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क्या आपका बच्चा घंटों वीडियो गेम खेलता रहता है? यदि हां, तो इस आदत को जितनी जल्दी हो छुड़वा दें। इससे कई तरह की शारीरिक समस्याएं होने का खतरा रहता है। बच्चे जब हद से ज्यादा पोर्टेबल डिवाइस, टीवी, मोबाइल पर गेम खेलते हैं, तो इससे उनके दिमाग पर बुरा असर पड़ सकता है। गेम खेलने दें, लेकिन आधा घंटा से ज्यादा नहीं। चाहे बड़े हों या बच्चे, हर किसी को लिमिट में ही वीडियो गेम खेलने की आदत विकसित करनी चाहिए। वीडियो गेम की लत भावनात्मक और शारीरिक दोनों ही तरह से प्रभावित (Effects of video game addiction) करती है।
अधिक वीडियो गेम में लगे रहने से बच्चे धीरे-धीरे बाहरी दुनिया से कटने लगते हैं। सामाजिक चीजों में भी वे भाग लेने से कतराते हैं, जो उनके संपूर्ण विकास के लिए सही नहीं है। एक शोध में कहा गया है कि अधिक वीडियो गेम खेलन से आप ''गेमिंग डिसऑर्डर'' (Gaming disorder) के शिकार हो सकते हैं, जो आपके दिमाग पर बुरा असर डालता है।
अधिक वीडियो गेम खेलने वाले बच्चों में एकाग्रता में कमी आने लगती है। धीरे-धीरे वे किसी भी काम या अपनी पढ़ाई को एकाग्रता और मन लगाकर पूरा नहीं कर पाते। इससे एग्जाम के रिजल्ट पर भी असर पड़ता है।
कुछ घर के बड़े भी देर रात तक जागकर वीडियो गेम खलते रहते हैं। इसी का देखा-देखी बच्चे भी यह आदत डेवलप कर लेते हैं। इससे रात में चैन की नींद नहीं सो पाते और नींद अधूरी रहने से दिन का सारा काम खराब होता चला जाता है। सारा दिन आलस महसूस करते हैं। नींद पूरी नहीं होने से सेहत को काफी नुकसान पहुंच सकता है।
एक बार बच्चों को गेम खेलने की लत लग जाए, तो वो दूसरों से कट जाते हैं। घर में आने वाले रिश्तेदारों, मेहमानों से उन्हें कोई मतलब नहीं रह जाता। वे सामाजिक रूप से लोगों से अलग होने लगते हैं। किसी पार्टी, फंक्शन आदि में भी जाने से कतराने लगते हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि इन जगहों पर ये चीजें खेलने को नहीं मिलेंगी। इससे बच्चों का मानसिक विकास नहीं हो पाता है।
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गेमिंग की लत लग जाने से बच्चे हों या बड़े, सभी के अंदर चिड़चिड़ापन, खीज, हारने के कारण गुस्सा आदि भर जाता है। हर छोटी-छोटी बातों पर भी गुस्सा आने लगता है।