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Written By: Kishori Mishra | Updated : June 12, 2020 7:40 PM IST
मानसून में ऐसी होनी चाहिए बच्चों की डाइट
Diet Pattern of Child : बचपन में ही बच्चों को स्वस्थ खानपान की आदतों को अपनाना सिखाना चाहिए, क्योंकि अगर आप बचपन से ही उनमें अच्छी आदतें डालते हैं, तो आगे भी वह उन्हें फॉलो करते हैं। वहीं, अगर आप अपने बच्चों को जंकफूड और फास्ट फूड खाने की आदत डालते हैं, तो आगे चलकर भी वे ऐसे ही भोजन करने की जिद करेंगे। ऐसे में बच्चों को पौष्टिक खाने की आदत कम और स्नैक्स फूड खाने की आदत अधिक (Diet Pattern of Child) होगी।
इन्हीं कारणों के चलते बच्चों को स्वस्थ खानपान की आदत डालनी चाहिए। ये बच्चों को अपने जीवन में अच्छे और हेल्दी डाइट पैर्टन को बनाए रखने में मदद करता है। इन दिनों अधिकतर बच्चों को जंक फूड्स खाने की आदत हो गई है। ऐसे में अगर आप उन्हें हेल्दी खाना खाने के लिए (Diet Pattern of Child) कहते हैं, तो उनका मुंह बन जाता है। फास्ट फूड, रेडी-टू-ईट प्रोसेस्ड फूड्स इत्यादि चीजों के प्रति बच्चों का झुकाव अधिक होता है। इसी वजह से जब बच्चे बड़े होते हैं, तो माता-पिता को उन्हें स्वस्थ भोजन कराने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है।
हाल ही में एक अध्ययन से खुलासा हुआ है कि अगर आप बच्चों को शुरुआती वर्षों में ताजे फल और सब्जियां खिलाते हैं, तो आगे भी इन अच्छी आदतों को अपनाते हैं। हेल्द जर्नल बीएमसी न्यूट्रिशन में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, बचपन में अगर आप 100% ताजे फलों का जूस पिलाते हैं, तो आगे किशोरावस्था में ताजे फलों को खाने में वे आनाकानी नहीं करते हैं।
बोस्टन यूनिवर्सिटी और इस अध्ययन की लेखिका डॉ. लिन एल मूर ने कहा, "हम जानते हैं कि पूरे फल का सेवन, साथ ही आहार की गुणवत्ता में आमतौर पर किशोरावस्था के दौरान गिरावट आती है। अध्ययन पता चलता है कि जो 100% फलों के रस या इम्यूनिटी-बूस्टिंग होममेड जूस पीते हैं यानि लगभग 1.5 कप का सेवन करते हैं, वह आगे चलकर अपने किशोरावस्था में स्वस्थ आहार को बनाए रखते हैं, बजाय उन बच्चों की तुलना में अपने बचपन के दिनों में आधा कप या उससे भी कम जूस पीते हैं। इसके अलावा, दस साल से अधिक समय तक, इन बच्चों द्वारा आमतौर पर सेवन की जाने वाली सीमा के भीतर जूस की खपत (1-2 कप प्रति दिन) बचपन के समय अतिरिक्त वजन बढ़ने से जुड़ी नहीं थी। "
यह शोध फ्रामिंघम चिल्ड्रन स्टडी के सहयोग से बोस्टन विश्वविद्यालय के डॉ. मूर और उनकी टीम द्वारा किया गया है। इस अध्ययन में उन्होंने 3-6 वर्ष के बीच की आयु के लगभग 100 प्रीस्कूलर बच्चों को शामिल कर इनके डायट रिकॉर्ड पर नज़र रखी। इस अध्ययन में बच्चें की ऊंचाई और वजन के आंकड़ों के साथ अमेरिकियों (डीजीए) के लिए आहार गाइडनाइंस का अनुपालन किया गया था। इस अध्ययन में अगर बच्चों को शुरुआती वर्षों में अधिक फलों और जूस का सेवन कराए जाए, तो वह प्रीस्कूल के बाद और किशोरावस्था में स्वस्थ खानपान के लिए आनाकानी नहीं करेंगे।
डॉ. मूर ने कहा, "फलों का सेवन, विशेष रूप से पूरे फलों का सेवन, जीवन भर कई स्वास्थ्य लाभों से जुड़ा है। बच्चों के प्रारंभिक वर्षों के दौरान फलों के जूस को नजरअंदाज करने से उनके खानपार की आदतों के विकास पर अनपेक्षित प्रभाव पड़ सकता है।"
"यह अध्ययन कई पिछले अध्ययनों के निष्कर्षों की पुष्टि करता है कि छोटे बच्चों में फलों का जूस पीने का सुझाव बेहतर आहार गुणवत्ता और पूरे फलों के हाई इंटेक्स को बढ़ावा दे सकता है। 100% फलों के रस का मॉडरेशन में सेवन बचपन पर किसी भी प्रतिकूल प्रभाव के साथ नहीं थे।''