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बच्चों की कफ-खांसी को न करें नजरअंदाज, हो सकती है क्रूप डिजीज

क्रूप डिजीज के लक्षण 6 माह से 3 साल तक की उम्र के बच्चों में ज्यादा गंभीर रूप में देखने को मिलते हैं लेकिन कई बार बड़े बच्चों को भी ये शिकार बना सकते हैं।

Written By Anshumala
Published : December 7, 2018 4:41 PM IST

क्रूप डिजीज के लक्षण 6 माह से 3 साल तक की उम्र के बच्चों में ज्यादा गंभीर रूप में देखने को मिलते हैं। © Shutterstock.

बदलते मौसम में बच्चों को सबसे ज्यादा सर्दी-जुकाम और कफ परेशान करता है। कफ के कारण रात में बच्चे ठीके से सो भी नहीं पाते हैं। खासकर, जब वे रोते हैं, तो कफ और भी ज्यादा तीव्र हो जाती है। समय पर इसका ध्यान दिया जाए, तो कुछ उपायों को अपनाकर इस समय को दूर किया जा सकता है। कई बार सर्दी-जुकाम, खांसी और कफ अधिक होना किसी गंभीर बीमारी का कारण भी बन सकता है जैसे क्रूप डिजीज। बच्चों में खांसी होने के कारण अधिकांशत: पैराइनफ्लूएंजा जैसे वायरस होते हैं। कुछ मामले में यह बैक्टीरियल इन्फेक्शन भी हो सकते हैं।

क्या है क्रूप डिजीज

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क्रूप डिजीज के लक्षण 6 माह से 3 साल तक की उम्र के बच्चों में ज्यादा गंभीर रूप में देखने को मिलते हैं लेकिन कई बार बड़े बच्चों को भी ये शिकार बना सकते हैं। यह एक संक्रामक बीमारी है तथा पीड़ित से दूसरों तक फैल सकती है।

लक्षण

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सर्दी-जुकाम।

नाक बहना या अवरुद्ध होना।

बुखार।

गले में सूजन और दर्द।

सांस लेने में तकलीफ या तेज-तेज सांस लेना।

ज्यादा गंभीर मामलों में ओठों के आस-पास ऑक्सीजन की कमी से नीलापन आना।

साधारण सर्दी-खांसी भी क्रूप डिजीज का बन सकती है कारण

अधिकांश मामलों में क्रूप डिजीज की शुरुआत ठीक सामान्य सर्दी-जुकाम जैसे इन्फेक्शन से ही होती है। जब कफ और सूजन बढ़ जाता है तो बच्चा एक अजीब सी आवाज में खांसने लगता है। यह आवाज तेज और किसी जानवर (श्वान नहीं) के भौंकने जैसी सुनाई देती है। यह खांसी रात में या बच्चे के रोने और परेशान होने पर और बढ़ सकती है। यही नहीं बच्चे को सांस लेने में भी तकलीफ होती है और इस समय भी एक अजीब सी सीटी जैसी आवाज उसके गले से निकलती है। इससे उनमें बैचेनी बढ़ सकती है और उसकी नींद में भी बाधा आ सकती है।

भापयुक्त हवा या ताजा हवा में पीड़ित को कुछ देर सांस लेने दें जिससे उसे खांसी में आराम मिले। © Shutterstock.

यू रखें ध्यान

क्रूप डिजीज होने पर ज्यादातर मामलों में सामान्य इलाजों के जरिए आराम पाया जा सकता है। घरेलू उपचार भी इसमें राहत देते हैं। इसका बार-बार होना भी ठीक नहीं है इसलिए इसका समय पर इलाज जरूरी है। इसके लक्षण आमतौर पर 5-6 दिन तक रहते हैं। इस दौरान उनका अतिरिक्त ध्यान रखना जरूरी होता है। यदि बच्चे को सांस लेने में ज्यादा दिक्कत हो, उसकी सांस लेने की गति असामान्य हो या उसकी आंखों, नाक और मुंह के आस-पास या नाखूनों के समीप की त्वचा नीली या ग्रे होने लगे तो तुरंत डॉक्टर से सम्पर्क करें। लक्षणों को इन उपायों से भी काबू कर सकते हैं-

- भापयुक्त हवा या कुछ केसेज में ताजा हवा में पीड़ित को कुछ देर सांस लेने दें जिससे उसे खांसी में आराम मिले।

- बुखार, बदन दर्द होने पर डॉक्टर से दिखाएं।

- बच्चे को आराम करने दें। उसे धूल-धुएं या अन्य कफ पैदा करने वाली स्थितियों से बचाएं।

- अधिक से अधिक तरल पदार्थ पीने के लिए दें। गुनगुने सूप, गुनगुना या सामान्य तापमान वाला पानी आदि दें। बहुत छोटे बच्चों के लिए मां का दूध सर्वोत्तम है।

- नाक खोलने के लिए नोज ड्रॉप्स का प्रयोग करें।

- बच्चे का सिर थोड़ा ऊंचा रखकर सुलाएं।

- संक्रमित बच्चे को बाकी बच्चों से दूर रखें।

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