
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Medically Verified By: Dr Shorouq Motwani
Grandparents with kids (Image Crdiet : ChatGPT)
'कनाडा आ गए जूठे बर्तन साफ करने?' जब एक शख्स ने दादा-दादी पर ऐसा तंज कसा, तो उन्होंने गुस्सा नहीं किया। बल्कि ऐसा जवाब दिया, जिसने रिश्तों की अहमियत और परिवार के प्रति जिम्मेदारी का असली मतलब समझा दिया। उनका यह जवाब अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। दरअसल, इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी तेजी से वायरल हो रहा है। यह वीडियो इंस्टाग्राम पर विकास कौशल ने शेयर की है, जिसमें उनके पिता और माता लोगों के दिए तंज को बहुत ही खूबसूरती से जवाब दे रहे हैं, जिसे हर किसी को समझना जरूरी है। आइए जानते हैं क्या दी उन्होंने पेरेंटिंग को लेकर सीख?
इंस्टाग्राम पर विकास कौशल के पिता संत कुमार शर्मा ने कनाडा में झेली एक कड़वी सच्चाई का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वहां एक शख्स ने तंज कसते हुए कहा, 'कनाडा आ गए... अब जूठे बर्तन साफ करने, बच्चों को पार्क घुमाने और उन्हें स्कूल छोड़ने-लाने का काम करने।' तब उन्होंने उन्हें बहुत ही अच्छे से जवाब दिया कि 'ये सब काम तो आप भी करते होंगे' तो सामने वाले शख्स ने कहा, 'अरे ना जी, हमने तो अपने बच्चों से साफ कह दिया है, तुम्हे पालकर बड़ा कर दिया, तुम्हारे बच्चों को पालने का हमने ठेका नहीं ले रखा है। ये जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ तुम्हारी है।' इस घटना को संत शर्मा ने सोशल मीडिया पर रखी और एक कड़वी सच्चाई लोगों के साथ शेयर की, साथ ही पेरेंटिंग को लेकर सीख भी दी।
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उन्होंने कहा, कुछ लोगों को बर्तन दिखता है, लेकिन हमें सिर्फ अपने परिवार दिखता है।' आगे कहा, 'भाई हम कनाडा किसी के सोशल व्यूज या फिर किसी का दिल जितने के लिए नहीं आए हैं, हम कनाडा इसलिए आए हैं, ताकि बच्चों को हम ज्यादा से ज्यादा आराम दे सकें। अगर हम बच्चों को 2 से 3 घंटे के लिए पार्क लेकर भी जाते हैं, तो ये हमारे लिए टॉनिक का काम करते हैं। पीछे से बच्चे घर का बहुत सारा काम संभालते भी हैं, ये काम हम इंडिया में भी करते हैं, तो कनाडा में करना कौन से शर्म की बात है।' इसके साथ ही उन्होंने सभी सीनियर सिटीजन से गुजारिश की कि अगर आपको किसी भी तरह का हेल्थ इशू नहीं है, तो अपने बच्चों की मदद करें और ज्यादा से ज्यादा कंफर्ट देने की कोशिश करें। साथ ही जो लोग अपने बच्चों का सपोर्ट कर रहे हैं, उन्हें नेगेटिव सोच ना दें।
आपको जानकर हैरानी होगी कि बच्चों की परवरिश में दादा-दादी का साथ सिर्फ माता-पिता का बोझ कम नहीं करता, बल्कि यह बच्चों के भावनात्मक, सामाजिक और मानसिक विकास में भी अहम भूमिका निभाता है। इस विषय को लेकर नारायण हेल्थ SRCC चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल के पेडियाट्रिक्स साइकाइट्रिस्ट डॉ. शोरुक मोटवानी ने कहा कि दादा-दादी के साथ बच्चे अगर समय बिताए, तो उनका मानसिक विकास काफी अच्छा होता है। आइए जानते हैं इस बारे में विस्तार से-
दादा-दादी बच्चों को बिना किसी शर्त के प्यार, अपनापन और सुरक्षा का एहसास देते हैं। उनके साथ समय बिताने से बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है और वे तनाव, अकेलेपन या चिंता जैसी भावनाओं से बेहतर तरीके से निपटना सीखते हैं। कई शोध बताते हैं कि जिन बच्चों का अपने दादा-दादी से मजबूत रिश्ता होता है, उनमें भावनात्मक समस्याएं अपेक्षाकृत कम देखने को मिलती हैं।
दादा-दादी अक्सर बच्चों के साथ परिवार की परंपराओं, संस्कृति और जीवन से जुड़े एक्सपीरियंश शेयर करते हैं। साथ ही कुछ कहानियां सुनाते रहते हैं, जिससे बच्चों को सीख और जीवन के अनुभवों को सीखने का मौका मिलता है। इसके साथ ही दादा-दादी बच्चों को बड़ों का सम्मान करना, धैर्य रखना, जिम्मेदारी निभाना और परिवार की अहमियत समझना सिखाते हैं। 
जब दादा-दादी बच्चों से बातें करते हैं, कहानियां सुनाते हैं या उनके सवालों का जवाब देते हैं, तो इससे बच्चों की भाषा, शब्दावली और सोचने-समझने की क्षमता विकसित होती है। अलग-अलग पीढ़ियों के साथ बातचीत करने से बच्चों का नजरिया भी व्यापक होता है और उनकी कम्युनिकेशन स्किल्स बेहतर होती हैं।
जब दादा-दादी बच्चों की देखभाल में सहयोग करते हैं, तो माता-पिता पर मानसिक और शारीरिक दबाव कम होता है। इसका फायदा बच्चों को भी मिलता है, क्योंकि उन्हें परिवार के कई सदस्यों का प्यार, समय और मार्गदर्शन मिलता है। ऐसे माहौल में बच्चे खुद को अधिक सुरक्षित और खुश महसूस करते हैं।
Disclaimer : यह लेख सामान्य जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। हर बच्चे का विकास, पारिवारिक माहौल और अनुभव अलग-अलग हो सकते हैं। दादा-दादी की भूमिका बच्चों के लिए फायदेमंद हो सकती है, लेकिन उनकी परवरिश की जिम्मेदारी और निर्णय प्रत्येक परिवार की परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं।