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बच्चों के कान-नाक छेिदवाने से बढ़ती है ब्रेन पॉवर, जानें पियर्सिंग के कुछ फायदे और इंफेक्शन से बचने के लिए टिप्स

कान और नाक छिदवाने की परंपरा के कई फायदे हैं, इसलिए भी ज़्यादातर बच्चों के कान और नाक में 2-3 वर्ष के होने पर छेद करा दिया जाता है। आइए जानते हैं क्या है पियर्सिंग (Health Benefits of Piercing) के फायदे और कान छिदवाने के बाद किस तरह रखना चाहिए बच्चे का ख्याल ।

बच्चों के कान-नाक छेिदवाने से बढ़ती है ब्रेन पॉवर, जानें पियर्सिंग के कुछ फायदे और इंफेक्शन से बचने के लिए टिप्स

Written by Sadhna Tiwari |Updated : October 4, 2020 8:23 PM IST

छोटे बच्चों के कान और नाक में छेद करवाने से पहले मां-बाप काफी परेशान रहते हैं। अक्सर, उनके मन में सवाल आते हैं कि कही बच्चे को ज़्यादा दर्द ना हो, या बच्चे पता नहीं पियर्सिंग कराते समय चोट ना लगा ले। इसी तरह कान छिदवाने के बाद अक्सर स्किन इंफेक्शन होने का डर भी हो जाता है। हमारे देश में काफी छोटी उम्र में ही लड़कियों (और कुछ स्थानों पर लड़कों के भी ) के कान और नाक छिदवाए जाते हैं। इस परंपरा के कई फायदे भी हैं और बच्चे को यह फायदे हों इसलिए भी ज़्यादातर बच्चों के कान और नाक में 2-3 वर्ष के होने पर छेद करा दिया जाता है। आइए जानते हैं क्या है पियर्सिंग (Health Benefits of Piercing) के फायदे-

कान-नाक छिदवाने के हेल्दी फायदे

  • सुनने की शक्ति बढ़ती है
  • आंखों की रोशनी बढ़ती है
  • तनाव होता है कम
  • लकवा का खतरा होता है कम
  • उम्र होती है लम्बी
  • दिमाग में ब्लड सर्कुलेशन तेज़ होता है, जिससे दिमाग भी तेज काम करता है
  • लड़कोंकी सेक्सुअल हेल्थ और फर्टिलिटी होती है बेहतर

पियर्सिंग के बाद इंफेक्शन से बचने के लिए रखें इन बातों का ध्यान (Piercing Aftercare )

हालांकि, कई बार पियर्सिंग करवाते समय या कान-नाक छिदवाने के बाद इंफेक्शन हो जाता है। इसीलिए, ध्यान रखना आवश्यक है कि पियर्सिंग के बाद स्किन में इंफेक्शन ना हो। इसके लिए कान छिदवाते समय हमेशा किसी सर्टिफाइट प्रोफेशनल से ही पियर्सिंग कराएं। कान छिदवाने के बाद चांदी या सोने की तार ही कान में पहनाएं। इसके साथ ही कान में हल्दी और नारियल के तेल का पेस्ट मिलाकर लगाएं। इससे, कान में इंफेक्शन नहीं होगा। ऐसा तब तक करनी है जब तक कि पियर्सिंग का घाव पूरी तरह ठीक ना हो जाए।

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  • कान छिदवाने के बाद पियर्सिंग वाली जगह पर एक छोटा-सा घाव हो जाता है जो छूने, रगड़ खाने और किसी कठोर चीज़ के सम्पर्क में आने से अक्सर छिल जाता है। इसीलिए, इसे छूने से बचें।
  • कभी भी पियर्सिंग वाली जगह को छूने से पहले साबुन और पानी से अपने हाथ धोएं ।
  • साफ-सफाई के लिए कॉटन का कपड़ा या रूई का प्रयोग करें।
  • नहाते समय घाव वाली जगह को कुछ दिनों तक पानी से साफ करने से बचें।