नवजात शिशु को ब्रेस्टफीड कराते वक्त अक्सर 90 फीसदी मां करती हैं ये गलतियां, कहीं आप तो नहीं कर रही ये गलतियां  

स्तनपान ही नवजात शिशु के लिए भोजन का एकमात्र स्रोत होता है लेकिन आजकल की नई माताओं में स्तनपान कराते हुए कई समस्याएं सामने आती हैं जिनके बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं। 

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Written By: Jitendra Gupta | Updated : September 5, 2021 9:06 PM IST

किसी भी स्त्री के लिए मां बनने का सुख जीवन का सबसे अलग अनुभव होता है। एक स्त्री अपने जीवन में इस सुख का बेसब्री से इंतजार करती है की जल्द ही वो दिन आए कि एक नया मेहमान उसे मां कह कर पुकारे और उसकी किलकारियां पूरे घर में गूंजे। शिशु के जन्म के साथ ही उसके लिए स्तनपान बहुत जरूरी होता है। स्तनपान ही नवजात शिशु के लिए भोजन का एकमात्र स्रोत होता है लेकिन आजकल की नई माताओं में स्तनपान कराते हुए कई समस्याएं सामने आती हैं जिनके बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं कौन सी हैं ये गलतियां।

स्तनपान कराने वाली महिलाओं को इन गलतियों से बचना चाहिए

जन्म के बाद कम से कम 6 महीने के लिए शिशु को स्तनपान कराना जरूरी होता है। नई माताओं को गर्भावस्था के बादबहुत कुछ सीखने की जरूरत होती है। स्तनपान बहुत आसान लग सकता है लेकिन यह एक नई मां की सबसे बड़ी चुनौतियों और चिंताओं में से एक है। कुछ महिलाएं अनुभव होने के बाद भी अक्सर गलतियां करती हैं, जिसका अक्सर शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं पाती।

स्तनपान में होने वाले दर्द को ना समझे सामान्य

शुरू में एक महिला को स्तनपान कराने में असुविधा हो सकती है लेकिन लंबे समय तक दर्द को सामान्य नहीं माना जाना चाहिए। अगर स्तनपान के कारण दर्द लंबे समय तक बना रहता है, तो यह महत्वपूर्ण है कि आप डॉक्टर से मिलें। दर्द के कारण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं।

स्तनपान के लिए ना बनाएं शेड्यूल

अक्सर नई मां कुछ गलतियां करती हैं, जिसमें से एक गलती स्तनपान का शेड्यूल बनाने की है। यह कभी-कभी आपके शिशु को भूखा रख सकता है। आपको यह समझना चाहिए कि भूख लगने पर बच्चे उसे कंट्रोलनहीं कर पाता और खूब रोता है।  नई मां को इस बात का इंतजार नहीं करना चाहिए कि बच्चा रो कर कहे मुझे दूध चाहिए। मां को हमेशा बच्चे को लक्षणों को देखकर समझ जाना चाहिए और स्तनपान कराना चाहिए।

शिशु को बोतल से दूध ना पिलाएं

अक्सर कई महिलाएं कुछ कारणों से शिशु को बोतल से दूध पिलाती है। बोतल से दूध पिलाना भले ही आराम का साधन हो लेकिन ये बच्चे के लिए समस्याएं पैदा कर सकता है। यह महत्वपूर्ण है कि आप स्तनपान कराने से पहले बच्चों को बोतल से दूध न पिलाएं। शिशुओं को बोतल से दूध पीना आसान लगता है, वे बाद में स्तनपान करने में दिकक्त देते हैं। अगर किसी कारणवश आपको बोतल से दूध पिलाना शुरू करना पड़े, तो आप को कम से कम जन्म से 6-8 सप्ताह तक बच्चे को स्तनपान जरूर कराएं।

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