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Written By: Editorial Team | Updated : July 30, 2018 7:18 PM IST
हमारे माता-पिता, दादा-दादी और नाना-नानी बचपन में हमें कई अच्छी और हेल्दी आदतें सिखाते हैं। सुबह जल्दी उठने से लेकर, सुबह प्रार्थना करने, दीपक जलाना, ज़मीन पर बैठकर खाना और समय-समय पर हाथ धोना, आदि वो आदतें हैं जिनके लिए आपमें से लगभग हर किसी को बचपन में सलाह दी गई थी। तो आप इनमें से कौन-सी आदतें आज भी दोहराते हैं? औऱ आपने अपने बच्चों को कौन-कौन-सी आदतें सिखाई हैं? यहां हम गिनवा रहें है कुछ ऐसी ही अच्छी आदतें जो आपको अपने नन्हें फैमिली मेम्बर्स को सिखानी चाहिए।
1) सुबह जल्दी उठना- भला कौन अब सुबह जल्दी उठता है?..देर तक पार्टी करना, दिन-रात की शिफ्ट में काम करने और घूमने-फिरने जैसे कई बहाने हैं जिनकी वजह से हम सुबह जल्दी नहीं उठ पाते। लेकिन सुबह जल्दी उठने के बहुत से फायदे होते हैं। आयुर्वेद के मुताबिक अगर आप सुबह उठते हैं आपको तनाव नहीं होता। साथ ही आप पूरे दिन तरोताज़ा और खुश महसूस करते हैं। प्रैक्टीकली देखें तो इसके अलावा आपको कसरत करने और जॉगिंग के लिए भी समय मिल सकेगा और जल्दी सोने और जल्दी उठने का असर आपके काम पर भी दिखाई पड़ता है। Psychiatry and Clinical Neurosciences में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक सुबह जल्दी उठनेवाले लोगों को डिप्रेशन का खतरा कम होता है।
2) ज़मीन पर बैठकर खाना- ज्यादातर लोग डायनिंग टेबल पर बैठकर भोजन करना पसंद करते हैं। लेकिन ऐसा करना हमारी सेहत के लिए उतना अच्छा नहीं जितना कि हमारे बड़ों की तरह जमीन पर बैठकर खाने का तरीका फायदेमंद है। वैसे आपको भी ऐसा ही करना चाहिए क्योंकि यह डायजेशन के साथ वेट लॉस में भी मदद करता है। साथ ही यह आपके बॉडी पॉस्चर को ठीक करता है और आपके घुटनों और कोहनियों को भी मजबूत बनाता है औऱ बल्ड सर्कुलेशन (रक्तसंचार) को भी बेहतर बनाता है।।
3) खाने के बीच में पानी ना पीएं- आमतौर पर हम सभी रोज ये ग़लती करते ही हैं। अपने खाने के साथ एक बड़ा गिलास पानी का रखते हैं, और भले ही हमारे मां-बाप खाने के बीच में पानी नहीं पीने को कहें, हम पानी पी ही लेते हैं। दरअसल खाना खाते समय पानी पीने से गैस्ट्रिक ज्यूसेस का निर्माण होता है जिसकी वजह से खाना देर से पचता है जिसके चलतले ऐसिडीटी भी हो जाती है। मशहूर डायटिशियन नेहा चंदाना के अनुसार, इस तरह भोजन के साथ पानी पीने से ब्लड शुगर लेवल भी बढ़ जाता है।
4) सूर्यास्त के समय भोजन करें- क्या आपके माता-पिता ने कभी आपको 8 बजे खाना खाकर जल्दी सोने के लिए कहा है। अगर आपका जवाब हां है तो आपको अपने बच्चों को भी यह आदत सिखानी चाहिए। आयुर्वेद में लिखा गया है कि, रात्रिचर्या के पहले हिस्से में ही आपको अपना भोजन खा लेना चाहिए। यह आपके शरीर और प्राकृतिक चक्र के बीच में तालमेल बनाने में सहायता करेगा। इस तरह आप मोटापे और पाचनतंत्र से जुड़ी समस्याओं से बच सकते हैं। साथ ही जल्दी खाना खाने से आपको अच्छी नींद आती है और अगले दिन आप तरोताज़ा महसूस करते हैं।
5) बालों को गरम पानी से ना धोएं- हमारे पूर्वज अपने बालों को केवल ठंडे पानी से साफ करते थे। गर्म पानी से बालों की सफाई करने से आपके सर की त्वचा का pH बढ़ जाता है और बाल झड़ने लगते हैं। हेयर एक्सपर्ट जावेद हबीब कहते हैं कि, गर्म पानी आपके बालों को रूखा-सूखा और कमज़ोर बनाता है, और बाल पतले भी हो जाते हैं।
6) खाने से पहले और बाद में हाथ धोएं- अपने बच्चों की सेहत का ध्यान रखना है तो सबसे पहले उन्हें खाने से पहले अपने हाथ जरूर धोने की आदत डाले , भले ही वह खाना चम्मच और कांटे से क्यों न खा रहे हों। इस तरह वह डायरिया, भोजन से जुड़े इंफेक्शन और हेपटाइटिस से अपना बचाव कर सकेंगे। यही नहीं बेहतर सुरक्षा और सफाई के लिए खाने के बाद भी हाथ धोना चाहिए।
7) खाना खाने के बाद मुंह साफ करें- क्या आप भोजन के बाद कुल्ला करते हैं? ..अगर नहीं तो आज से ही इस आदत को अपनाएं और अपने बच्चों को भी सिखाएं। इस तरह आपके मुंह के कोनों और कैविटीज में फंसे हुए भोजन के टुकड़े साफ हो जाएंगे। ये फंसा हुआ खाना बैक्टेरिया का कारण बनता है और सांस की बदबू और मसूड़ों में तकलीफ पैदा करता है।
8) घर पहुंचते ही अपने हाथ-पैर धुलें- दफ्तर से या किसी सफर से वापस आकर घर में दाखिल होने के बाद आप सबसे पहले अपने हाथ और पैर धोएं(अगर नहाना संभव न हो)। आपके हाथों-पैरों पर जमा धूल-मिट्टी न केवल पेट के इंफेक्शन औऱ सांस की बीमारियों का खतरा पैदा करती है बल्कि आपको ऐक्ने जैसी त्वचा संबंधी परेशानियां भी हो सकती हैं।
9) दीपक जलाएं और प्रार्थना करें- आपने पिछली बार प्रार्थना कब की थी? और आपके बच्चों ने? हर दिन प्रार्थना करने की आदत डालने से बच्चों को कई पीढ़ियों से सहेजी जा रहीं परम्पराओं और संस्कृति के बारे में जानने-समझने का मौका मिलेगा। यही नहीं गायत्री मंत्र और श्लोक पढ़ने से उनका मस्तिष्क शांत होगा, सीखने की शक्ति और एकाग्रता में सुधार होगा, दिल को मज़बूत बनेगा और डिप्रेशन से भी बचाव होगा। आप प्रार्थना करते हुए अपनी आंखों को मूंदकर ध्यान करते हैं, जो पॉजिटीव थिकिंग और आध्यात्म का संचार करता है।
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अनुवादक -Sadhna Tiwari
चित्र स्रोत-Dharma Productions/Youtube.