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इन 5 कारणों से बच्चों में हो रही है धैर्य की कमी, डॉक्टर ने कहा पेरेंट्स की है गलती

इन दिनों बच्चे छोटी- छोटी बात पर गुस्सा होना, अपनी पसंदीदा चीजें न मिलने पर गुस्सा हो जाते हैं। डॉ. अक्षत जोशी बताते हैं कि कोई चीज न मिलने पर आने वाला गुस्सा बच्चों में पेशंस की कमी को दर्शाता है। आइए जानते हैं पेरेंट्स की किन गलतियों के कारण बच्चों में पेशंस की कमी हो जाती है।

Written By Ashu Kumar Das
Published : June 16, 2026 12:49 PM IST

बच्चों में कई कारणों से धैर्य की कमी हो रही है।

कुछ साल पहले तक बच्चे घंटों तक एक ही खेल खेल लेते थे, कहानी की किताबें पढ़ते थे या दोस्तों के साथ बाहर खेलते हुए समय बिताते थे। लेकिन आज कई माता-पिता और टीचर्स यह शिकायत करते हैं कि बच्चों में धैर्य यानी पेशेंस कम होता जा रहा है। उन्हें हर चीज तुरंत चाहिए, चाहे वह मनोरंजन हो, जानकारी हो या किसी एग्जाम का रिजल्ट। आजकल के बच्चों को कोई वीडियो कुछ देर के लिए एंटरटेनमेंट वाला न लगे तो वो उसे स्किप कर देते हैं। किसी वीडियो गेम में मजा न आए तो वो परेशान हो जाते हैं। इतना ही नहीं खाने में बोरियत महसूस हो तो वो नए- नए ऑप्शन की डिमांड करते हैं। मेरे घर में भी 3 बच्चे हैं और उनमें से 2 बच्चों को देखकर मैं ऐसा कह सकती हूं कि उनमें पेशंस की बहुत ज्यादा कमी है। पिछले दिनों में मैंने अपने छोटे वाले भतीजे से कोल्ड ड्रिंक खरीदने को मना कर दिया तो वो जमीन पर लेट गया और रोने लगा। मैंने गुस्सा दिखाया तो वो रूठ गया और अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए उसने न तो मुझसे पूरे दिन बात की और न ही मेरे साथ एक्टिविटी की।

इस दौरान मेरे दिमाग में एक ही सवाल आया कि क्या आजकल के बच्चों में पेशंस की कमी हो चुकी है। इस पूरे वाक्या के बाद मैंने दिल्ली के फोर्टिस हॉस्पिटल के मनोचिकित्सक डॉ. अक्षित जोशी से बात की और आज इस लेख में आपको बताने जा रही हूं, मेरे भतीजों की तरह ही कई बच्चों में पेशंस कम होने के कारण क्या हैं।

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1. हर चीज सेकेंड में मौजूद होना

डॉ. अक्षित जोशी ने बताते हैं कि आज का बच्चा ऐसी दुनिया में बड़ा हो रहा है जहां लगभग हर चीज कुछ ही सेकंड में मौजूद है। मोबाइल फोन पर एक क्लिक में वीडियो, गेम, कार्टून, जानकारी आसानी से मिल जाती है। ऑनलाइन शॉपिंग से लेकर फूड डिलीवरी तक बच्चों को हर चीज एक क्लिक पर मिलती है। ऐसे में जब बच्चों को लगातार तुरंत संतुष्टि (Instant Gratification) मिलने लगती है, तो उनके लिए इंतजार करना मुश्किल हो जाता है। दिमाग धीरे-धीरे तुरंत चीजों को पाना चाहता है। ऐसे में उनके अंदर धैर्य की कमी होने लगती है। JAMA Pediatrics में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार अधिक डिजिटल डिवाइस का इस्तेमाल करने वाले बच्चों के ध्यान और आत्म-नियंत्रण कम होता है।

