बच्‍चाेें को देंगे प्‍यार तो बढ़ेगा उनका आत्‍मविश्‍वास

पेरेंटस की थोड़ी सी केयर और टाइम ला सकता है बच्‍चों में बड़े बदलाव।

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Written By: Yogita Yadav | Updated : June 27, 2018 6:43 PM IST

अगर आपका बच्‍चा आपके कहने से रिश्‍तेदारों के सामने कोई कविता नहीं सुनाता है या पर्दे के पीछे छुप जाता है, तो इसका यह मतलब नहीं कि उसमें आत्‍मविश्‍वास की कमी है। हर व्‍यक्ति की प्रकृति अलग होती है। कुछ आउटस्‍पोकन होते हैं तो कुछ बच्‍चे शर्मीले स्‍वभाव के होते हैं। उनकी प्रकृति को समझे बिना उन पर अपनी अपेक्षाओं का बोझ न डालें। विशेषज्ञ मानते हैं कि जब बच्‍चा कोई एक्टिविटी शुरू करता है, तो उसे किस तरह पूरा करता है यह उसके आत्‍मविश्‍वास का संकेत है। बहुत बोलने वाले बच्‍चे जरूरी नहीं कि आत्‍मविश्‍वास से भी परिपूर्ण हों।

अपने बच्चे से प्यार करो: बच्‍चे नाजुक मन के होते हैं। कौन उन्‍हें प्‍यार कर रहा है और कौन नहीं, इस बात का उनके मन पर बहुत असर पड़ता है। परिवार पहली इकाई है। स्‍कूल, दोस्‍त, समाज सब उसके बाद आते हैं। पहले ही स्‍तर पर उसे प्‍यार की अहमियत सिखानी होगी। तभी वह आत्‍मविश्‍वास पूर्ण तरीके से बाहर की दुनिया से जुड़ पाएगा।

प्रशंसा करें : अपने बच्‍चे की प्रशंसा करें। कोई भी छोटी सी एक्टिविटी यदि उसने बहुत अच्‍छे से पूरी की हो तो उसकी प्रशंसा करें। इससे वह अगली एक्टिविटी के लिए तैयार होगा। परफॉर्मेंस परफेक्‍ट न होने पर उसके झिड़के नहीं, बल्कि यह समझाएं कि कुछ चीजें अभ्‍यास से ही बेहतर हो सकती हैं।

तय करें रियलिस्टिक गोल : सभी बच्‍चे कल्‍पनाशील होते हैं। वे अपनी ही सोच के मुताबिक दुनिया गढ़ते हैं। सुपरमैन और हीमैन बनने की बजाए बच्‍चों को रियलिस्टिक गोल सेट करना सिखाएं। इससे वे व्‍यवहारिक बनेंगे और आत्‍मविश्‍वास भी बढ़ेगा।

अपने रुख में लाएं लचीलापन : जो कह दिया, वही होगा, आपकी यह आदत आपके बच्‍चों को दहशत से भर सकती है। इससे वे चिंता और तनाव में भी घिर सकते हैं। इससे बेहतर है कि अपने स्‍वभाव में लचीलापन लाएं। बच्‍चे को मिस्‍टर या मिस परफेक्‍शनिस्‍ट बनाने की बजाए बच्‍चे की तरह समझना शुरू करें। आपका यह रुख आपके बच्‍चे के आत्‍मविश्‍वास में सकारात्‍मक बढ़ोतरी लाएगा ।

शामिल करें अन्‍य गति‍विधियों में : सिर्फ किताबों में ही बच्‍चों को मास्‍टर न बनाएं, उन्‍हें इनके बाहर की दुनिया भी देखने दें। खेल, संगीत, डांस, स्‍वीमिंग आदि एक्टिविटी में बच्‍चों को शामिल करें। इससे उनका शर्मीलापन दूर होगा और उनके भीतर छिपी प्रतिभा को भी स्‍पेस मिलेगा। किसी भी‍ विधा में भागीदारी और प्रदर्शन बच्‍चों के आत्‍मविश्‍वास में बढ़ोतरी करता है।

दे क्‍वालिटी टाइम : बच्‍चों के समग्र विकास के लिए जरूरी है कि उन्‍हें क्‍वालिटी टाइम दें। बच्‍चें के साथ बैठकर दो घंटे टीवी देखने से बेहतर है कि आप उसके साथ आधा घंटा शतरंज खेलें या उसके दोस्‍तों के बारे में बातें करें। अपनी बात कह सकने की क्षमता और उस पर आपका सकारात्‍मक रवैया बच्‍चे को आत्‍मविश्‍वास से पूर्ण करता है।

चित्रस्रोत: Shutterstock.

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