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Written By: Yogita Yadav | Published : July 25, 2018 11:20 AM IST
न्यू बॉर्न बेबी की सॉफ्ट स्किन और लिटिल स्टमक के लिए जरूरी है कि इस मौसम में उनका बहुत ख्याल रखा जाए। यह मौसम जहां गर्मियों के बढ़े हुए तापमान से छुटकारा दिलवाता है वहीं कई तरह की मानसूनी बीमारियां भी लेकर आता है। पहले मानसून में बेबी को इसकी आदत नहीं होती, इसलिए यह आपकी जिम्मेदारी है कि उसकी हर छोटी-छोटी चीज का बहुत ख्याल रखें।
कब नहलाएं
मानसून में तापमान लगातार बदलता रहता है। कभी बहुत ज्यादा ह्यूमिडिटी, तो कभी बारिश के बाद एकदम कूल। ऐसे में यह सवाल उठता है कि बेबी को कब नहलाया जाए। अमूमन यह कूल मौसम है इसलिए बहुत ज्यादा बेबी को नहलाने की जरूरत नहीं है। सप्ताह में दो से तीन बार बेबी को नहलाना भी काफी है। नहलाने से पहले इस बात का ध्यान रखें कि जब बहुत ज्यादा ठंड का अहसास हो रहा हो तो बेबी को न नहलाएं। बेबी को तभी नहलाएं जब दिन में सबसे ज्यादा तापमान हो या दोपहर के समय भी बेबी को नहलाया जा सकता है।
तेल मालिश
मानसून में बॉडी टेंपरेचर बदलता रहता है। इसलिए नई मां इस बात को लेकर चिंतित रहती है कि इस मौसम में बेबी की मालिश की जाए या नहीं। वैसे मालिश करने में किसी भी मौसम में कोई चिंता नहीं है। मालिश बेबी को हेल्दी रखने के लिए जरूरी है इसलिए इसे किसी भी मौसम में किया जा सकता है। पर मालिश से पहले कोशिश करें कि ऑयल हल्क गुनगुना कर लें, पर उतना ही जितना बेबी की स्किन के लिए आरामदायक हो।
पहनाएं ऐसे कपड़े
इस मौसम में कोशिश करें कि बेबी को न तो बहुत गर्म कपड़े पहनाएं और न ही बहुत ठंडे। इस मौसम में इन्सेक्ट बाइट का बहुत डर रहता है इसलिए ध्यान रखें कि बेबी के हार और पैर पूरी तरह ढके रहें। इसके लिए मल्टी लेयर्ड क्लोथ्स एक अच्छा ऑप्शन है। अंदर हल्की गर्म स्लीव लैस स्वेट शर्ट पहनाएं और फिर कॉटन की फुल स्लीव्स की पजामी और जैकेट बेबी को पहना सकती हैं। जब लगे कि बेबी को गर्मी लग रही है तो यह उतारी भी जा सकती है।
बेबी फूड
मानसून में फैलने वाली बीमारियों में सबसे ज्यादा पानी के कारण फैलती हैं। इसलिए पानी का बहुत ज्यादा ध्यान रखें। आरओ वाटर भी बेबी के लिए उतना हेल्दी नहीं है, जितना बॉयल वॉटर। बेहतर है कि पानी को तीन मिनट तक उबालें और फिर ठंडा करके बेबी को दें। अगर अभी बेबी ब्रेस्ट फीडिंग पर ही है तो उसे अलग से पानी देने की जरूरत नहीं है। जब ज्यादा पसीना आए तब भी बेबी को ब्रेस्ट फीडिंग करवाती रहें। इससे उसकी पानी की जरूरत भी पूरी होती रहेगी।
हाईजीन का रखें ख्याल
अगर बेबी बॉटल फीड ले रहा है तो इस दौरान बॉटल की सफाई का बहुत ज्यादा ध्यान रखें। बॉटल को हर फीड के बाद बॉयल करें। जिससे उसके कीटाणु मर जाएं। बॉटल की सफाई के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ब्रश आदि को भी अच्छे से स्टेरेलाइज करें ताकि वे कीटाणुमुक्त हो सकें। मानसून में बच्चों को अकसर नैपी रेशेस हो जाते हैं। इसलिए जब भी डायपर बदलें बेबी पाउडर जरूर लगाएं।
चित्रस्रोत: Shutterstock.