
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Written By: Kishori Mishra | Published : January 20, 2026 9:20 AM IST
Gaming Habits
How to stop online gaming addiction : आज के इस जमाने में जहां हर किसी के पास लैपटॉप, मोबाइल और टैबलेट जैसी चीजें हैं, तो ऐसे में सोशल मीडिया बच्चों की जिंदगी का भी अहम हिस्सा बन गया है। कुछ बच्चे सिर्फ मनोरंजन के लिए फोन और गैजेट्स का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन कुछ बच्चे गेम्स खेलने के लिए। गेमिंग एक लत की तरह है। अगर किसी को लग जाए, तो इसे छुड़ाना बिल्कुल भी आसान नहीं है। फोन या लैपटॉप पर गेम्स खेलने की वजह से बच्चा न तो अपनी पढ़ाई पर और न ही बाकी चीजों पर ध्यान दे पाता है। इससे बच्चे की फिजिकल और मेंटल हेल्थ पर भी असर पड़ता है।
कई बार माता-पिता बच्चे की इस लत को छुड़ाने के लिए उन्हें डांटने के साथ-साथ थप्पड़ भी जड़ देते हैं। हालांकि, इस तरह के तरीके आजमाने से बच्चों की लत तो नहीं छूटती, लेकिन बच्चा आपसे नाराज जरूर हो सकता है। ऐसे में हम आपको कुछ ऐसे तरीके बताने जा रहे हैं, जिनकी मदद से आप अपने बच्चे की गेमिंग की आदत छुड़ा सकते हैं।
बच्चे किसी भी बात को तब तक नहीं मानते हैं, जब तक कि उन्हें किसी भी चीज के बारे में अच्छे से न बताया जाए या समझाया जाए। ऐसे में अगर आप अपने बच्चे की ऑनलाइन गेमिंग की आदत को छुड़ाना चाहते हैं, तो सबसे पहले उसे ऑनलाइन गेमिंग के नुकसान के बारे में बताएं। उन्हें बताएं कि ज्यादा गेम खेलने की वजह से उनकी आंखें कमजोर हो सकती हैं। इसके अलावा, इससे दिमाग पर भी बुरा असर पड़ता है। बच्चों को यह बताने की जरूरत होती है कि गेमिंग की वजह से जब बच्चे रातभर जागते रहते हैं, तो उन्हें नींद न आने की समस्या हो सकती है, जिससे उनमें चिड़चिड़ापन भी हो सकता है। ऐसे में अगर आप अपने बच्चों को प्यार से समझाएंगे, तो वे आपकी बात को जरूर मानेंगे।
अगर आपका बच्चा लगातार गेम खेल रहा है और उसकी वजह से बाकी चीजों पर ध्यान नहीं दे रहा है, तो उसे कहें कि वह हर काम के लिए एक टाइम टेबल मनाएं। जिससे कि वह अपनी पढ़ाई, खेलकूद और खान-पान पर भी ध्यान दे पाएं। अन्यथा गेमिंग की वजह से बच्चे की फिजिकल हेल्थ पर भी असर पड़ता है।
अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा ज्यादा समय फोन पर या गेमिंग पर न बिताएं, तो कोशिश करें कि खुद भी उसके साथ समय बिताएं। दरअसल, बच्चे तब भी खुद को गेम्स में बिजी रखने लगते हैं, जब उनके पास कोई बात करने के लिए नहीं होता है। इसलिए कोशिश करें कि अगर आपके पास समय हैं, तो अपने बच्चे के साथ बैठें, खेले और उसके साथ बात करें।
बच्चों की फिजिकल और मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाए रखने के लिए उसे बाहर खिलाना भी बहुत जरूरी है। अगर बच्चा लैपटॉप या कंप्यूटर पर गेम ही खेलता रहेगा, तो इससे उसके शरीर का विकास अच्छे से नहीं होगा। इसलिए बच्चे को बाहर खेलने के लिए भेजें। इससे उसके नए दोस्त भी बनेंगे, जो पर्सनैलिटी के विकास के लिए बेहतर होता है।