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किस उम्र में देना चाहिए बच्चों के हाथ में स्मार्ट फोन?

आज हर माता-पिता को यह तय करना होगा कि उनके बच्चो को स्मार्टफोन देने की सही उम्र क्या होनी चाहिए।

Written by Editorial Team |Updated : May 30, 2018 6:06 PM IST

आपके बच्चे को स्मार्टफोन के रूप में आप उन्हें एक शक्तिशाली कम्युनिकेशन टूल देते हैं। टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल दिन-ब-दिन आसान होता जा रहा है औरअब 2-3 साल की उम्र के बच्चे भी उनका इस्तेमाल कर सकते हैं। फोन का इस्तेमाल एडिक्शन या लत में तब्दील हो जाता है इसलिए आज 6 साल के छोटे बच्चे से लेकर बुजुर्गों तक अपने लिए पर्सनल फोन चाहते हैं। यही वजह है कि आज पैरेंट्स की सबसे बड़ीचिंता यही है कि वे अपने बच्चे को स्मार्टफोन कब दें और उनपर किस हद तक नज़र रखी जाए। फोन के अंदर एक पूरी दुनिया बसती है जिसमें अच्छे-बुरे हर प्रकार के विचार प्रसारित होते हैं। स्टडीज में मोटापे या ओबेसिटी का एक बड़ा कारण टीवी देखने की आदत को भी बताया जाता है और ऐसे में बच्चे के हाथ में स्मार्टफोन देना भी ख़तरनाक हो सकता है। आपके बच्चे वीडियो, टीवी शो और गेम खेलने के लिए घंटों फोन से चिपके रहेंगे और ऐसे में बाहरी दुनिया से उनका जुड़ाव कम हो जाएगा। शारीरिक कसरत और खेल भी बंद हो जाएंगे।

आप अपने बच्चे को हमेशा स्मार्टफोन से दूर नहीं रख सकते लेकिन एक उम्र निर्धारित करना होगा जब आप अपने बच्चे को स्मार्टफोन दे और वह जिम्मेदारी से उसका इस्तेमाल कर सके। इसी बारे में कुछ टिप्स दे रही हैं चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट डॉ. शची दलवी और बता रही हैं कि आखिर कब देना चाहिए बच्चों के हाथ में स्मार्टफोन।

• 14 साल की उम्र पर्सनल स्मार्टफोन इस्तेमाल करने की अच्छी है। इस उम्र में टीनएज की शुरुआत होती है और उसमें विद्रोही व्यवहार भी डेवलप होने लगता है। जिसे आज़ादी और पर्सनल स्पेस की चाहत होती है। इस वक्त पर्सनल फोन की मांग कर सकते हैं वो। माता पिता अपने बच्चे से वादा कर सकते हैं कि 13 की उम्र के बाद उनके व्यवहार को ध्यान में रखकर 14 साल का होन पर उन्हें एक स्मार्टफोन देंगे। इसी तरह आप उनकी पढ़ाई और रिजल्ट्स को भी आधार बना सकते हैं। बच्चे को स्मार्टफोन देते समय उसे फोन के सही इस्तेमाल से जुड़ी बातें समझाएं।

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• आपका बच्चा कितनी देर ऑनलाइन रहता है। किस तरह के पिक्चर्स या वीडियोज देखता है या कौन-से गेम खेलता है इस तरफ ज़रूर ध्यान दें। आजकल टीनएजर और स्कूल जानेवाले बच्चे जो गेम्स खेलते हैं उनमें से ज्यादातर में हिंसा दर्शायी जाती है। हिंसक खेलों को खेलना आपके बच्चे को गुस्सैल और हिंसक बना सकते हैं।

• इस उम्र में यह काफी मुश्किल होता है लेकिन इस बात का ध्यान रखिए कि आपका बच्चा कितनी देर स्क्रीन के सामने रहता है या फोन पर कितनी देर तक खेलता है। डिनर या सोने से पहले एक समय निश्चित करें जब परिवार का कोई सदस्य फोन का इस्तेमाल न करे।

• इस तरफ भी ध्यान दें कि आपका बच्चा फोन के बाहर की दुनिया की तरफ भी पूरा समय दे। जैसे-किताबें पढ़ना, खेलना, दोस्तों और परिवार के साथ घूमना आदि से भी उसका जुड़ाव बना रहे। आप खुद भी इन नियमों का पालन कर अपने बच्चे के लिए प्रेरणा का स्रोत बने।

• डॉ. दलवी के अनुसार, 14 साल एक आदर्श उम्र है। हर बच्चा अलग होता है और माता-पिता के तौर पर आपको यह पता लगाना होगा कि आपका बच्चा कितना ज़िम्मेदार है। अपने बच्चे के साथ एक दोस्ताना और विश्वासभरा रिश्ता बनाएं। एक अच्छी समझ से आपके लिए आपके बच्चे को समझाना आसान होगा कि आप उनपर विश्वास करते हैं लेकिन वर्चुअल वर्ल्ड के खतरों से आप अपने बच्चे को बचाना भी चाहते हैं।

• अगर आप अपने छोटे बच्चे को फोन केवल इसलिए दे रहे हैं ताकि वह आपसे आसानी से सम्पर्क कर सके। तो उसे स्मार्ट फोन देने की बजाय साधारण फोन दीजिए।

आज के समय आपको अपने बच्चे को स्मार्टफोन देना ही पड़ेगा लेकिन स्मार्टफोन के इस्तेमाल को सुरक्षित, अच्छा और पॉजटिव बनाना एक हेल्दी रिलेशनशिप और अच्छी बातचीत से ही संभव होगा।

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अनुवादक -Sadhna Tiwari

चित्र स्रोत- Shutterstock.

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