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वर्किंग पेरेंट्स के बच्चे जल्दी होते हैं ऑटिज्म के शिकार, इस तरह दिखते हैं इस बीमारी के शुरुआती लक्षण

ऑटिज्म एक ऐसी बीमारी है जिसका सीधा संबंध बच्चे के व्यवहार से है। इस रोग की चपेट में आने से बच्चे के व्यवहार में काफी परिवर्तन आ जाता है।​ बच्चे के जन्म के छह महीने से लेकर एक वर्ष के भीतर तक बीमारी का पता लगाया जाता है कि बच्चा सामान्य रूप से व्यवहार कर रहा है या नहीं। इस रोग के अपने लक्षण होते हैं। लेकिन आमतौर पर पेरेंट्स उन्हें सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिसका खामियाजा उन्हें बाद में भुगतना पड़ता है।

Written By Rashmi Upadhyay
Updated : September 25, 2020 6:36 PM IST

वर्किंग पेरेंट्स के बच्चे जल्दी होते हैं ऑटिज्म के शिकार, इस तरह दिखते हैं इस बीमारी के शुरुआती लक्षण

ऑटिज्म एक ऐसी बीमारी है जिसका सीधा संबंध बच्चे के व्यवहार से है। इस रोग की चपेट में आने से बच्चे के व्यवहार में काफी परिवर्तन आ जाता है।​ बच्चे के जन्म के छह महीने से लेकर एक वर्ष के भीतर तक बीमारी का पता लगाया जाता है कि बच्चा सामान्य रूप से व्यवहार कर रहा है या नहीं। इस रोग के अपने लक्षण होते हैं। लेकिन आमतौर पर पेरेंट्स उन्हें सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिसका खामियाजा उन्हें बाद में भुगतना पड़ता है।

ऑटिज्म से ग्रसित बच्चा किसी चीज पर जल्दी प्रतिक्रिया नहीं देता है और न ही अपनी इस समस्या को किसी को बता पाता है। इसलिए ये पेरेंट्स की जिम्मेदारी बनती है कि वह बच्चे में ऑटिज्म के लक्षणों को पहचानकर तुरंत किसी अच्छे मनोचिकित्सक या काउन्सलर से संपर्क करें और इलाज शुरू करें। मौजूदा वक्त में बच्चों को ऑटिज्म से सही करने के लिए कई तरीके मौजूद हैं। बच्चे को इस रोग से छुटकारा दिलाने से पहले पेरेंट्स को यह समझने की जरूरत है कि आखिर ऑटिज्म होता क्या है? आज हम आपको वो तरीके बता रहे हैं जिससे आप ऑटिज्म ग्रसित बच्चे को फिर से पहले की तरह सामान्य बना सकते हैं।

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क्या होता है ऑटिज्म?

ऑटिज्म एक मानसिक बीमारी है। इसके लक्षण बच्चे में जन्मजात से लेकर 5-6 वर्ष की उम्र तक दिखे जा सकते हैं, या इससे ज्यादा भी। ऐसे बच्चे जो ऑटिज्म से ग्रसित होते हैं उनका व्यवहार और कामकाज सामान्य बच्चों से अलग हो जाता है। यह रोग बच्चे के विकास को भी प्रभावित करती है। हालांकि बच्चे की बहुत उम्र में ऑटिज्म के लक्षण पहचानना पेरेंट्स के लिए बहुत मुश्किल भी हो जाता है। कई बार पेरेंट्स यह समझने लगते हैं कि शायद यह बदलाव उम्र बढ़ने की वजह से हो रहा है।

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कुछ इस तरह दिखते हैं बच्चे में ऑटिज्म के लक्षण

  • अपनी फीलिंग्स या बात को रखने में कठिनाई होना

    सभी से अलग होकर रहना

    बात करते समय अजीब आवाजें आना

    बोलते हुए लड़खड़ाना

    अनावश्यक रूप से दूसरों के शब्दों को दोहराते रहना

    आई कॉनटेक्ट करने में घबराहट होना

    अनजान लोगों से बात करने में झिझकना

    रचनात्मक भाषा का अभाव होना

ऑटिज्म से ग्रसित बच्चे के साथ पेरेंट्स ऐसे करें डील

यह अक्सर माता-पिता के लिए सबसे बड़ी कठिनाई होती है कि वो कैसे अपने बच्चों को आत्मनिर्भर, स्वतंत्र और आत्मकेंद्रित बनाएं। कहीं न कहीं माता पिता की इच्छाओं का बढ़ता बोझ भी बच्चे को ऑटिज्म का शिकार बना सकता है। इसलिए इस रोग का इलाज करने से पहले माता-पिता को यह समझना चाहिए कि बच्चे पर किसी चीज को थोपन के बजाय उनके साथ प्यार और स्नेह के साथ व्यवहार किया जाए। उपरोक्त बताए गए लक्षणों में से अगर आपको अपने बच्चे में कोई 2 या 3 लक्षण भी दिखें तो सतर्क हो जाएं।

हालांकि बच्चे को इस बारे में न बताएं कि उन्हें कोई मानसिक बीमारी है, बस धीरे धीरे इस ओर इलाज शुरू कर दें। सबसे पहले तो आप अपने बच्चे को समय देना शुरू करें और उसके साथ खूब सारी बातें करें। बच्चे के साथ वो चीजें करें जो उन्हें पसदं आए। बच्चे आमतौर पर डॉक्टर के पास जाने से डरते हैं, इसलिए आप उन्हें किसी अच्छे काउंसलर के पास ले जा सकते हैं। हालांकि ऐसी स्थिति में आपको किसी मनावैज्ञानिक सलाह भी लेनी चाहिए।