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Children Development Tips: बच्चों को सेहत का पता नहीं होता है और इसलिए पेरेंट्स के लिए बेहद जरूरी है कि उन्हें अपनी सेहत का ध्यान रखें। बच्चे के लिए सही डाइट का होना उसके स्वास्थ्य के लिए सबसे जरूरी कामों में से एक है और यह काम पेरेंट्स के लिए कई बार मुश्किल बन जाता है। इसके पीछे वैसे तो कई कारण हैं, लेकिन प्रमुख कारण है बच्चे का समय पर और पेट भरकर खाना न खाना। दूसरा प्रमुख कारण यह है कि बच्चे बाहर की चीजें खा लेते हैं, जिसमें फैट व मसाले आदि होने के कारण उन्हें लंबे समय तक भूख नहीं लगती है और उसके कारण वे लंबे समय तक भूखे रहते हैं। डॉ. पूर्वी तिवारी पांडे ने बताया कि बच्चे का लंबे समय तक खाली पेट रहना बिल्कुल भी अच्छा नहीं है, क्योंकि इसका असर उनके स्वास्थ्य और शारीरिक विकास पर गंभीर रूप से पड़ सकता है। लेकिन देखा गया है कि कई बार पेरेंट्स ध्यान नहीं दे पाते हैं और बच्चे लंबे समय तक खाली पेट घूम रहे होते हैं, जो बच्चे की सेहत के लिए काफी नुकसानदायक हो सकता है और इसके बारे में हम आपको इस लेख में बताने वाले हैं।
डॉ. पूर्वी ने बताया कि बच्चा किस उम्र का है उस पर भी निर्भर करता है कि बच्चे को खाली पेट रहना चाहिए या नहीं और खाली पेट रहने से बच्चे के स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ सकता है। चलिए जानते हैं डॉ. पूर्वी के अनुसार किस उम्र के बच्चे के स्वास्थ्य पर खाली पेट रहने से क्या असर पड़ता है और किस उम्र के बच्चों को खाली पेट नहीं रहना चाहिए।
6 से कम उम्र के बच्चों को गलती से भी खाली पेट नहीं रहना चाहिए, क्योंकि इससे उनकी फिजिकल ग्रोथ पर गंभीर असर पड़ता है। अगर बच्चे की उम्र 6 साल से कम है और वह लंबे समय से खाली पेट रह रहा है या फिर अगर 6 साल से कम किसी बच्चे ने फास्ट यानी व्रत रखा हुआ है, तो इससे बच्चे का दिमागी विकास भी धीमा पड़ जाता है, जिससे कई बार गंभीर कमी होने का खतरा बढ़ सकता है।
6 साल से ज्यादा उम्र के बच्चों को भी लंबे समय तक खाली पेट रहने की सलाह नहीं दी जाती है। क्योंकि लंबे समय तक खाली पेट रहने से बच्चे के शरीर में ब्लड शुगर लेवल कम होने लग सकता है और इससे शरीर में कई गंभीर बीमारियां होने का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, अगर बच्चे की उम्र 15 साल या उससे ऊपर है और बच्चे का फास्ट रखने का मन है, तो ऐसे में उसे एक बार डॉक्टर या डाईटीशियन से संपर्क कर लेना चाहिए।
छोटे बच्चों के लिए सही डाइट होना सबसे ज्यादा जरूरी माना जाता है और इसलिए उनके खाने में खूब मात्रा पौष्टिक चीजों को शामिल करें। ऐसे फूड्स को शामिल न करें जिनमें फैट, रिफाइंड शुगर या ऑयल आदि शामिल हो। बच्चे के खाने में साबुत अनाज, हरी व मौसमी सब्जियां और फलों आदि को शामिल करें।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।