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Written By: Anshumala | Updated : June 13, 2021 10:47 PM IST
बच्चों की सुनने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं हेडफोन, ईयरबड।
Hearing Loss in Children in Hindi: कोरोना महामारी के दौरान युवाओं, किशोरों के साथ ही बच्चों में भी हेडफोन, ईयरफोन कान में लगाकर गाना सुनना, दोस्तों से बातें करने की आदत काफी अधिक बढ़ गई है। हाल ही में बच्चों और किशोरों में ईयरफोन, हेडफोन और ईयरबड के अधिक इस्तेमाल पर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है। उनका कहना है कि हद से ज्यादा हेडफोन, ईयरबड्स के बढ़ते उपयोग से बच्चों में सुनने से संबंधित परेशानी होने की संभावना बढ़ सकती है, क्योंकि उनकी श्रवण प्रणाली (auditory system) की परिपक्वता अधूरी होती है। बच्चे, किशोर और युवा वयस्क दुनिया भर में अनुशंसित सार्वजनिक स्वास्थ्य सीमा (Recommended Public Health Limit) से अधिक मात्रा में प्रतिदिन कई घंटे संगीत सुन रहे हैं, जो कि उनके कान की सेहत के लिए सही नहीं है।
अमेरिका स्थित गैर-लाभकारी संस्था द क्विट कोएलिशन के डेनियल फिन्क का कहना है कि रोजमर्रा की जिंदगी में नॉन ऑक्युफेशनल नॉएज एक्सपोजर जैसे व्यक्तिगत श्रवण प्रणाली (Hearing system) विशेष रूप से युवाओं के लिए ट्रांजिट नॉएज, घरेलू उपकरण, बिजली के उपकरण और मनोरंजन (खेल आयोजन, फिल्में, पार्टियां आदि) से आता है।
जो लोग पांच वर्षों की समयावधि में 50 % अधिक मात्रा में एक घंटे से अधिक व्यक्तिगत ऑडियो सिस्टम का उपयोग करते हैं, उनकी सुनने की क्षमता के खराब होने का जोखिम सबसे ज्यादा होता है। हाल ही में वॉल स्ट्रीट जर्नल के एक लेख पर विवाद करते हुए दावा किया गया कि 85 डेसिबल बच्चों और किशोरों के लिए सुरक्षित (Hearing Loss in Children in Hindi) है, लेकिन फिन्क का कहना है कि 85 डेसिबल किसी के लिए भी सुरक्षित नहीं है।
उनका कहना है कि लोगों को लगता है कि नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर ऑक्युपेशनल सेफ्टी एंड हेल्थ ने सिफारिश की कि 85 डीबीए शोर जोखिम स्तर से सुरक्षित है, लेकिन यह छोटे बच्चे के लिए बहुत ज्यादा है। बच्चे सबसे अधिक जोखिम में हैं, क्योंकि उनकी श्रवण प्रणाली की परिपक्वता अधूरी है और सामान्य श्रवण स्वास्थ्य सीखने, समाजीकरण के लिए महत्वपूर्ण है।"
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