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Written By: Editorial Team | Published : October 3, 2017 4:16 PM IST
हम अक्सर सुनते हैं कि हमारे देश में कई शिशु निमोनिया और दस्त की वजह से बच नहीं पाते। दुखद बात यह है कि इन बीमारियों को टीकाकरण की मदद से रोका जा सकता है और कई बच्चों की जान बचायी जा सकती है। साल मई 2017 में, सरकार ने बच्चों के लिए महत्वपूर्ण टीकाकरण अनुसूची में संशोधन किया और भारत के टीकाकरण कार्यक्रम में नए वैक्सिंग शामिल कर रोगों से बचाव को प्राथमिकता दी।
नए कार्यक्रम में हम जो एक महत्वपूर्ण बदलाव देख रहे हैं वह यह है कि सरकार ने अनिवार्य टीकाकरण की लिस्ट में न्यूमोकोकल कान्जुगेट वैक्सीन या पीसीवी (Pneumococcal Conjugate Vaccine) शामिल करने का निर्णय लिया है। हमने बात की डॉ. राजेश कुमार (डीन (अकादमिक), पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़) से जिन्होंने हमें बताता है कि पीसीवी टीकाकरण को अनिवार्य करना क्यों आवश्यक है।
1. भारत में निमोनिया से संबंधित मौतों की संख्या कम हो जाएगी
यह स्पष्ट है विश्व स्तर पर और यहां भारत में भी निमोनिया (pneumonia), 5 साल से कम उम्र के बच्चों में मौत का प्रमुख संक्रामक कारण है। 2015 में, 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु के हर 6 में से 5 मौतें न्यूमोनिया के कारण हुई थीं। 2010 में, भारत में 5-वर्ष से कम उम्र के बच्चों की 100,000 से अधिक मौतों की वजह निमोनिया थी। हाल ही में पेश आए पीसीवी वैक्सिंन, न्यूमोकोकस (pneumococcus) से सुरक्षा प्रदान करता है, जो निमोनिया से पीड़ित बच्चों की मौतों का प्रमुख कारण है। इस वैक्सिंग से कई परिहार्य मृत्यु और बीमारियों को रोकने में मदद मिलती है। हालांकि यह वैक्सीन भारतीय बाजारों में उपलब्ध था, लेकिन यह कई बच्चों तक पहुंच नहीं पा रहा था, क्योंकि महंगा होने के कारण बच्चों के माता-पिता के लिए खरीदना बहुत मुश्किल था। पीसीवी के आने के साथ सरकार ने हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार के लाखों बच्चों को मुफ्त में मुहैया करा रही है। आने वाले समय में, कई और राज्यों में इसका विस्तार किया जाएगा।
2. यह दूसरी बीमारियों से भी बचाता है
निमोनिया के अतिरिक्त, यह वैक्सीन मेनिन्जाइटिस (meningitis), सेप्सिस(sepsis), ब्रोंकाइटिस(bronchitis), और मध्य कान में संक्रमण से भी सुरक्षा प्रदान करता है। ये सभी स्थितियां न्यूमोकोकस बैक्टेरियम की वजह से बनती हैं। तथ्य यह भी बताते हैं कि पीसीवी के बाद एंटीबायोटिक-रेज़िस्टेंस के कारण होनेवाले इनवेसिव रोगों को भी कम किया जा सका है। [1]
3. यह इलाज के खर्चों को कम करेगा
पिछले कुछ वर्षो में, भारत की यूआईपी(UIP), दुनिया में अपनी तरह का सबसे बड़ा कार्यक्रम बन गया है, जो छोटे बच्चों की मौत और बीमारियों में व्यापक रुप से कमी लाने का काम कर रहा है, और इससे लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में काफी योगदान कर रहा हैं। इसका उद्देश्य देश की हर जगह और कोने तक पहुंचना है ताकि हर बच्चे को सुरक्षित किया जा सके। राष्ट्रीय कार्यक्रम के माध्यम से हर साल 2 करोड़ से अधिक नवजात शिशुओं और 3 करोड़ गर्भवती महिलाओं को मदद करने की कोशिश की जा रही है। 2018 तक देश में टीकाकरण कवरेज को 90% तक बढ़ाने के लिए, सभी बच्चों को बीमारियों की रोकथाम के लिए से टीके लगाने के लिए, भारत ने मिशन इंद्रधनुष अभियान की भी शुरूआत की गयी है। मिशन इंद्रधनुष के पहले 3 चरणों में, पूर्ण प्रतिरक्षण कवरेज में 5-7% वृद्धि हुई है। सरकार द्वारा ये महत्वपूर्ण कदम शिशुओं के जीवन को बचाने और भारतीय बच्चों को स्वस्थ भविष्य देने में मदद करेंगे।
भारत को सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में चेचक या स्मालपॉक्स (smallpox) उन्मूलन से लेकर पोलियो उन्मूलन जैसी कई उल्लेखनीय सफलताएं मिली हैं। अगले कदम के रुप में हम इन प्रयासों के दौरान सरकार की पहल और प्रतिबद्धताओं से बहुत-कुछ सीख सकते हैं और इस दौरान तैयार किए बुनियादी ढांचे का लाभ उठा सकते हैं। यह सही समय है कि हम हमारे बच्चों को 2030 सस्टेंनेबल डिवेलपमेंट के लक्ष्यों और स्वस्थ भविष्य की खोज में हमारे प्रयासों को आगे बढ़ाया जाए।
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अनुवादक-Sadhana Tiwari
चित्रस्रोत-Shutterstock Images.
संदर्भ-[1]Kyaw MH, Lynfield R, Schaffner W, et al. Effect of introduction of the pneumococcal conjugate vaccine on drug-resistant Streptococcus pneumoniae. N Engl J Med 2006; 354(14): 1455-63.
[2] https://mohfw.nic.in/showfile.php?lid=4248
[3] Integrated Child Health & Immunization Survey (INCHIS). https://pib.nic.in/newsite/PrintRelease.aspx?relid=160063