Don’t Miss Out on the Latest Updates.
Subscribe to Our Newsletter Today!
-
- हिंदी
Thyroid in kids symptoms causes and management tips : थायराइड को आमतौर पर वयस्कों की बीमारी माना जाता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि छोटे बच्चों और यहां तक कि नवजात शिशुओं को भी थायराइड की समस्या हो सकती है। कई बार माता-पिता यह सोचकर निश्चित रहते हैं कि बच्चा बहुत छोटा है, उसे ऐसी बीमारी कैसे हो सकती है, जबकि मेडिकल साइंस के अनुसार यह पूरी तरह संभव है।
थायराइड के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिए साल 2026 में जनवरी का महीना थायराइड अवेयरनेस मंथ के तौर पर मनाया जा रहा है। इस खास महीने में द हेल्थ साइट एक स्पेशल सीरीज चला रहा है। सीरीज के एपिसोड 2 में हम जानेंगे बच्चों को थायराइड क्यों होता है और बच्चों को थायराइड से बचाने के लिए पेरेंट्स को क्या करना चाहिए।इस विषय पर अधिक जानकारी दे रहे हैं डॉ. दीपक शर्मा, निदेशक - पीडियाट्रिक्स और नियोनेटोलॉजी, यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल फरीदाबाद सेक्टर- 88 (Dr. Deepak Sharma, Director - Paediatric& Neonatology, Yatharth Super Speciality Hospital Faridabad Sector -88)।
बाल रोग विशेषज्ञ बताते हैं कि हां, छोटे बच्चों को भी थायराइड हो सकता है, यहां तक कि जन्म के समय से ही कुछ बच्चों में थायराइड की समस्या देखी जाती है। जन्मजात थायराइड को लेकर जन्म लेने वाले बच्चों की स्थिति को Congenital Hypothyroidism (जन्मजात हाइपोथायराइडिज्म) कहा जाता है। इस स्थिति में बच्चे की थायराइड ग्रंथि पूरी तरह विकसित नहीं होती है।
कुछ मामलों में जन्मजात हाइपोथायरायडिज्ममें बच्चों में थायराइड ग्रंथि मौजूद ही नहीं होती है। जिसके कारण बच्चों का शरीर पर्याप्त मात्रा में हार्मोन नहीं बना पाता है। आंकड़ों पर नजर डालते हुए डॉ. बताते हैं कि जन्मजात थायराइड की बीमारी हर 2000 से 3000 नवजात शिशुओं में से 1 में पाई जा सकती है।
डॉक्टर बताते हैं कि अक्सर जन्म के समय बच्चों में थायराइड के स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, यही वजह है कि यह बीमारी खतरनाक साबित हो सकती है। नवजात शिशुओं में थायराइड के सामान्य लक्षणों में शामिल हैः
बहुत ज्यादा सुस्ती
दूध पीने में परेशानी
कब्ज
लंबे समय तक पीलिया होना
सिर का आकार बड़ा होना
चाइल्ड केयर एक्सपर्ट का कहना है कि भारत जैसे विकासशील देश में आज भी बच्चों में थायराइड टेस्ट नहीं किया जाता है। लेकिन बच्चों में थायराइड टेस्ट बहुत ज्यादा जरूरी है। बच्चों में थायराइड की कमी अगर समय पर पकड़ी न जाए, तो इससे बच्चे के दिमागी विकास पर स्थायी असर पड़ सकता है। इसलिए जन्म के 48 से 72 घंटे के भीतर Newborn Screening Test किया जाता है। इसमें TSH और T4 हार्मोन की जांच होती है। जन्म के तुरंत बाद ये टेस्ट करवाने से बच्चे के भविष्य को सुरक्षित बना सकता है। ये टेस्ट बच्चों को मानसिक विकलांगता से भी बचा सकता है।
जैसे-जैसे बच्चों की उम्र बढ़ती है उनमें थायराइड के लक्षण बदल सकते हैं। सामान्य तौर पर बच्चों में थायराइड के लक्षण नीचे बताए गए हैंः
डॉ. दीपक के अनुसार, अगर थायराइड की पहचान जल्दी हो जाए और इलाज सही समय पर शुरू कर दिया जाए, तो बच्चा बिल्कुल सामान्य बच्चों की तरह बढ़ सकता है। इसलिए हर पेरेंट्स को जन्म के बाद अपने बच्चे का थायराइड टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। जन्म के 48 घंटे बाद स्क्रीनिंग में बच्चे में थायराइड की परेशानी देखी जाती है, तो तुरंत इसका इलाज करवाएं और दवाओं का सेवन भी करें। बिना डॉक्टर की सलाह के दवा का सेवन बिल्कुल बंद न करें। थायराइड से जूझ रहे बच्चों के पेरेंट्स का एक छोटा कदम बच्चे को उज्जवल भविष्य दे सकता है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।