क्या बच्चों पर चिल्लाने से उनके दिमाग पर असर पड़ता है? जानें क्या कहते हैं डॉक्टर

Child mental health : क्या आप अपने बच्चों से चिल्लाकर बात करते हैं? अगर हां, तो यह उनके मेंटल हेल्थ पर असर डाल सकता है। आइए जानते हैं बच्चों से चिल्लाकर बात करने से उनके व्यवहार पर कैसा पड़ता है असर?

WrittenBy

Written By: Kishori Mishra | Published : May 29, 2026 10:43 AM IST

WrittenBy

Medically Verified By: Dr Shorouq Motwani

Effects of yelling at children : अक्सर माता-पिता बच्चों को समझाने या उनकी गलतियों को रोकने के लिए उन पर चिल्ला देते हैं। हालांकि, कभी-कभी गुस्सा आना सामान्य बात है, लेकिन डॉक्टर का कहना है कि अगर बच्चों पर बार-बार चिल्लाया जाए, तो इसका असर उनकी मानसिक और भावनात्मक सेहत पर पड़ सकता है।

मुंबई स्थिति नारायणा हॉस्पिटल के चाइल्ड एंड एडोलसेंट साइकियाट्री, कंसल्टेंट डॉ. शोरूक मोटवानी का कहना है कि बच्चों को लगातार डांटना या ऊंची आवाज में बात करना बच्चों के लिए तनाव भरा माहौल बना देता है। इससे बच्चे खुद को डरा हुआ, असुरक्षित या अकेला महसूस कर सकते हैं। लंबे समय तक ऐसा होने पर यह उनके सोचने, समझने और भावनाओं को संभालने की क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है।

बच्चों के दिमाग पर कैसे पड़ता है असर?

बच्चों का दिमाग बचपन में तेजी से विकसित हो रहा होता है। ऐसे में बार-बार चिल्लाने या कठोर शब्दों का इस्तेमाल करने से उनके दिमाग के उन हिस्सों पर असर पड़ सकता है, जो याददाश्त, सीखने, आत्मविश्वास और भावनाओं को नियंत्रित करने से जुड़े होते हैं। डॉक्टर कहते हैं कि जिन बच्चों पर ज्यादा चिल्लाया जाता है, उनमें कुछ परेशानियां समस्याएं देखने को मिल सकती हैं, जैसे-

  1. पढ़ाई या किसी काम में ध्यान लगाने में दिक्कत
  2. बच्चों का आत्मविश्वास कम होना
  3. छोटी-छोटी बातों पर डर या घबराहट
  4. गुस्सा जल्दी आना
  5. अपनी भावनाओं को ठीक से व्यक्त न कर पाना, इत्यादि।

कुछ रिसर्च में यह भी सामने आया है कि बचपन में लगातार डांट या चिल्लाहट झेलने वाले बच्चों में बड़े होने पर एंग्जायटी और बिहेवियर से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

इमोशनल रूप से भी पड़ता है असर

बार-बार चिल्लाने से बच्चे खुद को गलत या बेकार समझने लग सकते हैं। धीरे-धीरे वे दूसरों से दूरी बनाने लगते हैं या फिर खुद भी गुस्से वाला व्यवहार अपनाने लगते हैं।

डॉक्टर कहती हैं कि बच्चे वही सीखते हैं, जो वे घर में देखते और सुनते हैं। अगर घर का माहौल हमेशा गुस्से और डर वाला हो, तो बच्चे भी उसी तरह अपनी भावनाएं व्यक्त करना सीख सकते हैं।

बच्चों को समझाने का सही तरीका क्या है?

डॉक्टर का कहना है कि बच्चों को डांटने की बजाय शांत और सम्मानजनक तरीके से समझाना ज्यादा असरदार होता है। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों के लिए साफ नियम बनाएं और गलत व्यवहार पर सही प्रतिक्रिया दें। इसके लिए कुछ आसान बातें मदद कर सकती हैं, जैसे-

  • गुस्सा आने पर तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचें
  • बच्चों से शांत आवाज में बात करें
  • उनकी बात भी ध्यान से सुनें
  • अच्छे व्यवहार की तारीफ करें
  • अपमानजनक शब्दों से बचें, इत्यादि।

Disclaimer : बच्चों पर चिल्लाना कुछ समय के लिए उन्हें शांत जरूर कर सकता है, लेकिन लंबे समय तक ऐसा करना उनके आत्मविश्वास, भावनाओं और मानसिक विकास पर असर डाल सकता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, प्यार, धैर्य और सकारात्मक बातचीत बच्चों की बेहतर परवरिश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source