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Written By: Editorial Team | Updated : January 4, 2017 6:01 PM IST
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अनुवादक – Usman Khan
सुष्मिता सेन हमेशा से युवा महिलाओं के लिए एक रोल मॉडल रही हैं। साल 1994 में मिस यूनिवर्स का खिताब जीतने वाली सुष्मिता ने युवा लड़कियों को कैरियर चुनने का लक्ष्य दिया। उनके जीवन का एक बड़ा फैसला 25 साल की उम्र में अपनी पहली बेटी रेने को गोद लेना था। उनके इस फैसले से समाज में महिलाओं की प्रति लोगों की सोच बदलने में बड़ी मदद मिली। इतना ही नहीं इससे उनकी छवि में बड़ा परिवर्तन हुआ। अब लोग उन्हें केवल एक अभिनेत्री या मॉडल के रूप में नहीं बल्कि एक स्ट्रॉंग वुमन के रूप में जानने लगे हैं। दस साल बाद सुष्मिता ने अपनी दूसरी बेटी अलीशा को गोद लिया।
सुष्मिता सेन ने 2013 में अपनी बड़ी बेटी रेने को एक ख़त लिखा था, जिसे बीते दिनों इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया गया है। इस खत में प्रेरणा और ऐसी सलाह की भरमार है, जो हर बेटी के लिए अहम है। सुष्मिता ने यह चिट्ठी तब लिखी थी, जब वह बोर्डिंग स्कूल में पढ़ाई के लिए जा रही थी। सुष्मिता का ये खत दिखाता है कि रेने को उनकी मां और उनकी छोटी बहन 7 साल की अलीसा बहुत प्यार करती हैं।
यह चिट्ठी एक मां ने अपनी बेटी को लिखी है जिसमें जिंदगी जीने का फलसफा बड़ी ही खूबसूरती और आसान शब्दों में समझाया गया है। चिट्ठी में लिखा है कि 'अपनी किस्मत खुद लिखो, अपने सपने याद रखो, दोस्ती को निभाओ और कभी हिम्मत मत हारो। खुश रहो।' सुष्मिता ने लिखा है कि 'अपने हुनर पर और भगवान पर भरोसा रखो। माफी मांगने से या झुकने से मत हिचकिचाओ, ऐसा करने वाला कभी टूटता नहीं है। मैं ईश्वर की आभारी हूं कि उन्होंने मुझे तुम्हारी मां चुना। मुझे तुम पर गर्व है, अब वक्त है कि दुनिया जान जाए तुम कितनी कमाल की इंसान हो।'
सुष्मिता का बच्चों को गोद लेने के फैसले से समाज के युवा वर्ग में एक बड़ा परिवर्तन आया। उनके इस फैसले से कई युवा बच्चों को गोद लेने के लिए प्रेरित हुए। डाउन सिंड्रोम से पीड़ित एक बच्चे को गोद लेने वाले भारत के सबसे कम उम्र के व्यक्ति आदित्य तिवारी भी कहते हैं कि उन्हें 27 साल की उम्र में एक बच्चे को गोद लेने की प्रेरणा सुष्मिता सेन से मिली।
सुष्मिता ने एक चेरिटेबल संगठन भी शुरू किया, जिसका नाम आई एम फाउंडेशन है। ये संगठन पांच अन्य संगठनों के साथ मिलकर 'गिविंग' सिद्धांत पर काम करता है।
सुष्मिता से पहले हाल ही में कई हस्तियों द्वारा अपनी बेटी को लिखे खत प्रकाशित हुए हैं। चंदा कोचर ने हाल ही में अपनी बेटी को साहस भरा खत लिखा था। इससे पहले नारायण मूर्ति ने भी अपनी बेटी को एक पत्र लिखा था।
चित्र स्रोत - Shutterstock