
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : April 16, 2026 8:17 PM IST
How to Discipline a Child Without Yelling or Hitting: बच्चों को अनुशासन सिखाने के लिए डांट और सख्ती जरूरी है? आपको क्या लगता है? हो सकता है आप इस बात से सहमत हो, लेकिन क्या आप जानते हैं कि डांट और सख्ती हमेशा सही नहीं होती। बच्चे नाजुक दिल के होते हैं। ऐसे में डांट से वह डर सकते हैं और अनुशासन सीखने की बजाय झूठ बोलना, छुपाना या विद्रोह कर अपनी भावनाएं व्यक्त कर सकते हैं। बाल विकास सलाहकारों का कहना है कि अनुशासन प्यार, समझ और सही मार्गदर्शन से भी सिखाया जा सकता है। लेकिन आपको यह आसान नहीं लगता है, तो कुछ आसान और सकारात्मक तरीकों को अपनाकर आप उन्हें बिना डांटे भी जिम्मेदारी, आत्मनियंत्रण और अच्छे व्यवहार कैसे करना है सीखा सकते हैं।
बच्चे को अनुशासन सिखाने सारी कोशिश फेल हो सकती हैं, अगर आप खुद अनुशासन फॉलो नहीं कर पा रहे हैं तो। यह भी आप जानते हैं कि बच्चे वही सीखते हैं, जो वे देखते हैं। ऐसे में अगर आप माता-पिता खुद अनुशासन में रहेंगे, समय पर हर काम को करेंगे और दूसरों का सम्मान करेंगे, तो बच्चे भी वही आदतें अपनाएंगे। आप बच्चे के शिक्षक है। इसलिए डांटने की बजाय अपने व्यवहार में वह आदतें लाएं, जो आप अपने बच्चे में देखना चाहते हैं।
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बच्चे को अनुशासन सिखाने के लिए दूसरी सबसे जरूरी चीज है, उसकी कोशिशों की सराहना करना और उसको सपार्ट देना। बच्चे को बात-बात पर डांटना उसके दिमाग पर बुरा असर डालता है, इसलिए अनुसाशन सिखाने के लिए भी बच्चे को डांटना सही नहीं है। लेकिन आपको उनकी छोटी-छोटी अच्छी आदतों की सराहना भी करनी है। असल में जब बच्चे को उसके अच्छे व्यवहार के लिए सराहना मिलती है, तो वह उसे दोहराने के लिए प्रेरित होता है। इसलिए आज से उसे डांटने की बजाय प्रोत्साहन देने की कोशिश करें। इससे बच्चा खुद अनुशासन अपनाने लग जाएगा।
आप बच्चों से जैसे बात करेंगे, उनका व्यवहार भी उसी के अनुरूप ढलेगा। जब आप डांटने की बजाय शांत और समझने वाले तरीके से उनसे बात करते हैं, तो बच्चा आपकी बात का विरोध नहीं करेगा, बल्कि बेहतर ढंग से उसे समझ पाएगा। उदाहरण के लिए आप उसे “ऐसा मत करो” कहने की बजाय “अगर तुम ऐसा करोगे तो इसका असर क्या होगा” जैसे वाक्यों का उपयोग करें। इससे बच्चा अपनी समझ विकसित करेगा और सही-गलत में बेहतर ढंग से फर्क समझ पाएगा। वहीं नियमित बातचीत करने से बच्चे के साथ भरोसा भी मजबूत होता है, जिससे वह अपनी बातें खुलकर शेयर कर पाता है।
बच्चों के लिए आपके पास स्पष्ट नियम और एक फिक्स रूटीन होना चाहिए। असल में जब उन्हें पता होगा कि क्या करना है और कब करना है, तो वे ज्यादा अनुशासित रहेंगे। इसमें पढ़ाई का समय, खेलने का समय और सोने का समय तय होना चाहिए। हालांकि नियम बहुत कठोर नहीं होने चाहिए, बल्कि समझदारी से बनाए जाने चाहिए। लेकिन सबसे जरूरी, बच्चा नियम तोड़े, तो उसे डांटने की बजाय इसके क्या परिणाम होंगे समझाएं, ताकि वह अगली बार से वो गलती न करें।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
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