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क्या आप जानते हैं कि नवजात बच्चों के रोने पर क्यों नहीं आते आंसू

अगर छह महीने के बाद भी बच्‍चे के रोते समय आंसू न आएं तो इसके पीछे का डीहाइड्रेशन या अश्रु वाहिनी में किसी तरह की समस्या का होना भी हो सकता है। इसके लिए तुरंत चाइल्ड स्पेशलिस्ट से संपर्क करना चाहिये।

क्या आप जानते हैं कि नवजात बच्चों के रोने पर क्यों नहीं आते आंसू
अगर छह महीने के बाद भी बच्‍चे के रोते समय आंसू न आएं तो इसके पीछे का डीहाइड्रेशन या अश्रु वाहिनी में किसी तरह की समस्या का होना भी हो सकता है। इसके लिए तुरंत चाइल्ड स्पेशलिस्ट से संपर्क करना चाहिये। @shutterstock

Written by Yogita Yadav |Published : December 21, 2018 4:44 PM IST

आंसुओं को रोने का संकेत माना गया है। आंख में आंसू होना यानी दुख होना। बच्‍चे भी अपने दुख, अपनी असुविधा का इजहार रोकर ही करते हैं। पर क्‍या आपने कभी गौर किया है कि बच्‍चों के रोने पर आंसू क्‍यों नहीं आते? आइए सुलझाते हैं छोटे बच्‍चों की ये बड़ी गुत्‍थी।

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क्‍यों आते हैं आंसू

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टियर डक्ट एक ऐसी पाइपलाइन होती है जो लैक्रिमल ग्लैंड (Lacrimal Gland) से आंसू लेकर आती है। ये लैक्रिमल ग्लैंड बादाम के आकार की दो थैलियां सी होती हैं। जो हमारी आंख के कोने से नाक को छूते हुए जाती हैं और इसी में आंसू बनते हैं। लेकिन नवजात बच्चों की आंखों में लैक्रिमल ग्लैंड्स से आँखों तक लाने वाली थैलिया उनके जन्म के एक महीने के बाद से बनना चालू होती हैं। किसी किसी बच्चे में ये लैक्रिमल ग्लैंड बनने के लिये तीन महीने तक का भी समय लग सकता है।

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आंखों में भी होता है ड्रेनेज सिस्‍टम

बैसे तो आंखों से आंसू का निकलना आंखों के लिए काफी अच्छा माना जाता है। दरअसल, हमारी आखों से आंसुओं के निकलने की प्रक्रिया एक ड्रेनेज-सिस्टम की तरह काम करती है। ये ग्रंथियां हमारी आंख के कोने से होते हुए नाक के अंदरूनी सिरों को छूते निकलती है। जिस कारण जैसे ही आंख में धूल कण या कीड़े-मकोड़े गिर जाते है या हल्‍की सी चोट लगने पर, तत्काल इससे आंसुओं का स्राव होना शुरू हो जाता है।

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6 महीनें का भी लग जाता है समय

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नवजात बच्चों में लैक्रिमल ग्लैंड बनने का समय 1 से 3 साह के बीच का होता है पर कई बार तो 6 माह के बच्चों में भी रोते समय आंसू नही बहते। इनमें 6 महीने तक का समय भी लग जाता है। इसके पीछे का प्रमुख कारण डीहाइड्रेशन या अश्रु वाहिनी में किसी तरह की समस्या का होना होता है। ऐसे में इन बच्चों को अधिक पानी व अधिक लिक्विड वाली चीजों को डाइट में देना चाहिये। यदि बच्चे की अश्रु वाहिनी(टियर डक्ट्स) में कोई ब्‍लॉकेज है और उसकी आंखों से किसी तरह का पीला पदार्थ निकल रहा है। तो आपको इस समस्या के लिये तुरंत चाइल्ड स्पेशलिस्ट से संपर्क करना चाहिये।

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