बच्चों को पैसे की समझ कब और कैसे दें? डॉक्टर से जानें आसान टिप्स

Financial literacy for kids: बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक ज्ञान भी देना बहुत ही जरूरी होता है। अक्सर माता-पिता इस बात को मिस कर देते हैं, जो आगे चलकर बच्चों के लिए सही नहीं होता है। आइए जानते हैं बच्चों को कैसे और कब दें फाइनेंशियल लिटरेसी की समझ?

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Written By: Kishori Mishra | Published : May 12, 2026 2:53 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Suresh Kumar Panuganti

Money Habits in Kids : आज के समय में बच्चों को सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि पैसों की सही समझ देना भी बेहद जरूरी हो गया है। छोटी उम्र से ही अगर बच्चे पैसे की वैल्यू समझने लगें, तो आगे चलकर वे जिम्मेदार और समझदार फैसले लेना सीखते हैं। एक्सपर्ट्स की मानें, तो फाइनेंशियल लिटरेसी यानी पैसों की समझ बचपन से शुरू होनी चाहिए। इस विषय पर हैदराबाद स्थित यशोदा हॉस्पिटल के लीड कंसल्टेंट, पीडियाट्रिक क्रिटिकल केयर और पीडियाट्रिक्स डॉ. सुरेश कुमार पनुगंत का कहना है कि बच्चों को 3 से 5 साल की उम्र से पैसों के बारे में बेसिक बातें सिखाई जा सकती हैं। इस उम्र में उनकी समझ विकसित होने लगती है और वे जरूरत और इच्छा के बीच फर्क समझना शुरू कर देते हैं।

डॉक्टर बताते हैं कि अगर बच्चों को सही समय पर पैसों की शिक्षा न दी जाए, तो आगे चलकर उनमें गलत फाइनेंशियल हैबिट्स विकसित हो सकती हैं। कई स्टडीज में भी यह सामने आया है कि बचपन में दी गई फाइनेंशियल एजुकेशन टीनएज में फिजूलखर्ची और इंपल्सिव स्पेंडिंग को कम करने में मदद करती है।

कब और कैसे देना शुरू करें बच्चों को पैसों की समझ

बच्चों को आप 3 से 5 साल की उम्र के बाद से ही कुछ-कुछ छोटी-छोटी आदतों और खेल-खेल में पैसों की समझ देना शुरू कर सकते हैं। आइए डॉक्टर से  जानते हैं, कुछ आसान से टिप्स-

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गुल्लक देकर सिखाएं बचत की आदत

बच्चों को पैसे की समझ देने के लिए शुरुआत हमेशा आसान और खेल-खेल में करनी चाहिए। छोटे बच्चों को गुल्लक देकर बचत की आदत सिखाई जा सकती है। अगर बच्चा कोई छोटा काम पूरा करता है, तो उसे पॉकेट मनी देकर पैसे की अहमियत समझाई जा सकती है।

ग्रॉसरी शॉपिंग में करें शामिल

7 से 10 साल की उम्र के बच्चों को ग्रॉसरी शॉपिंग में करें शामिल करना काफी अच्छा तरीका हो सकता है। उन्हें अलग-अलग चीजों के दाम दिखाएं, घर का बजट समझाएं और बताएं कि हर चीज तुरंत खरीदना जरूरी नहीं होता है।

एजुकेशनल ऐप और वर्चुअल बेंकिंग

आजकल कई एजुकेशनल ऐप और वर्चुअल बेंकिंग गेम्स भी उपलब्ध हैं, जिनकी मदद से बच्चे मजेदार तरीके से सेविंग्स और स्पेंडिंग के बारे में सीख सकते हैं।

डिले ग्रेटिफिकेशन सिखाना भी जरूरी

डॉ. सुरेश कुमार के मुताबिक, बच्चों को यह सिखाना जरूरी है कि हर चीज तुरंत नहीं मिलती। उदाहरण के लिए अगर बच्चा कोई खिलौना खरीदना चाहता है, तो उसे कुछ समय तक पैसे बचाने के लिए प्रेरित करें। इससे उनमें धैर्य और प्लानिंग की आदत डेवलेप होती है।

हालांकि, पैसों को कभी भी सजा या दबाव का माध्यम नहीं बनाना चाहिए। बच्चों को पॉजिटिव रिफोर्समेंट के जरिए सीख देना ज्यादा प्रभावी होता है।

माता-पिता की भूमिका सबसे अहम

बच्चे सबसे ज्यादा अपने माता-पिता को देखकर सीखते हैं। अगर घर में समझदारी से खर्च और बचत की आदत होगी, तो बच्चे भी वही अपनाएंगे। इसलिए पेरेंट्स को खुद भी फाइनेंशियल डिसप्लिन बनाए रखना चाहिए।

Disclaimer : डॉक्टर का मानना है कि बचपन से फाइनेंशियल लिटरेसी देने से बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है और फ्यूचर में वे आर्थिक रूप से ज्यादा जिम्मेदार बनते हैं। अगर आपने अबतक अपने बच्चों को खुद पर डिपेंट रखा है, तो आज से इस आदत को छोड़ें और उन्हें फाइनेंशियल लिटरेसी देना शुरू करें, ताकि वे आगे चलकर पैसों के मामले में आए उतार-चढ़ाव को अच्छे से हैंडल कर सके।

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