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वर्किंग पेरेंट्स के लिए यह जरूरी है कि वे बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी एहतियात बरतें। © Shutterstock
आजकल ज्यादातर पेरेंट्स वर्किंग हैं। ऐसी स्थिति में अगर न्यूक्लियर फैमिली हो तो बच्चे अकेले ही रहते हैं। ऐसे बच्चे स्कूल से लौटकर खुद अपने घर का ताला खोलते हैं। बाहर रहते हुए अकसर बच्चों की सुरक्षा की चिंता सताती है। ऐसे में अगर आप इन जरूरी बातों पर अमल करें, तो हालात को कुछ हद तक मैनेज किया जा सकता है।
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कॉल करने की आदत - ऐसे बच्चों को ये सख्त हिदायत देनी चाहिए कि वे जब भी घर पहुंचे सबसे पहले अपने पैरेंट्स को कॉल या मैसेज करें। घर में आने के बाद वे अपने काम बाद में करें, लेकिन पहले सूचना दें। पैरेंट्स भी उनके अनुमानित समय पर घर में फोन करके चेक कर सकते हैं। ऐसा व्यवहार बच्चे और पैरेंट्स दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
बनाकर रखें लिस्ट - ऐसे बच्चों के पैरेंट्स को अपने घर में दीवार पर एक लिस्ट चस्पा करनी चाहिए। इस लिस्ट में कम से कम 5 ऐसे नंबर्स होने चाहिए, जो जरूरत पड़ने पर बच्चों की सहायता के लिए पहुंच सकें। इनमें कोई पड़ोसी, रिश्तेदार, स्कूल फ्रेंड या अन्य कोई हो सकता है। बच्चों को अपने क्षेत्र के पुलिस स्टेशन का नंबर भी दे दिया जाए तो बेहतर होगा।
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समझाएं घर का पता - आपके बच्चों को अपने घर का एड्रेस समझाने का सरल तरीका मालूम होना चाहिए। भले ही वह अपने घर को जानते हैं, वहां जा सकते हैं, लेकिन किसी को अचानक समझाने के लिए उन्हें अपने घर का लैंडमार्क व अन्य स्थान याद होने चाहिए। ये तब मदद करेगा जब वह अकेले कहीं फंस जाएंगे और उन्हें घर पहुंचना होगा।
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होम अप्लाइसेंस का इस्तेमाल - ऐसे बच्चों को बेहतर तरीके से पता होना चाहिए कि घर में जो भी उपकरण हैं उन्हें कैसे सुरक्षित तरीके से हैंडल किया जाए। कई बार माइक्रोवेव में खाना गर्म करने, गीजर चलाने, प्रेस करने, सीसीटीवी कैमरा देखने या अन्य उपकरण चलाने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में इन बच्चों को खासतौर पर गैजेट्स को चलाने की ट्रेनिंग दें और उन्हें इन यंत्रों की प्रैक्टिस कराएं।
समय का ध्यान रखें - घर में अकेले बच्चों के साथ जो भी वादा करें उसे समय से पूरा करें। खासतौर पर आप उन्हें घर पहुंचने का जो भी समय बताएं, उस पर पहुंच जाएं। देर होने की स्थिति में उन्हें सूचित करें। एक छोटे बच्चे के लिए चंद मिनट लेट पहुंचना भी नुकसानदायक हो सकता है। समय की पाबंदी से आपका और उनका विश्वास बढ़ता है।