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वयस्कों के साथ-साथ बच्चों को भी नियमित रूप से शारीरिक रूप से सक्रिय रहना चाहिए ताकि वह भी एक स्वस्थ शरीर और जीवन शैली का नेतृत्व कर सके। इसके लिए माता-पिता को सुनिश्चित करना चाहिए की शुरुआत में ही बच्चों में एक अच्छी आदत का विकास हो यह उन्हें आजीवन स्वस्थ रखने में मदद करता है। इससे न सिर्फ बच्चों का शारीरिक विकास होता है बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ता है, इससे बच्चों में एकाग्रता आती है, नई चीजें सीखने की ललक पैदा होती है, उनका फोकस बढ़ता है, और वह जीवन में हर मुकाम पर सफलता प्राप्त कर पाते हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो बच्चों को किसी तरह का जिम या कठोर व्यायाम की आवश्यकता नहीं होती है। बच्चों को सबसे ज्यादा खेलकूद में हिस्सा लेना चाहिए इसके अलावा स्विमिंग, डांस और जूडो-कराटे जैसी स्पर्धाओं में हिस्सा ले सकते हैं। हर माता-पिता को अपने बच्चों को कम से कम 1 घंटे का समय खेलकूद के लिए देना चाहिए। इसके अलावा बच्चों को गैजेट से दूर रखना चाहिए ताकि वह घर के अंदर बैठे ना रहे।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई बच्चा किसी एक्टिविटी में शामिल होता है तो उसके अंदर धैर्य की भावना विकसित होती है। इसके लिए जरूरी है कि हम अपने बच्चों को ऐसी एक्टिविटी में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित करें जिसमें धैर्य के साथ काम लेने की जरूरत पड़ती हो या उनके जीवन को भी बेहतर बनाने में मदद करेंगे।
किसी भी एक्टिविटी में शामिल होने से शरीर की फ्लैक्सेबिलिटी बंद नहीं रहती है। खेलकूद के दौरान शरीर की मांसपेशियां स्ट्रेच होती हैं। आप अपने बच्चों मैं फ्लैक्सिबिलिटी लाने के लिए कुछ ऐसी एक्टिविटी जैसे जिमनास्टिक, स्ट्रेचिंग और योग जैसे रेगुलर सेशन में हिस्सा दिलाकर लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
जब बच्चे किसी एक्टिविटी में हिस्सा लेते हैं तो उनकी मांसपेशियां तो मजबूत होती ही हैं साथ ही उनका स्ट्रेंथ भी बढ़ता है। इस प्रकार की गतिविधियां मजबूत हड्डियों और मांसपेशियों को विकसित करने में भी मदद करती हैं जो बदले में धीरे-धीरे बच्चों की ताकत को बढ़ाती हैं और वह उम्र के अनुसार भारी से भारी सामान को उठाने में भी सक्षम होते हैं।
जब बच्चे किसी एक्टिविटी में हिस्सा ले रहे हो तो इस बात का ध्यान रखने की जरूरत है कि वह सही तरीके से खुद को हाइड्रेट रख रहे हैं कि नहीं। बच्चों को हमेशा पानी की बोतल जरूर दें। साथ ही अगर व धूप में खेलते हैं तो उन्हें सनी स्क्रीन का उपयोग करने की सलाह दे सकती हैं। किसी भी एक्टिविटी के दौरान उससे जुड़े सुरक्षा उपकरणों का भी प्रयोग करना जरूरी होता है ताकि किसी भी प्रकार की चोट से बचाया जा सके। सबसे जरूरी बात यह है कि आप अपने बच्चों को किसी भी कार्य के लिए बाध्य ना करें, उनके विचारों को समझें, उनकी भावनाओं को समझें, उसके बाद ही कुछ डिसीजन ले। अगर आपको लगता है कि आपका बच्चा सही से व्यवहार नहीं कर रहा है तो आप किसी एक्सपर्ट की सलाह ले सकते हैं।