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Written By: Pallavi Kumari | Published : June 22, 2022 3:23 PM IST
फर्स्ट ऐड (First Aid) के बारे में हर किसी को जानना चाहिए। क्योंकि आखिरकार छोटा सा फर्स्ट एड भी किसी की जान बचा सकती है। भले ही आपको ये सुन कर अजीब लग रहा हो पर फर्स्ट एड जीवन बचाने के लिए एक प्राथमिक उपचार है। जैसे कि अगर आपको चोट लग गई, किसी का एक्सीडेंट हो गया हो या फिर हड्डी चटक गई हो या फिर कहीं जल गया हो तो फर्स्ट एड डॉक्टर के पास जाने से पहले स्थिति को कंट्रोल करने में मदद करती है। इसलिए आपको अपने बच्चों को फर्स्ट ऐड के बारे में बताना चाहिए और इसे करना सीखाना चाहिए।
माता-पिता को बच्चों को सबसे पहले यही बताना चाहिए कि आखिर कार फर्स्ट एड (First Aid) जरूरी क्यों है। उन्हें अपने बच्चों क बताना चाहिए कि जब किसी को चोट लग जाए या फिर एक्सीडेंट हो जाए तो एक छोटे डॉक्टर की तरह आप उस आदमी का इलाज कर सकते हैं। यानी कि आप उसके पहले डॉक्टर हुए और आपने उसे फर्स्ट एड दिया। इसके बाद डॉक्टर को कॉल कर दें। इससे उस आदमी की जान बच सकती है या उसे अपनी तकलीफ से राहत मिल सकती है।
बच्चों को फर्स्ट ऐड किट में (first aid kit) बनाने के बारे में बताएं। साथ ही किट में रहने वाली चीज और इसके उपयोग के बारे में जरूर बताएं। इससे उन्हें यह समझने में भी मदद मिलती है कि आपातकालीन स्थिति में प्राथमिक चिकित्सा किट का उपयोग किया जाना है, यह कोई खिलौना नहीं है। इसके लिए उन्हें बताएं कि उनके फर्स्ट ऐड बॉक्स में ये सामान होना चाहिए। जैसे कि
-थर्मामीटर
-एंटीसेप्टिक क्रीम
-बैंडेज
-रूई यानि कॉटन बॉल
-कैंची
-क्लींजिंग लोशन
-मास्क
-एंटासिड
-बुखार की कोई दवा
-स्प्रे, बाम या दर्द निवारक जेल
-छाले और दांतो के दर्द को दूर करने के लिए जेल
बच्चों को इन तीन चीजों के बारे में बचपन से ही पता होना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि ये तीनों ही चीजें उनके सामने कभी भी आ सकती हैं। ऐसे में उन्हें मामूली चोट, खरोंच से लेकर किसी एक्सीडेंट वाले व्यक्ति तक को फर्स्ट ऐड देना बताएं। उन्हें बताएं कि
-पहले व्यक्ति को पानी पिला कर शांत करें।
-फिर साबुन और पानी से या फिर क्लींजिंग लोशन से घाव धो कर साफ करें।
-ब्लीडिंग हो रही हो तो डॉक्टर को पहले कॉल करें और अपना काम करते रहें।
- ब्लीडिं को रोकने के लिए उस क्षेत्र पर कॉटन से दबाव डालें।
-एक एंटीबायोटिक क्रिम लगा दें।
-सूजन और दर्द को कम करनेके लिए बर्फ लगाने के बारे में बताएं।
-आवश्यकतानुसार एक साफ पट्टी या चोट पर कपड़ा बांध दें।
-छोटा कट हो तो बैंडेज लगा दें।
बच्चों को बताएं कति पहले तो आग से दूर रहें या फिर उन चीजों से दूर रहें जिनका तापमान ज्यादा हो सकता है। इसके अलावा अगर वे जल भी जाते हैं या कोई और जल जाता है तो उन्हें फर्स्ट एड देना बताएं। जैसे कि
- जली हुई जगह पर बर्फ-ठंडी पट्टी बांधे
-कोई ठंडा क्रीम और लोशन लगा दें।
- जलन कम करने के लिए गीला तौलिया बांध दें।
-बताएं कि जले पर टाइट ड्रेसिंग न लगाएं, क्योंकि यह मांस से चिपक सकता है और हटाने पर स्किन को छील सकता है।
बच्चों को बताएं कि कई बार नाक से खून निकलने लगता है। ऐसे में इससे डरना नहीं चाहिए बल्कि पहले नाक में थोड़ा पानी डाल कर नाक ऊपर कर लें। फिर कुछ दे ऐसे ही बैठ जाएं। इसके अलावा अगर किसी को हड्डी की चोट लगी है तो बताएं कि प्राथमिक उपचार के रूप में पहले व्यक्ति को आराम से बैठा दें। उसके बाद गर्म या ठंडे पानी की सिंकाई दें। उसके बाद एंटीइंफ्लेमेटरी यानी कि दर्द को ठीक करने वाला लोशन लगा दें। पर ध्यान रखें कि हड्डियों की मालिश ना करें क्योंकि इससे हड्डी या खिंचाव को नुकसान हो सकता है। उसके बाद व्यक्ति को डॉक्टर के पास ले जाएं।