Don’t Miss Out on the Latest Updates.
Subscribe to Our Newsletter Today!
-
- हिंदी
हाल ही में हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि अत्यधिक वजन वाले (ओवरवेट) चार वर्ष के बच्चों में छह साल की उम्र तक उच्च रक्तचाप यानी हाई ब्लड प्रेशर होने का खतरा दोगुना हो जाता है। इससे भविष्य में अधिक वजन वाले बच्चों को हार्ट अटैक, स्ट्रोक का भी सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में बच्चों को चाइल्डहुड ओबेसिटी से बचाए रखने के लिए पेरेंट्स को खास सावधानी बरतने की जरूरत है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, बचपन का मोटापा (चाइल्डहुड ओबेसिटी) 21वीं सदी की सबसे गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। यह समस्या वैश्विक है और इसकी व्यापकता खतरनाक दर से बढ़ रही है। वर्ष 2016 में पांच साल से कम उम्र वाले करीब 41 मिलियन बच्चे ज्यादा वजन के पाए गए थे। यूरोपियन जर्नल ऑफ प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी में प्रकाशित इस अध्ययन में चार साल के 1,796 बच्चों में अतिरिक्त वजन और उच्च रक्तचाप के बीच के लिंक की जांच की गई। दो साल तक किए गए इस अध्ययन के बाद ही शोधकर्ता इस निष्कर्ष पर पहुंचे।
नवजात शिशु के लिए बेहद महत्वपूर्ण है 48 घंटे, रखें इन बातों का ध्यान
स्पेन के कार्लोस तृतीय हेल्थ इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता इनाकी गैलन का कहना है कि पेरेंट्स को पौष्टिक आहार देने के साथ ही अपने बच्चों के साथ शारीरिक तौर पर ज्यादा सक्रिय रहने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं को गर्भवती होने से पहले अतिरिक्त पाउंड को कम करना चाहिए। गर्भावस्था (प्रेग्नेंसी) के दौरान अतिरिक्त वजन बढ़ने से बचें और धूम्रपान का सेवन भी ना करें। ऐसा इसलिए जरूरी है, क्योंकि ये सभी बचपन के मोटापे यानी चाइल्डहुड ओबेसिटी को बढ़ाने वाले मुख्य कारक हैं।
यदि बच्चा ओवरवेट है, तो अधिक गतिविधि और डाइट में सुधार करने की जरूरत है। यदि जीवनशैली में बदलाव से भी मदद नहीं मिलती है, तो रक्तचाप या ब्लड प्रेशर को कम करने वाली दवाएं भी दी जा सकती हैं।
1 गर्भावस्था के दौरान मां को धूप सेकनी चाहिए। शिशु को कम से कम 6 माह तक स्तनपान अवश्य कराना चाहिए ।
2 गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक आहार लें, ताकि भविष्य में भी शिशु का स्वास्थ्य व शरीर ठीक रह सके।
3 विशेषज्ञों के अनुसार, छोटी उम्र से ही बच्चे को सक्रिय रखना चाहिए। उन्हें शारीरिक गतिविधियों में शामिल करें। सारा दिन टीवी, मोबाइल पर रहने, जंक फूड के अधिक सेवन से बच्चों में मोटापा बढ़ रहा है।
4 बच्चे को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खाने को दें। वो अपनी भूख एवं ऊर्जा की जरूरतों के अनुसार ही खाएं, तो उनके शरीर के लिए ठीक होता है। वजन बढ़ रहा है तो बच्चे को जबरदस्ती ना खिलाएं। भूख लगने पर ही खाने को दें।
समर केयर : बच्चों को बचाना है हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन से, तो अपनाएं ये टिप्स
5 सॉफ्ट ड्रिंक की बजाय खूब पानी ,ताजा जूस या नींबू पानी पीना सिखाएं।
6 हर दिन सुबह का नाश्ता जरूर खिलाएं। इससे लंच के समय उन्हें कम खाने की इच्छा होगी और वो अनावश्यक रूप से कैलोरी नहीं जमा कर पाएंगे।
7 बच्चों को रोज-रोज चॉकलेट, पोटैटो चिप्स और अन्य पैकेट बंद चीजों की बजाय ताजे फलों का सेवन करना सिखाएं, उन्हें बताएं इन्हें खाने से क्या फायदे होते हैं।
8 शुरुआती कुछ वर्षों में मोटापा को कंट्रोल कर आप अपने बच्चे को एक स्वस्थ एवं सुरक्षित भविष्य दे सकते हैं। मोटापा कम नहीं होने पर उन्हें आगे जाकर कई बीमारियों जैसे- डायबीटिज, हृदय रोग, ब्लड प्रेशर आदि हो सकता है।