
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : February 24, 2025 4:36 PM IST
Benefits of co sleeping with child: बच्चे को अपने माता-पिता के पास सोने की आदत डालने की जरूरत नहीं होती है, क्योंकि वह जन्म से ही उनके पास सो रहा होता है। लेकिन उनसे अलग सोने की आदत उन्हें डालनी पड़ती है और यह आदत उन्हें धीरे-धीरे ही पड़ती है। बच्चे का पेरेंट्स के पास सोने की आदत को को-स्लीपिंग (Co-Sleeping) कहा जाता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें माता-पिता और बच्चा एक ही बिस्तर या कमरे में सोते हैं। यह विशेष रूप से नवजात और छोटे बच्चों के लिए किया जाता है, ताकि वे मां व पिता की नजदीकी महसूस कर सकें और सुरक्षित रहें। इससे बच्चे को रात में बार-बार जागने पर तुरंत सहारा मिल सकता है और उसे शांति मिलती है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार, जैसे-जैसे बच्चे की उम्र बढ़ती है, उसे अपनी अलग नींद की जगह पर सोने की आदत डालनी चाहिए, ताकि बच्चे का आत्मविश्वास बढ़े और उसकी स्वतंत्रता विकसित हो सके। तो चलिए जानते हैं, को-स्लीपिंग की सही उम्र और बच्चे को अलग सुलाने के लाभों के बारे में।
आमतौर पर विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को 2 से 3 साल के बाद को-स्लीपिंग से अलग करना अच्छा होता है। इस उम्र तक, बच्चा स्वच्छंद रूप से सोने की आदतें विकसित कर सकता है और वह माता-पिता से अलग सोने के लिए मानसिक व शारीरिक रूप से तैयार होता है। इससे बच्चे में आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास का विकास होता है।
मां-बाप का बच्चे को अपनी छाया से थोड़ा अलग करना बच्चे में स्वतंत्रता और आत्मविश्वास का भाव लाता है। जब बच्चे को अपनी अलग जगह पर सोने की आदत डाल दी जाती है, तो वह स्वच्छंद और आत्मनिर्भर बनता है। यह उसे अपनी जगह पर सोने का आत्मविश्वास देता है और उसे समझ में आता है कि वह अकेले भी सुरक्षित है।
जब बच्चे और माता-पिता अलग-अलग कमरे में सोते हैं, तो दोनों की नींद में कोई व्यवधान नहीं होता। इससे बच्चों को गहरी और गुणवत्ता युक्त नींद मिलती है, जो उनकी शारीरिक और मानसिक वृद्धि के लिए जरूरी है। यह उन्हें ऊर्जा देता है, जिससे वे दिनभर सक्रिय और खुश रहते हैं, और उनका समग्र विकास बेहतर होता है।
बच्चों के लिए अलग कमरे में सोने से, उनका शारीरिक विकास बेहतर होता है। इससे बच्चों में रेस्पिरेटरी प्रॉब्लम्स और स्लीप डिसऑर्डर का खतरा कम होता है। इसके अलावा, बच्चों को उनके खुद के कमरे में सोने से, उनका इम्यून सिस्टम भी मजबूत होता है, क्योंकि वे अधिक स्वतंत्रता से सांस लेते हैं।
जब बच्चा अलग कमरे में सोता है, तो माता-पिता के पास अपने निजी समय का भी अवसर होता है। यह उनके संबंधों को मजबूत करने में मदद करता है और उन्हें एक-दूसरे के साथ समय बिताने का मौका मिलता है। समय से अलग कमरे में सुलाने से बच्चों का आत्मनिर्भरता, मानसिक विकास और शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है, जो उसके संपूर्ण विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।