
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Medically Verified By: Dr. kirthi paladugu
Heavy School Bag
स्कूल बैग का वजन ज्यादा होना, आज के समय में काफी कॉमन हो चुका है। कई बार इस विषय को लेकर चर्चाएं भी हुई हैं, लेकिन फिर भी बैग का वजन कम नहीं हो सका। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बच्चों के स्कूल का यह भारी बैग बच्चों की रीढ़ की हड्डी पर असर डाल सकता है। हैदराबाद के यशोदा हॉस्पिटल्स में सीनियर कंसल्टेंट आर्थ्रोस्कोपी सर्जन और मिनिमली इनवेसिव ट्रॉमा, फुट और एंकल सर्जन डॉ. कीर्ति पलाडुगु का कहना है कि जरूरत से ज्यादा भारी स्कूल बैग बच्चों में कम उम्र से ही पीठ दर्द, गलत पोस्चर और लंबे समय तक चलने वाली रीढ़ की समस्याओं का कारण बन सकता है। आइए इस विषय को विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं-
NCBI की रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों की हड्डियां और मांसपेशियां अभी डेवलेप की अवस्था में होती हैं। ऐसे में अगर वे रोजाना अपने शरीर के वजन से ज्यादा भारी बैग उठाते हैं, तो रीढ़ पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। यह दबाव धीरे-धीरे उनकी हड्डियों के प्राकृतिक आकार को प्रभावित कर सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, भारी बैग उठाने से बच्चों में कई तरह की परेशानियां बढ़ सकती हैं, जैसे-
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और कई हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, स्कूल बैग का वजन बच्चे के शरीर के वजन का लगभग 10 प्रतिशत से 15 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होना चाहिए। अगर इससे ज्यादा वजन होता है, तो रीढ़ पर दबाव बढ़ने लगता है और मस्कुलोस्केलेटल समस्याएं हो सकती हैं।
हार्वर्ड हेल्थ के मुताबिक, भारी बैग के कारण बच्चे का पोस्चर गलत हो सकता है। दरअसल, जब बैग भारी होत है, तो बच्चे वजन उठाने के लिए एक कंधे पर बैग लटकाते हैं, आगे झुककर चलते हैं, शरीर को असंतुलित रखते हैं, इत्यादि आदतें अपनाते हैं। बच्चों की इस तरह की आदतें धीरे-धीरे उनकी रीढ़ की प्राकृतिक बनावट को बदल सकती हैं।
अगर यह समस्या लगातार बनी रहे, तो आगे चलकर क्रॉनिक बैक पेन, स्पाइनल डिसऑर्डर, मांसपेशियों में कमजोरी और गलत बॉडी अलाइनमेंट, जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
माता-पिता और स्कूल दोनों मिलकर इस समस्या को काफी हद तक रोक सकते हैं, जैसे-
Disclaimer : स्कूल बैग का सही वजन बच्चों की रीढ़ की सेहत के लिए बेहद जरूरी है। छोटी सी लापरवाही भी उनके शारीरिक विकास पर लंबे समय तक असर डाल सकती है। इसलिए जरूरी है कि माता-पिता, शिक्षक और स्कूल मिलकर इस ओर ध्यान दें, ताकि बच्चे स्वस्थ और मजबूत भविष्य की ओर बढ़ सकें।