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आज बदलते समय में बहुत से बच्चे ऐसे हैं जिनका मन पढ़ाई में बिल्कुल नहीं लगता। वह किसी और काम में खुद लगाना चाहते हैं जैसे कि वह किसी खेल को बहुत अच्छे से खेलना चाहते हैं। हालांकि कोई भी खेलना भविष्य के हिसाब से भी बुरा नहीं है, लेकिन जब बात आती है शुरुआती पढ़ाई कि तो वह किसी भी बच्चे के लिए बेहद जरूरी हो जाती है। आज कुछ बच्चे पढ़ाई का नाम सुनते ही तरह-तरह के बहाने बनाने लग जाते हैं। जैसे नींद आना और बाथरूम जाना आदि। हालांकि इस तरह के काम से बच्चों को जबरदस्ती रोकना ठीक भी नहीं है। लेकिन यदि आपको लगता है कि अब आपका बच्चा बहानों की आड़ में अपने भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है तो आपको उसके लिए जरूर विचार करना चाहिए। यदि आप बच्चे की इस तरह की आदत से परेशान हो चुके हैं तो आज हम आपको कुछ शानदार पेरेंटिंग टिप्स देने जा रहे हैं। जो आपके और बच्चों के बीच की इस समस्या को बहुत जल्द ठीक कर सकते हैं।
आपने अक्सर माता-पिता को ऐसा करते हुए देखा होगा कि जब उनका बच्चा किसी काम को कर नहीं पाता है, तो वह उसकी तुलना अन्य दूसरे बच्चों से करने लग जाते हैं। इस तरह अपनी तुलना किसी और के साथ होने पर बच्चों के कोमल मन पर बहुत गहरा असर पड़ता है। जिसका असर यह भी देखने को मिलता है कि बच्चा अपनी पढ़ाई से जी चुराने लग जाता है। इसलिए आप इस बात का ख्याल जरूर रखें कि आपको कभी भी बच्चों के सामने किसी और की तुलना उनसे नहीं करनी चाहिए। इसकी जगह आप किसी और का उदाहरण देकर उन्हें मोटिवेट कर सकते हैं।
यदि आपके बच्चे का मन पढ़ाई में नहीं लग पा रहा है तो इस बात को लेकर आप उसके ऊपर दबाव बनाने की कोशिश न करें। क्योंकि यदि आप बच्चे के ऊपर अनावश्यक दबाव बनाया तो कुछ देर के लिए बच्चा दबाव में आकर आपकी बात मान सकता है लेकिन उसका मन पढ़ाई में नहीं लगेगा। इसके अलावा बच्चे को पढ़ाई की बात का डर और सताने लग जाता है। इसका बहुत बुरा असर बच्चे के दिमाग पर पड़ेगा और आपका बच्चा पढ़ाई से बहुत दूर होता जाएगा।
यदि आपका बच्चा किसी काम को गलत कर देता है या वह कोई काम करना सीख रहा है, तो माता-पिता की यह जिम्मेदारी है कि उसका हर काम में हौसला बढ़ाएं। यदि आप बात-बात पर बच्चे की कमियां निकालना शुरू कर देंगे तो इसका गहरा असर बच्चे के दिमाग पर पड़ता है जो उसके पढ़ाई से दूर रहने का मुख्य कारण बन जाता है। हर बात पर अपनी कमियां सुनते रहने वाले बच्चे के दिमाग में ये बात घर कर जाती है कि वह कोई भी काम अच्छा नहीं कर सकता है। इसलिए बच्चे की कमियां निकालना बंद करें इसके अलावा उनकी समय-समय पर तारीफ जरूर करते रहें। ऐसा करने से उनका उत्साह बढ़ता है जो उनके मन को पढ़ाई की ओर अग्रसर करता है।