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बच्चों में सांस लेने की समस्या कहीं कोरोना के लक्षण तो नहीं? जानें किन कारणों से होती है शिशुओं में ब्रीदिंग प्रॉब्लम

बच्चों में सांस लेने की परेशानी के कारण।

कोरोना काल में लोगों को सांस लेने में तकलीफ सबसे अधिक हो रही है। आपके बच्चों में ये समस्या नजर आए, तो इसे नजरअंदाज भूलकर भी ना करें। जानें, कोरोना के अलावा किन कारणों से शिशुओं या बच्चों में सांस लेने की समस्या हो सकती है।

Written by Anshumala |Updated : May 15, 2021 6:56 AM IST

Causes of Breathing Problem in Kids: कोरोना काल (Corona Era) में सबसे ज्यादा लोगों में सांस की तकलीफ (Breathing Problem) नजर आ रही है। ऐसे में आपके शिशु या बच्चे में सांस लेने में तकलीफ की समस्या नजर (Breathing Problem in baby) आए, तो उसे नजरअंदाज बिल्कुल भी ना करें। हालांकि, छोटे बच्चों में सर्दी-जुकाम से जमा हुए कफ या बलगम के कारण भी सांस लेने में तकलीफ होती है। यह भी जरूरी नहीं कि बच्चों को कोरोना होने पर ही सांस लेने में तकलीफ हो, इसके कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं। जानें, किन कारणों से छोटे बच्चों में सांस लेने में समस्या हो सकती है, कहीं ये किसी बीमारी का संकेत तो नहीं?

ब्रोन्कियोलाइटिस से सांस लेने में परेशानी (Bronchiolitis in Baby)

शरीर में मौजूद छोटी नली को ब्रॉन्किओल कहते हैं। यह सांस लेने वाली एक नली होती है। ब्रॉन्किओल में वायरल इंफेक्शन और सूजन होने से बच्चों में ब्रोन्कियोलाइटिस नाम की बीमारी हो जाती है। बच्चों में सांस लेने से संबंधित समस्या का एक मुक्य कारण है यह बीमारी। यदि आपको लगता है कि बच्चे या शिशु का दम फूल रहा है, तो इसे नजरअंदाज ना करें। डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।

ब्रोन्कियोलाइटिस के लक्षण (Symptoms of Bronchiolitis)

  • शिशु को सांस लेने में तकलीफ होना।
  • बच्चा तेज सांस लेने लगे।
  • बार-बार सर्दी-जुकाम से परेशान रहे।

ब्रोन्कियोलाइटिस का इलाज (Treatment of Bronchiolitis)

बच्चा में यह सांस से संबंधित समस्या का इलाज दवाओं जरिए संभव है। हालांकि, जब बच्चा ना खाए, ना पिए और ना ही सो पाए, तो इस स्थिति में उसे हॉस्पिटल में भर्ती करवाने की जरूरत भी पड़ जाती है और ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा जाता है। साथ ही इनहेलर भी दिया जाता है।

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बच्चों में सर्दी-जुकाम होने से सांस लेने में होती है समस्या

छोटे बच्चों को अधिकतर सर्दी, खांसी के कारण नाक बंद रहता है। छाती में बलगम जमा होने से भी सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। वे रात में चैन की नींद नहीं सो पाते (Causes of Breathing Problem in Kids) है, जिससे सांस लेना दूभर होने लगता है। दो वर्ष के बच्चों में सर्दी-जुकाम की समस्या होने से रेस्पिरेटरी में वायरल संक्रमण होने से यह समस्या होती है।

शिशु में सर्दी-जुकाम के लक्षण

  • बार-बार खांसी, सर्दी-जुकाम, नाक बहते रहना।
  • छाती में बलगम जमा होना, जिससे सांस लेने में परेशानी महसूस करना।

शिशुओं में सर्दी-जुकाम का इलाज

छोटे बच्चों को किसी भी तरह की दवाई खुद से ना दें। घरेलू उपचार आजमा सकते हैं। सर्दी-जुकाम खुद से 1 सप्ताह के अंदर ठीक हो जाता है। कफ से नाक बंद है, तो बच्चों को नेबुलाइजर लगाएं। नवजात शिशु को अधिक खांसी, छींक आए, तो डॉक्टर को दिखा दें। अधिक दिनों तक शिशु को सर्दी-जुकाम रहने से निमोनिया भी हो सकता है।

अस्थमा होने से भी होती है सांस की समस्या

यदि बच्चे को अस्थमा (Asthma in child) है, तो सांस लेने में समस्या हो सकती है। अस्थमा फेफड़ों का रोग है। इसमें सांस नली में सूजन होने और इसके सख्त होने से पीड़ित बच्चा या वयस्क सांस नहीं ले पाता है। कई बार इसमें बलगम भी अधिक बनता है। अस्थमा अटैक आना जानलेवा भी हो सकता है, ऐसे में बेहतर है कि आप डॉक्टर से जरूर दिखाएं।

बच्चों में अस्थमा के लक्षण

  • जब बच्चा सांस ले, तो उस दौरान घरघराहट सी आवाज आना।

बच्चों में सांस लेने में तकलीफ को दूर करने के उपाय

  • सिगरेट के धुएं से बचाएं। घर में किसी को भी स्मोकिंग ना करने दें, खासकर बच्चे के करीब।
  • घर में धूल-गंदगी ना जमा होने दे। बच्चे के कमरे की सफाई करते रहें।
  • बच्चे का बेडशीट बदलते रहें। उसके कपड़ों, बेडशीट आदि को गर्म पानी से साफ करें।
  • एसी चलाते हैं, तो उसके फिल्टर को समय-समय पर बदलना भी जरूरी है।
  • घर में पालतू जानवर है, तो बच्चों को सर्दी-जुकाम, अस्थमा, ब्रोन्कियोलाइटिस आदि समस्या में उनके साथ ना खेलने दें। यदि वह थोड़ी देर भी खेलता है, तो उसकी सांसों पर नजर रखें। खांसने या सांस लेने में समस्या दिखे, तो उसे एलर्जी भी हो सकती है।

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