Exam टाइम में सिर्फ पढ़ाई नहीं इन 5 बातों पर फोकस करें पेरेंट्स, बच्चा खुद बन जाएगा क्लास का टॉपर

हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि एग्जाम टाइम में पढ़ाई के शेड्यूल से ज्यादा घर का माहौल महत्वपूर्ण होता है। माहौल अच्छा हो तो बच्चा पढ़ाई पर ज्यादा फोकस कर पाता है।

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Written By: Ashu Kumar Das | Published : February 26, 2026 2:42 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Gayathri K

Creating a Calm Home During Exams Why Environment Matters More Than Schedules:परीक्षा का समय बच्चों के लिए जितना महत्वपूर्ण होता है, उतना ही तनावपूर्ण भी हो सकता है। जब बच्चों के एग्जाम का समय आता है, तो अक्सर माता-पिता पढ़ाई का शेड्यूल बनाने और अधिक समय तक पढ़ने पर जोर देते हैं, लेकिन चाइल्ड साइकेट्रिस्ट डॉ. गायत्री (Dr. Gayathri K, Senior Consultant - Child Psychiatrist, MBBS, MD (Psychiatry), DNB (Psychiatry), Maarga Mind Care, Bangalore) बताती हैं कि एग्जाम में पढ़ाई से ज्यादा घर का माहौल महत्वपूर्ण होता है। एग्जाम के समय घर का माहौल सही तो बच्चे पढ़ाई पर ज्यादा फोकस कर पाते हैं और चीजों को ज्यादा अच्छे से याद कर पाते हैं।

शांत वातावरण क्यों जरूरी है

डॉ. गायत्री के का कहना है कि जब घर का माहौल शांत और व्यवस्थित होता है, तो बच्चों का मन पढ़ाई में ज्यादा लगता है। शोर-शराबा, बार-बार टोकना या एग्जाम के बारे में बच्चों से ज्यादा बात करना बच्चों के फोकस को प्रभावित करता है। इसके विपरीत, शांत माहौल चिंता को कम करता है और बच्चों को बेहतर तरीके से ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है।

Slow Breathing

नंबर की बात करना नहीं होता है सही

परीक्षा के दौरान घर का भावनात्मक वातावरण बच्चों की सोच और आत्मविश्वास को प्रभावित करता है। एग्जाम के समय पेरेंट्स अगर बार- बार बच्चों के सामने नंबर, रिजल्ट क्या होगा, रिजल्ट अच्छा ही आना चाहिए, नंबर कम आए तो देखना जैसी बात करते हैं, तो बच्चों के मन में एक डर बैठ जाता है। इस डर के कारण बच्चे पूरी तरह से पढ़ाई करने के बावजूद चीजों को याद नहीं रख पाता है। ऐसे में पेरेंट्स को ध्यान रखना चाहिए कि एग्जाम के समय बार-बार ब्चचे के सामने नंबर और रिजल्ट की बातों को दोहराए नहीं।

बच्चों के एग्जाम के लिए घर को कैसे तैयार करें

  1. पढ़ाई के लिए सही जगह- चाइल्ड साइकेट्रिस्ट बताती हैं कि एग्जाम के लिए बच्चों को तैयारी करवाते समय शांत पढ़ाई का स्थान होना चाहिए। पढ़ाई के लिए शांत जगह होने से बच्चे का ध्यान नहीं भटकता है और वो सही तरीके से फोकस कर पाते हैं। बच्चों का पढ़ाई के बीच छोटे-छोटे ब्रेक लेना भी जरूरी है, क्योंकि इससे मानसिक थकान कम होती है और ध्यान बेहतर रहता है।
  2. खुलकर बातचीत करें- पेरेंट्स को बच्चों से परीक्षा के तनाव के बारे में खुलकर बात करना बेहद जरूरी है। पेरेंट्स को बच्चों को एग्जाम के समय यह महसूस कराना चाहिए कि घबराहट या तनाव सामान्य है। जब बच्चे अपनी भावनाएं व्यक्त कर पाते हैं, तो वे मानसिक रूप से अधिक सुरक्षित और आत्मविश्वासी महसूस करते हैं। एग्जाम के समय बच्चों और पेरेंट्स का खुलकर बात करना बच्चों के दिमाग पर पॉजिटिव इफेक्ट डालता है।
  3. पेरेंट्स का व्यवहार है ठीक- बच्चे अक्सर अपने माता-पिता के व्यवहार की नकल करते हैं। यदि माता-पिता शांत, धैर्यवान बने रहते हैं, तो बच्चों में भी आत्मविश्वास और संतुलन विकसित होता है। घबराहट या अत्यधिक चिंता दिखाने से बच्चों का तनाव बढ़ सकता है। इसलिए एग्जाम के समय बच्चों के प्रति पेरेंट्स का थोड़ा शांत व्यवहार अपनाना चाहिए।
  4. सही नींद है जरूरी- एग्जाम के समय बच्चों को पर्याप्त नींद मिलना बहुत जरूरी है। नींद की कमी से याददाश्त और ध्यान प्रभावित होता है। पेरेंट्स ध्यान दें कि एग्जाम के समय बच्चों को कम से कम 8 घंटे की नींद जरूर मिलें।
  5. संतुलित खानपान- एग्जाम के समय बच्चे का दिमाग पढ़ाई पर फोकस कराने के लिए संतुलित खानपान बहुत जरूरी है। एग्जाम के समय बच्चों को फ्रूट्स, दूध और सही मात्रा में प्रोटीन युक्त आहार जरूर दें।

हेल्थ एक्सपर्ट कहती हैं कि एग्जाम के दौरान जब घर का माहौल शांत, सहयोगपूर्ण और सकारात्मक होता है, तो बच्चे परीक्षा को डर के रूप में नहीं बल्कि सीखने और आगे बढ़ने के अवसर के रूप में देखते हैं। इससे उनमें आत्मविश्वास, धैर्य और मानसिक मजबूती विकसित होती है। इसलिए एग्जाम के समय बच्चों से ज्यादा पेरेंट्स को शांत रहने की जरूरत होती है।

Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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