
विद्या शर्मा
विद्या शर्मा को डिजिटल मीडिया में लगभग 3 साल का अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता ... Read More
Written By: Vidya Sharma | Published : January 16, 2026 12:40 PM IST
Medically Verified By: Dr Shubham Sharma
Air Pollution And Parenting Tips: दिल्ली से लेकर हरियाणा और पंजाब तक सभी शहरों व राज्यों में पॉल्यूशन दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है। ऐसे में कुछ दिनों तक तो स्कूल बंद किए जा सकते हैं, लेकिन ऐसा लंबे समय तक नहीं रखा जा सकता है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है साथ ही बाहर न भेजना उनकी फिजिकल एक्टिविटी को भी इफेक्ट करता है। लेकिन बढ़ते वायु प्रदूषण के साथ बच्चों का बाहर खेलना अब सिर्फ समय का नहीं, बल्कि हवा की गुणवत्ता का भी सवाल बन चुका है। नारायणा हॉस्पिटल के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉक्टर शुभम शर्मा कहते हैं कि 'पहले यह तय किया जाता था कि बच्चा कितनी देर खेलेगा, अब यह भी देखा जाने लगा है कि वह किस हवा में खेलेगा। AQI यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स को समझकर अगर माता पिता फैसले लें, तो बच्चों की सेहत को काफी हद तक सुरक्षित रखा जा सकता है।'
उनका ऐसा कहना का मकसद यह है कि जिस तरह आजकल पॉल्यूशन बढ़ रहा है और बच्चों की सेहत पर बुरा असर डाल रहा है। माता-पिता को उन्हें घर से बाहर भेजने से पहले सोचना चाहिए। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर द्वारा बताई गई जानकारी के आधार पर गाइड तैयार की गई है, जिससे यह तय किया जा सके कि कब खेल को जारी रखा जाए, कब सीमित किया जाए और कब पूरी तरह रोक दिया जाए। आइए जानते हैं डॉक्टर क्या कहते हैं।
डॉक्टर कहते हैं कि ‘AQI एक ऐसा पैमाना माना गया है जो हवा में मौजूद पोल्यूटेंट के स्तर को आसान भाषा में बताता है। जितना ज्यादा AQI होता है, उतनी ही हवा सेहत के लिए खराब मानी जाती है। बच्चों के फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं पाए जाते, इसलिए प्रदूषित हवा का असर उन पर जल्दी देखा जाता है। यही कारण रहा है कि खेलने से पहले AQI जांचने की आदतको जरूरी माना गया है। नीचे हम आपको डॉक्टर द्वारा बताए 5 स्टेप्स के बारे में बताने वाले हैं, जिन्हें सभी माता-पिता फॉलो कर सकते हैं।
डॉक्टर ने पहला कदम यह माना गया है कि माता पिता दिन की शुरुआत AQI देखकर करें। मोबाइल ऐप, मौसम से जुड़ी वेबसाइट या सरकारी प्लेटफॉर्म से यह जानकारी आसानी से मिल जाती है। सुबह AQI देखने से यह तय करने में मदद मिलती है कि बच्चे का आउटडोर प्लान सुरक्षित रहेगा या नहीं। कई परिवारों में यह नियम बनाया गया है कि AQI देखे बिना बाहर खेलने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
जब AQI अच्छे या संतोषजनक स्तर पर पाया जाता है, तब बाहर खेलने की अनुमति आमतौर पर दी जाती है। डॉक्टर कहते हैं कि ऐसे समय में भी यह सलाह दी जाती है कि खेल का समय सीमित रखा जाए और बहुत ज्यादा थकाने वाली गतिविधियों से बचा जाए। सुबह और शाम के समय को बेहतर माना जाता है, क्योंकि तब प्रदूषण अपेक्षाकृत कम पाया जाता है।
डॉक्टर कहते हैं कि अगर जब AQI 101 से 200 तक पहुंच जाए तो इस स्तर पर हवा मध्यम से खराब मानी जाती है। ऐसे में बच्चों को लंबे समय तक बाहर खेलने की अनुमति देना सही नहीं समझा जाता। खेल का समय कम किया जाता है और हल्की गतिविधियों को तरजीह दी जाती है। दौड़ भाग या बहुत ज्यादा पसीना लाने वाले खेलों से बचाव किया जाता है। इस दौरान पानी पिलाने और खेलने के बाद बच्चे को आराम देने पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है।
जब AQI बहुत खराब स्तर पर पहुंचता है, तब आउटडोर प्ले को टालना बेहतर माना जाता है। अगर बाहर जाना जरूरी हो, तो समय बेहद सीमित रखा जाता है। पार्क या सड़क किनारे खेलने की बजाय घर के अंदर विकल्प तलाशे जाते हैं। कई माता पिता इस दौरान इनडोर गेम्स, योग या हल्की स्ट्रेचिंग को अपनाते पाए गए हैं।
इस स्तर पर हवा को खतरनाक माना गया है। बच्चों को बाहर खेलने से पूरी तरह रोक दिया जाना चाहिए। इस दौरान घर के अंदर ही खेल और शारीरिक गतिविधियों की योजना बनाई जाती है। खिड़कियां बंद रखी जाती हैं और अगर संभव हो, तो एयर प्यूरीफायर का इस्तेमालकिया जाता है। बच्चों को यह समझाया जाता है कि यह रोक सजा नहीं, बल्कि उनकी सेहत के लिए जरूरी कदम है।

AQI के आधार पर खेल के नियम बनाना शुरू में मुश्किल लग सकता है, लेकिन धीरे धीरे यह आदत बन जाती है। इससे बच्चों की सांसों पर कम दबाव पड़ता है और लंबे समय में उनकी सेहत को फायदा पहुंचाया जा सकता है। बदलती हवा के साथ खेल के तरीके बदलना अब समझदारी का कदम माना जाने लगा है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।