बच्चों में ज्यादा मोबाइल का यूज भी धैर्य की कमी का कारण बन रहा है।

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2. डिजिटल स्क्रीन का इस्तेमाल करना

पब मेड सेंट्रलकी वेबसाइट पर मौजूद रिसर्च बताती है कि आज के बच्चों का काफी समय मोबाइल, टैबलेट और टीवी स्क्रीन के सामने बीतता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, शॉर्ट वीडियो और डिजिटल कंटेंट बच्चों के दिमाग को प्रभावित करता है। इसके कारण बच्चों का ध्यान एक ही तरफ केंद्रित करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे बच्चों में धैर्य और नई चीजों को जल्दी सीखने की कला खत्म हो जाती है। डॉ. अक्षित जोशी भी इस बात को मानते हैं कि डिजिटल स्क्रीन का इस्तेमाल करने से बच्चों के अंदर पेशंस कम होने लगता है।

3. कॉम्पिटिशन

डॉक्टर कहते हैं कि आज के बच्चों पर पढ़ाई, खेल और अन्य क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव पहले से कहीं ज्यादा है। कई पेरेंट्स बच्चों को महसूस करवाते हैं कि उन्हें हर क्षेत्र में तुरंत सक्सेस मिलनी जरूरी है। ऐसे में जब बच्चे को सफलता जल्दी नहीं मिलती, तो वे निराश हो जाते हैं। धैर्य का विकास तब होता है जब व्यक्ति धीरे-धीरे मेहनत करके रिजल्ट पाने का इंतजार सीखता है। लंबे समय तक दूसरों से आगे निकलने की भावना बच्चों में धैर्य को धीरे- धीरे खत्म कर देती है।

4. परवरिश का बदलता नजरिया

आज के ज्यादातर पेरेंट्स अपने बच्चों को हर संभव सुविधा देना चाहते हैं। यह स्वाभाविक भी है। लेकिन कई बार बच्चे की हर मांग तुरंत पूरी कर देना उसके धैर्य के विकास में कमी का कारण बन सकता है। अगर बच्चा रोते ही मोबाइल मिल जाए, जिद करते ही खिलौना खरीद दिया जाए या छोटी-सी परेशानी में भी तुरंत मदद मिल जाए, तो वह इंतजार करना और समस्याओं का सामना करना नहीं सीख पाता।

मोबाइल का ज्यादा यूज करने से भी बच्चों में धैर्य की कमी होती है।

5. परिवार में बातचीत की कमी

पहले परिवार के सदस्य साथ बैठकर बातचीत करते थे। बच्चे बड़ों की बातें सुनते थे, कहानियां सुनते थे और धीरे-धीरे बातचीत करने का तरीका भी सीखते थे। लेकिन अब परिवारों में ऐसा बिल्कुल भी नहीं होता है। ज्यादातर परिवारों में लोग मोबाइल पर स्क्रॉलिंग करते दिखते हैं और बच्चा परेशान न करे इसलिए उसे भी मोबाइल ही पकड़ा देते हैं। इसके कारण भी बच्चों में धैर्य की कमी हो रही है।

आज के बच्चों में धैर्य की कमी के पीछे कई कारण हैं, जिनमें डिजिटल दुनिया का प्रभाव, तुरंत मिलने वाली सुविधाएं, बदलती जीवनशैली, बढ़ता स्क्रीन टाइम जैसे कई फैक्टर्स मौजूद हैं। डॉ. अक्षित जोशी कहते हैं कि परिवार के सदस्य चाहे तो इन चीजों को मैनेज करके बच्चों में धैर्य को बढ़ा सकते हैं।

Disclaimer: अगर आपके घर में भी बच्चा है और आपको ऐसा लग रहा है कि उसमें धैर्य की कमी हो रही है, तो उसे थोड़ा सा समय दीजिए। बच्चे के साथ बातचीत से किसी प्रकार का सॉल्यूशन नहीं निकल रहा है, तो इस बारे में अपने डॉक्टर से बात करें।