
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : August 19, 2021 7:01 AM IST
Image credits by: Growing up with siblings often involves navigating conflicts and finding resolutions. This process fosters resilience, enabling individuals to cope with life's challenges more effectively.
रक्षाबंधन का त्योहार (Rakshabandhan 2021) नज़दीक है और जब बात होती है इस फेस्टिवल की तो याद आती है सबको अपने भाई या बहन की और साथ ही दिमाग में दौड़ जाते हैं चित्र उन शरारतों के जो आप दोनों बचपन में करते थे। स्कूल से घर लौटते समय की वह मस्ती हो या ट्रेन में खिड़की के पास बैठने के लिए होने वाली तकरार या फिर घर में पंखा बंद करने-चलाने की बात पर होने वाली बहस हो या चॉकलेट और पेंसिल जैसी छोटी-मोटी चीज़ों के लिए होने वाली मार-पीट, सबने अपने बचपन के दिनों में अपने भाई या बहन के साथ झगड़ा ( Sibling Rivalry) ज़रूर किया ही होगा। पर क्या आप जानते हैं कि यही छोटी-मोटी नोंकझोंक आपके बच्चों के बीत के रिश्ते को और भी मज़बूत बना सकती है। जी हां, कम से कम एक नयी स्टडी ऐसा दावा ज़रूर करती है। (Fighting with siblings is healthy in Hindi)

कुछ समय पहले यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज के रिसर्चर्स की एक टीम ने एक स्टडी का आयोजन किया। इस स्टडी के आधार पर यह दावा किया गया है कि, बचपन में जिन भाई-बहनों के बीच नोंकझोंक बहुत अधिक होती है उनका रिश्ता भी मज़बूत होता है। इससे बच्चे मानसिक स्तर पर मज़बूत बनते हैं और वाद-विवाद जैसी स्थितियों में हाज़िरजवाबी भी साबित होते हैं।
इस स्टडी के लिए 140 बच्चों को चुना गया और यह समझने की कोशिश की गयी कि, बचपन में होने वाले लड़ाई झगड़ों का बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक व्यवहार पर क्या असर पड़ता है। शोधकर्ताओं का तर्क है कि जब भाई-बहनों के बीच बहस होती है तो इसके उनकी मानसिक सेहत पर बेहतर प्रभाव पड़ता है। इससे उनकी रीज़निंग और प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स बेहतर होती हैं जो आगे जिंदगी में उनके काम आती हैं।
इस बात पर ध्यान दें कि सिबलिंग से होने वाले झगड़े से आपको तभी फायदा मिलेगा जब आप बड़े होने के साथ-साथ इन बातों को पीछे छेड़ देंगे और अपने दिल से लगाकर नहीं बैठेंगे। इससे आपको एक बेहतर और समझदार इंसान बनने में मदद मिलेगी।
जब घर में बच्चों की लड़ाई होती है तो मां-बाप के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन जाता है कि वह बच्चों को शांत कैसे कराएं और उनमें दोबारा झगड़ा होने से कैसे रोके। जब बच्चों के बीच बहस हो तो उन्हें समझाएं कि उनका लड़ना कहीं आगे चलकर गम्भीर समस्या या मनमुटाव की वजह ना बनें। झगड़े के बाद बच्चों में दोस्ती कराएं और रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिश करें।
बच्चों का खेल और बच्चों की लड़ाई, इन दोनों को ही बहुत गम्भीर नहीं होना चाहिए। जिस तरह बच्चे छोटी-छोटी बातों पर लड़ते हैं, उसी तरह उन बातों के मामूली होने का अहसास उन्हें दिलाएं। माता-पिता बच्चों को समझाएं कि उन्हें हमेशा अपने भाई या बहन के साथ रहना है और उसका ख्याल भी रखना है। इसीलिए, झगड़े के बाद प्यार से रहना और एक-दूसरे के साथ एडजस्ट करना भी सीखना चाहिए। ताकि रक्षाबंधन पर बहनें प्यार से भाई को याद करें और भाई उतने ही स्नेह के साथ अपनी बहनों से राखी बंधवाने की प्रतिक्षा भी कर सके।

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