा है वैसे ही अपनाने के लिए और विश्वास बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए।
किसी और को उसके शरीर के लिए भला-बुरा ना कहें
वैसे तो किसी सुंदर महिला की उसकी सुंदरता के लिए तारीफ करने में कोई बुराई नहीं है लेकिन इससे ऐसा ही साबित होता है कि सुंदर लोगों को अक्सर उनके रुप-रंग के लिए ज़्यादा तारीफ और तवज्जो मिलता है। खूबसूरती की बजाय हमें लोगों की तारीफ उनके व्यवहार के लिए शुरू करनी चाहिए। उन्हें बताना चाहिए कि उनके आसपास रहने से हम कैसा महसूस करते हैं या वे कितने ऊर्जावान हैं। इस तरह की तारीफों का असर बहुत अधिक होता है और इस प्रकार बच्चों के सामने एक सकारात्मक उदाहरण पेश किया जाता जिसे वह देखकर कुछ अच्छा ही सीखते हैं।
बॉडी शेम ना करें
हर बार जब हम किसी को उसके शरीर के लिए शर्मिंदा करते हैं, तो हम केवल यही बताते कि एक प्रकार का शरीर दूसरे तरह के शरीर की तुलना में बेहतर होता है। इस तरह हम किसी को कम और किसी बेहतर साबित करने की कोशिश करते हैं। अगर हम चाहते हैं कि बच्चे अपने शरीर को लेकर सकारात्मक सोच के साथ बड़े हों तो हमें उन्हें यह सिखाना होगा कि हम जीवन में जो चीज मायने रखती है, वह है हमारे काम।
खुद को कोई नाम ना दे पद्मा
हमारे बच्चे पर सकारात्मक प्रभाव डालने का सबसे अच्छा तरीका है खुद को लेबल नहीं करना। जी हां, जब हम वजन करते हैं और हमारा वजन बढ़ा हुआ दिखता है तो हम अपने आप को 'मोटा' नहीं कहेंगे। कोई सड़क चलता व्यक्ति आपके बच्चे को मोटा, गोल-मटोल या नाटा ना कहे उससे पहले हमें खुद को अच्छा कहना होगा, और खुद को कोई लेबल देने से बचना नहीं चाहिए।
जानें बच्चों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए
जब-जब हमसे पूछा जाता है कि 'कोई व्यक्ति इतना मोटा या पतला क्यों है', तो हमें सिर्फ अपने बच्चों को चुप कराने की बजाय, हमें हर बार उसके सवाल का जवाब देना चाहिए। हमें उन्हें बताना चाहिए कि हर कोई अलग है-कुछ लोग बड़े हैं, कुछ छोटे हैं, कुछ बूढ़े हैं और कुछ लंबे हैं।
अपने बच्चों को उनके शरीर को समझने में मदद करें
हमें अपने बच्चों को उनके शरीर के बारे में समझाना चाहिए कि वह कैसे काम करता है। उन्हें बताएं कि उन्हें हेल्दी भोजन खाना चाहिए और एक्सरसाइज करना चाहिए ताकि वे अपने शरीर का ख्याल रख सकें, वजन कम न करें या खुद के शरीर को बदलने की कोशिश न करें। अगर वे यह समझते हैं कि उनका शरीर क्या कर सकता है, तो उनके लिए उन्हें अपने शरीर के लिए कभी शर्मिंदा होने की ज़रूतत नहीं होगी।
Read this in English.
अनुवादक: Sadhana Tiwari
चित्र स्रोत: Shutterstock Images.
Disclaimer: The content on TheHealthSite.com is only for informational purposes. It is not at all professional medical advice. Always consult your doctor or a healthcare specialist for any questions regarding your health or a medical condition.