
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : September 25, 2019 1:36 PM IST
गणेश एक ऐसे देवता हैं जिन्हें छोटे बच्चे बहुत पसंद करते हैं। मुंबई में गणेशोत्व के दौरान बचपन में हम भी अपने दोस्तों और भाई-बहनों के साथ त्योहार की तैयारी में मदद करते थे। साथ ही जितने दिन गणपति हमारी बिल्डिंग में रहते हम उनके आसन के आसपास ही घूमा-फिरा करते। मेरे ख्याल से गणपति से जुड़ी कहानियों पर भी अगर ध्यान दिया जाए तो वो बच्चों को अच्छे संस्कार देने में काफी मदद कर सकती हैं।
जी हां, ज़रा सोच कर देखिए श्रीगणेश से जुड़ी उन किवंतियों के बारे में जो हम बार-बार दोहराते हैं। इन कहानियों में सेहत, परिवार और समाज के प्रति हमारे रवैये के बारे में समझने में मदद करते हैं।
श्रीगणेश की कहानियों से हम सीख सकते हैं ये बातें-
1. अपनी ज़िम्मेदारी सही तरीके से निभाएं-
श्री गणेश को मां पार्वती ने अपने कक्ष के दरवाज़े पर पहरेदारी करने के लिए कहा और जब उनके पिता आए तो श्रीगणेश ने उन्हें भी अंदर जाने से रोक दिया। इससे सीख मिलती है कि आपको जो ज़िम्मेदारी दी गयी है , उसे निडर होकर और पूरी ईमानदारी से पूरा करना चाहिए।
इसी तरह एक औऱ कहानी है जहां वेद-व्यास ने महाभारत के कहानी लगातार सुनायी और श्री गणेश लगातार बैठ कर लिखते रहे। यहां तक कि जब उनकी लेखनी टूट गयी तो उन्होनें अपने दांत के टुकड़े से लिखने का काम लिया। इससे यह सीख मिलती है कि लगन और अनुशासन के साथ अपना काम पूरा करना चाहिए।
2. माता-पिता और परिवार का करें सम्मान-
आपने पृथ्वी की परिक्रमा वाली कहानी तो अपने बच्चों को सुनायी ही होगी, है ना। कार्तिकेय और श्री गणेश में पृथ्वी की परिक्रमा जल्द से जल्द पूर्ण करने की स्पर्धा हुई तो श्रीगणेश ने अपने माता-पिता की परिक्रमा कर उन्हें ही अपना संसार बताया। इससे बच्चों को परिवार और माता-पिता की अहमियत समझाने में मदद होती है।
3. सबके साथ मिलकर रहें-
किसी को छोटा और खुद को बड़ा ना समझो। यह एक ऐसी सीख है जो गणेश जी से ली जा सकती है। उन्होंने अपनी सवारी मूषक को चुना। एक चूहा जो आकार में छोटा, गति में धीमा और दुर्बल से प्रतीत होता है। लेकिन वही चूहा अपने नुकीले दांतों से बड़े से बड़ा जाल काट सकता है और बड़ी इमारतों की बुनियाद भी हिला सकता है। इसका अर्थ यही है कि दुनिया में मौजूद हर चीज़ की अपनी उपयोगिता है। इसे अगर हम अपने समाज से जोड़कर देखें तो सीधे-सीधे सीख मिलती है कि बच्चों को अमीर-गरीब, समझदार-बुद्धू या सुंदर-मोटे-पतले जैसे शब्दों की परवाह नहीं करनी चाहिए और आपस में मिलकर रहना चाहिए।