World Breastfeeding Week: पब्लिक प्‍लेस में ब्रेस्‍टफीडिंग को लेकर इतनी बड़ी बात बोल गई दिया मिर्जा, बेल्जियम से कर दी भारत की तुलना

World Breastfeeding Week: बॉलीवुड एक्‍ट्रेस दिया मिर्जा (Actress Dia Mirza ) जो हाल ही में मां बनी हैं उन्‍होंने ब्रेस्‍टफीडिंग पर कुछ ऐसा कहा जिससे चारों ओर उनकी चर्चा हो रही है।

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Written By: Rashmi Upadhyay | Published : August 5, 2021 5:43 PM IST

मां का दूध बच्‍चे के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इससे बच्‍चे को तमाम तरह के पोषक तत्‍व मिलने के साथ ही उसका विकास भी जल्‍दी होता है और वो कई बीमारियों व संक्रमण से भी बचता है। हर साल 1 अगस्‍त से 7 अगस्‍त तक ब्रेस्‍टफीडिंग वीक (World Breastfeeding Week) मनाया जाता है। ब्रेस्‍टफीडिंग का मतलब होता है मां द्वारा अपने शिशु को दूध पिलाना। ब्रेस्‍टफीडिंग वीक को मनाने का मकसद शिशु के लिए मां के दूध की आवश्‍यकता, उसमें मौजूद पोषक तत्‍व और मां के दूध के अभाव में बच्‍चों को किन-किन बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है इस बारे में महिलाओं को जागरुक करना होता है। इस साल ब्रेस्‍टफीडिंग वीक की थीम सुरक्षित ब्रेस्‍टफीडिंग एक जिम्‍मेदारी (“Protect Breastfeeding: A Shared Responsibility”) है। इस थीम का मतलब सुरक्षित तरीके से मां द्वारा अपने शिशु को दूध पिलाना है। बॉलीवुड एक्‍ट्रेस दिया मिर्जा (Actress Dia Mirza ) जो हाल ही में मां बनी हैं उन्‍होंने ब्रेस्‍टफीडिंग पर कुछ ऐसा कहा जिससे चारों ओर उनकी चर्चा हो रही है। आइए जानते हैं ब्रेस्‍टफीडिंग के बारे में आखिर दिया मिर्जा ने ऐसा क्‍या बोल दिया है।

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"बहुत रिस्‍की है भारत में पब्लिक प्‍लेस में ब्रेस्‍टफीड कराना"

एक्‍ट्रेस दिया मिर्जा ने एक अखबार के साथ बातचीत में ब्रेस्‍टफीडिंग पर बड़ी बात कही है। दिया मिर्जा ने कहा है कि पब्लिक प्‍लेस में ब्रेस्‍टफीडिंग कराते वक्‍त एक मां को कई चैलेंस का सामना करना पड़ता है। वैसे तो मां द्वारा अपने शिशु को दूध पिलाना नेचुरल है और स्‍वाभाविक है लेकिन जब कोई महिला ऐसा करती है तो उसे शेम और जजमेंट का सामना करना पड़ता है। दिया का कहना है कि हमारे समाज में पब्लिक प्‍लेस में ब्रेस्‍टफीडिंग के लिए कोई प्राइवेसी नहीं है। दिया मिर्जा आगे कहती हैं "बेल्जियम में पब्लिक प्‍लेस में ब्रेस्‍टफीडिंग कानून द्वारा प्रोटेक्टिड है। इसी तरह हमें भारत में प्रोटेक्‍शन की जरूरत है। मां द्वारा बच्‍चे को दूध पिलाने की प्रक्रिया को नेचुरली लेना चाहिए। लेकिन अभी हालात ये हैं कि महिलाओं को शर्म और कमजोरी महसूस करनी पड़ती है।"

WHO के अनुसार 6 महीने तक बच्‍चे को मां का दूध पिलाया जाना चाहिए

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के अनुसार जन्‍म के बाद शिुश को 6 महीने तक मां का दूध ही पिलाना चाहिए। जो बच्‍चे किसी कारण से बचपन में मां का दूध नहीं पी पाते हैं उनमें जन्‍म के कुछ महीने बाद ही मौत का रिस्‍क काफी बढ़ जाता है। क्‍योंकि जो पोषक तत्‍व मां के दूध में होते हैं वो बच्‍चे के लिए बहुत जरूरी होते हैं। दिया मिर्जा कहती हैं कि हमें इस बात की चिंता होनी चाहिए कि भारत में कुपोषण और शिशु मृत्यु दर सबसे अधिक है।

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शिशु के लिए क्‍यों जरूरी है मां का दूध

नवजात शिशु को जन्म के बाद कई तरह के संक्रमण होने का बहुत खतरा होता है। इसके अलावा दस्त, कुपोषण, निमोनिया और पीलिया जैसी बीमारियां भी शिशुओं में आम हैं। इसलिए प्रीमैच्योर बेबी से लेकर नॉर्मल बेबी तक, शिशु के लिए मां का दूध पीना बहुत जरूरी होता है इससे शरीर संक्रमण से खुद को बचाने में सक्षम हो पाता है। इसके अलावा, नवजात शिशु का डाइजेस्टिव सिस्टम भी बहुत कमजोर होता है, इसलिए उस वक्त मां का दूध ही एक ऐसा पौष्टिक आहार है जो वह आसानी से पचा पाता है।

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