
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Medically Verified By: Dr. Nehal Shah
Sugar Cravings
नमक वाली चीजों की तुलना में बच्चे चॉकलेट, कैंडी, कोल्ड ड्रिंक्स, फ्लेवर्ड योगर्ट और पैकेज्ड स्नैक्स जैसी चीजें खाने की ज्यादा जिद्द करते हैं। इसी कारण से अक्सर पेरेंट्स इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि बच्चों में बढ़ते शुगर क्रेविंग को लेकर परेशान रहते हैं। इस विषय को जानने के लिए हमने मुंबई स्थित नारायणा हेल्थ SRCC चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल की कंसल्टेंट पीडियाट्रिक मेडिसिन, डॉ. नेहल शाह से बातचीत की है। डॉ. नेहल का कहना है कि बच्चों में मीठा खाने की इच्छा के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इसे जानने के लिए आपको विस्तार से समझने की जरूरत है। आइए समझते हैं-
डॉक्टर कहते हैं कि बच्चों के लिए बनाए जाने वाले कई पैकेज्ड फूड्स में छिपी हुई चीनी होती है। कम उम्र से ही ऐसे खाद्य पदार्थ खाने पर बच्चों के टेस्ट बर्ड्स मीठे स्वाद के आदी हो जाते हैं। बार-बार मीठा खाने से दिमाग के रिवॉर्ड सिस्टम को भी उत्तेजना मिलती है, जिससे बच्चों का मन बार-बार मीठा खाने का करता है।
Sugar Cravings
इसके अलावा अगर बच्चे भोजन छोड़ देते हैं या उनके भोजन में पर्याप्त प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट्स नहीं होते, तो ब्लड शुगर तेजी से ऊपर-नीचे हो सकता है। इससे भूख बढ़ती है और शरीर तुरंत ऊर्जा देने वाले खाद्य पदार्थों, खासकर मीठी चीजों, की मांग करता है।
कुछ रिसर्च से पता चलता है कि पर्याप्त नींद न लेने से भूख कंट्रोल करने वाले हार्मोन प्रभावित हो सकते हैं। इसके कारण बच्चों में अधिक कैलोरी और चीनी वाले खाद्य पदार्थ खाने की इच्छा बढ़ सकती है। इसके अलावा ज्यादा स्क्रीन टाइम और कम फिजिकल एक्टिविटी भी अनहेल्दी स्नैकिंग को बढ़ावा दे सकती है।
कई बच्चे मिठाइयों को खुशी, आराम या इनाम से जोड़कर देखते हैं। समय के साथ यह भावनात्मक संबंध इतना मजबूत हो सकता है कि उन्हें भूख न होने पर भी मीठा खाने की इच्छा होने लगे।
अगर आप चाहते हैं कि आपके बच्चों की शुगर क्रेविंग्स कंट्रोल में रहे, तो आप कुछ बातों का ध्यान रख सकते हैं, जैसे-
अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (AAP) के मुताबिक, औसतन बच्चों के दैनिक आहार का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा अतिरिक्त चीनी से आता है और इसका बड़ा हिस्सा मीठे ड्रिंक पदार्थों से मिलता है। AAP सलाह देती है कि 2 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों में प्रतिदिन 25 ग्राम (लगभग 6 चम्मच) से कम Added Sugar का सेवन होना चाहिए।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी बच्चों और वयस्कों में फ्री शुगर का सेवन कुल दैनिक कैलोरी के 10 प्रतिशत से कम रखने की सलाह देता है। WHO का कहना है कि इसे 5 प्रतिशत से कम रखने पर अधिक फायदे मिल सकते हैं।
Disclaimer : ध्यान रखें कि बच्चों को अगर आप काफी ज्यादा मीठी चीजें खिलाते हैं, तो उनके अंदर उसी तरह का टेस्ट बर्ड डेवलेप होगा। ऐसे में कोशिश करें कि बच्चों को संतुलित आहार दें। ताकि उन्हें शुगर क्रेविंग्स कम हो।