क्या 2 साल से कम उम्र के बच्चे को फोन देना चाहिए? जानें स्क्रीन से उनकी हेल्थ पर क्या असर पड़ता है?

Parenting Tips: छोटे बच्चों के लिए स्क्रीन एक लत की तरह बन गई है, जिसका सीधा असर उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। इस लेख में स्क्रीन से बच्चों की हेल्थ पर पड़ने वाले असर के बारे में बात करेंगे।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : April 16, 2026 6:40 PM IST

Screen Effects For Under 2 Year Old: सिर्फ बड़ों को ही नहीं बच्चों को भी फोन की लत बुरी तरह से लग चुकी है, छोटे-छोटे बच्चे भी घंटों तक मोबाइल स्क्रीन में देखते रहते हैं। शॉर्ट वीडियोज देखते रहते हैं। लेकिन सबसे हानिकारक बात यह है कि पेरेंट्स भी इस बारे में ज्यादा नहीं सोचते हैं और अगर बच्चा रोने लगे तो खुद उसके हाथ में फोन दे देते हैं। जबकि पेरेंट्स को यह अच्छे से पता है कि बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए स्क्रीन बेहद हानिकारक है। लेकिन यह कितनी हानिकारक है, शायद पेरेंट्स को इसकी जानकारी नहीं है। फोन की लत इतनी बुरी लग चुकी है कि बच्चे 2 साल की उम्र से पहले ही फोन की स्क्रीन को देखना शुरु कर देते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि 2 साल से पहले बच्चे के लिए स्क्रीन देखना कितना ज्यादा खतरनाक हो सकता है?

2 साल से कम उम्र का स्क्रीन पर प्रभाव

बहुत ज्यादा स्क्रीन टाइम हर किसी के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है, फिर चाहे वे बड़े हों या बच्चे। लेकिन हम यहां 2 साल से कम उम्र के बच्चों के बारे में बात कर रहे हैं। MedlinePlus के अनुसार अगर बच्चे बहुत ज्यादा स्क्रीनटाइम दे रहे हैं यानी मोबाइल या टीवी आदि देख रहे हैं तो उससे उनके स्वास्थ्य को निम्न नुकसान हो सकता है -

  • नींद से जुड़ी समस्याएं - देखा गया है कि जो बच्चे ज्यादा फोन या टीवी देखते हैं, तो उन्हें रात को ठीक से नहीं हीं आती है। नींद न आने के कारण अन्य कई बीमारियों का खतरा बढ़ने लगता है।
  • मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं - जिन बच्चों को ज्यादा फोन या कंप्यूटर चलाने और टीवी देखने की आदत लग जाती है, तो उससे उनके मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचने लगता है और ध्यान न लगा पाना, एंग्जायटी व डिप्रेशन जैसी समस्याएं होने लगती हैं।
  • शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं - ज्यादा स्क्रीन टाइम उनके सेडेंटरी लाइफस्टाइल को बढाता है, जिससे बच्चों में मोटापा बढ़ने लगता है और साथ ही आने वाले समय में कई क्रोनिक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।

(और पढ़ें - बच्चों को एंग्जायटी क्यो होती है?)

Human Connection क्यों जरूरी?

बहुत ही सिंपल फैक्ट है, बच्चा जितनी देर फोन या टीवी स्क्रीन पर देख रहा होगा, उसका पूरी ध्यान वहीं पर रहेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि स्क्रीन के रंग-बिरंगे विजुअल्स और अलग-अलग म्यूजिक व टोन्स बच्चे को लुभावने लगते हैं। यही कारण है कि बच्चे का पूरा ध्यान स्क्रीन पर ही होता है और अपने आस-पास के वातावरण व आसपास बैठे लोगों पर ध्यान कम हो जाता है, जिसे बच्चे का ह्यूमन कनेक्शन कम होने लगता है। लेकिन बच्चे के लिए ह्यूमन कनेक्शन बहुत जरूरी है क्योंकि -

  • मेंटल डेवलपमेंट - बच्चा हमेशा दूसरों को देखकर सीखता है और हर बार नई-नई चीजें सीखकर ही उनके ब्रेन की ग्रोथ बनने लगती है। ज्यादा स्क्रीनटाइम के कारण बच्चे का ह्यूमन इंटरेक्शन कम हो जाता है, जिससे उसके ब्रेन की ग्रोथ भी प्रभावित होती है।
  • फिजिकल डेवलपमेंट - बच्चे का जितना ह्यूमन इंटरेक्शन बढ़ेगा उसके शारीरिक विकास में भी उतना ही सुधार आएगा। क्योंकि ह्यूमन कनेक्शन और ह्यूमन इंटरेक्शन से बच्चे का अपनों के साथ स्किन-टू-स्किन कांटेक्ट बढ़ता है। फिजिकल एक्टिविटी भी बढ़ी है, जो बच्चे की फिजिकल ग्रोथ के लिए बहुत जरूरी है।
  • इमोशनल डेवलपमेंट - बच्चे के भावनात्मक विकास के लिए ह्यूमन कॉन्टेक्ट होना जरूरी है। बच्चा प्यार करना, गुस्सा करना, याद करना, रोना, हंसना, खुशी मनाना और यहां तक कि अपने इमोशंस को हैंडल करना भी लोगों के साथ इंटरेक्ट करते हुए ही सीखता है।

क्या करें पेरेंट्स?

इसलिए बच्चे की उम्र 2 साल से कम है तो उसे जितना हो सके स्क्रीन से दूर ही रखें और अगर आप बच्चे को पूरी तरह से मोबाइल, टीवी या कंप्यूटर स्क्रीन से बच्चे को दूर कर देते हैं, तो यह और भी अच्छा है। लेकिन बच्चे स्क्रीन को देखना जल्दी सीख जाते हैं और उसकी जिद्द करने लगते हैं। ऐसे में बच्चों को स्क्रीन से दूर करने के लिए निम्न तरीके अपनाएं -

  • बच्चे के सामने खुद स्क्रीन न देखें - यह बच्चे को मोबाइल, कंप्यूटर व टीवी से दूर रखने का सबसे प्रभावी और सबसे पहला तरीका है। जिसका आपको खासतौर पर ध्यान रखना होगा। इसलिए बच्चों के सामने स्क्रीन बिल्कुल न देखें।
  • बच्चे की फिजिकल एक्टिविटी बढ़ाएं - अगर बच्चा फोन या टीवी देखने की जिद कर रहा है, तो इसका मतलब है कि वह बोर हो रहा है। आप उसके साथ खेलने का टाइम निकालें, अलग-अलग तरीके की फिजिकल एक्टिविटी में उसे शामिल करें। पार्क में ले जाएं, घर पर खेल-कूद कराएं और घर के अंदर ही अंताक्षरी जैसी एक्टिविटी करें।
  • उसे नई स्किल्स सिखाएं - बच्चे को धीरे-धीरे नई-नई स्किल्स सिखाना शुरू कराएं। बच्चे की उम्र के अनुसार आप उसे नई-नई स्किल्स सिखा सकते हैं। बच्चे को अलग-अलग प्रकार के खिलौने और गेम्स सिखाएं जैसे कैरम बोर्ड या पजल गेम्स आदि।

अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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