
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : March 2, 2026 7:53 PM IST
Is it okay to scold a toddler: बच्चे शरारती भी होते हैं और अनजाने में भी गलतियां करते हैं, ऐसे में पेरेंट्स को कभी-कभी गुस्सा आ सकता है। लेकिन बच्चे पर गुस्सा करने का एक सही समय और लिमिट होती है। लेकिन देखा जाता है कि कुछ बच्चों को उनके पेरेंट्स बात-बात पर डांटने लग जाते हैं। उन्हें लगता है डांटने से बच्चा समझ जाएगा, लेकिन यह नहीं सोच पाते हैं कि बार-बार डांटने बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है। बात-बात पर बच्चे को डांटने से न सिर्फ उसे बुरा लगता है, बल्कि यह उसके मन और विकसित हो रहे दिमाग पर गहरा व नकारात्मक असर पड़ता है। कई पेरेंट्स इस डांट को अनुशासन का नाम देकर, इसे सही परवरिश का हिस्सा मनवाने का प्रयास करते हैं, मगर विशेषज्ञ बताते हैं कि लगातार डांट-फटकार बच्चों के आत्मविश्वास, व्यवहार और भावनात्मक विकास को प्रभावित करती है। तो आइए आज समझते हैं कि बार-बार डांटना किस तरह बच्चों को प्रभावित करता है।
आपको समझना होगा कि बार-बार डांटना उनके आत्मविश्वास को प्रभावित कर रहा है। असल में जब बच्चे को हर छोटी-बड़ी बात पर डांट सुनने को मिलती है, तो वह खुद को अयोग्य समझने लगता है। उसे लगता है कि वह कुछ भी सही से कर ही नहीं कर सकता। यह सोच उसके आत्मविश्वास को कमजोर करती है और फिर आगे चलकर वह नए काम करने से भी डरने लगता है।
लगातार डांट सुनने से बच्चे के मन में डर बनने लगता है और उसे हर समय यही रहता है कि कहीं उससे कोई गलती न हो जाए। दिमाग में लगातार यही विचार चलने से उसके दिमाग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने लगता है। वहीं जब बच्चा लंबे समय तक ऐसे माहौल में रहता है तो चिड़चिड़ा या अत्यधिक चुप रहने लगता है, इसका असर बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।
अगर बच्चा आपसे लगातार दूरी बना रहा है तो इसमें भी डांट-फटकार एक महत्वपूर्ण कारण हो सकती है। बार-बार डांटना माता-पिता और बच्चे के रिश्ते में दूरी पैदा करती है। ऐसे में फिर बच्चा अपने मन की बातें साझा करने से कतराने लगता है। उसे महसूस होने लगता है कि उसे समझने के बजाय सिर्फ उसकी गलतियों पर ध्यान दिया जाता है। जिससे भरोसा कमजोर हो सकता है।
जैसा की आप जानते हैं कि बच्चा वही सीखता है, जो वे देखते और सुनते हैं। ऐसे में यदि आप हर समस्या का हल डांट या गुस्से से करते हैं, तो वे भी वैसा ही व्यवहार अपनाने लगते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि इससे उनके स्वभाव में आक्रामकता बढ़ जाती है और वे अपने दोस्तों या छोटे भाई-बहनों के साथ भी कठोर व्यवहार करने लगते हैं। आपको समझना होगा कि बच्चों के लिए अनुशासन जरूरी है, लेकिन हर बात पर डांटना समाधान नहीं है। प्यार, संवाद और धैर्य उनकी सही परवरिश के लिए जरूरी है।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।