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Written By: Yogita Yadav | Published : August 23, 2019 5:43 PM IST
You have twins who are connected to each other by birth. So, if you want their names to have a connection forever too then try picking names with the same meanings.
अगर आप नई-नई मां बनी है, वह भी जुड़वा बच्चों की, तो निश्चित ही बहुत घबरायी हुई होंगी। जुड़वा बच्चों की परवरिश (Twins care tips) थोड़ी सी मुश्किल होती है। कई बार दोनों बच्चों की आदतें, सोने और जागने का टाइम भी बिल्कुल अलग-अलग होता है। ऐसे में परेशान न हों, बस ये छोटी-छोटी बातें फॉलो (Twins care tips) करें, तो काई परेशानी नहीं होगी।
मैटरनिटी बैग बनाते समय इस बात का खास ध्यान रखें कि आप जुड़वां बच्चों (Twins care tips) की मां बनने वाली हैं। इसलिए मैटरनिटी बैग में बच्चे से संबंधित सभी चीजें डबल डालें। कपड़े, बेबी सूट आदि डालते समय रंग का विशेष ध्यान रखें। अगर दोनों ही बच्चों के कपड़े एक से होंगे, तो आप खुद की कऩफयूज हो जाएंगी कि किसका कपड़ा कौन सा है। दोनों बच्चों के सामान पर उनके नाम का अलग-अलग लेबल लगाएं। ताकि एक बच्चें का सामान दूसरे बच्चे के साथ बदल न जाए। अपनी सहायिका अथवा परिवार के अन्य सदस्यों को भी इस बारे में बताकर रखें।
जुड़वा बच्चों के खाने-पीने, सोने का ख्याल रखना थोड़ा मुश्किल जरूर है। पर अगर एक रूटीन बना लें तो इसमें सुविधा होगी। दो नवजात शिशुओं को एक ही समय में मैनेज करने के लिए सबसे बेहतर तरीका है कि आप उनके लिए एक रुटीन बना लें। अगर आप बिना रुके लगातार बच्चों के काम में लगे रहेंगे तो इससे आप तनाव में आ सकती हैं और थकने के बाद आप ठीक से बच्चों का देखभाल भी नहीं कर पाएंगी।
छोटे बच्चों को नहलाना एक बहुत जिम्मेदारी पूर्ण काम है। इसे अकेले कभी भी न करें। बच्चों की स्वच्छता के लिए यह जरूरी है कि उन्हें नहलाया जाए। इसके लिए किसी की मदद लें। फिर चाहें वह घरेलू सहायिका हो, परिवार का कोई सदस्य। सबसे बेहतर है इस काम में पार्टनर की मदद लेना। इससे उन्हें न केवल बच्चों की जिम्मेदारियों के बारे में समझ आएंगी, बल्कि बॉन्डिंग भी बढ़ेगी। बच्चों को नहलाते वक्त हैंड शॉवर का इस्तेमाल करें। जैसे कांच के बर्तन धोते हैं, ठीक वैसे ही बहुत संभलकर बच्चों को नहलाएं। बेहतर होगा कि जिस जगह पर बच्चों को नहलाना है वहां नर्म टॉवल बिछा लें।
डॉ नुपुर गुप्ता कहती हैं प्रकृति ने ऐसा बहुत कुछ दिया है, जो हमें चिंतामुक्त करता है। जुड़वां बच्चें होने पर यह कतई न सोचें क उनके लिए मदर फीड पूरा हो भी पाएगा कि नहीं। जब बच्चे जुड़वां होते हैं तो मां का दूध भी उसी मात्रा में आता है। बच्चों की एक्टिविटी से यह जानने की कोशिश करें कि किसे पहले भूख लगती है। उसी क्रम में बच्चों को बारी-बारी स्तनपान करवाएं। कभी-कभी मां किसी एक पॉजीशन में कम्फर्टेबल फील करती है, तो उसी तरफ से बच्चों को स्तनपान करवाती रहती हैं। मां की सेहत के लिए जरूरी है कि दोनों ही स्तनों से बराबर फीड करवाया जाए।
बच्चे हर दिन बड़े होते हैं और हर दिन कोई नई एक्टिविटी सीखते हैं। जुड़वां बच्चों में कई बार सीखने का क्रम अलग-अलग होता है। इससे बिल्कुल न घबराएं। अगर एक बच्चा जल्दी बैठना या चलना सीख जाएं, तो यह जरूरी नहीं कि दूसरा बच्चे को भी उसी अवधि में सब कुछ सीखना है।