
प्रिया मिश्रा
प्रिया को पिछले 4 सालों से हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर लिखने का अनुभव है। इन्हें हेल्थ और ... Read More
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6-12 Month Baby Diet Plan: बच्चे के जन्म के बाद से ही माता-पिता उसके खानपान को लेकर काफी चिंतित रहते हैं। हर पेरेंट में मन में हमेशा यह सवाल रहता है कि बच्चे को ऐसा क्या खिलाएं-पिलाएं, जिससे उसका शारीरिक और मानसिक विकास हो। जब शिशु पैदा होता है, तो मां का दूध ही उसके लिए सबसे पहला संपूर्ण आहार होता है। फिर जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, माता-पिता उसके आहार में सॉलिड फूड्स शामिल करना शुरू कर देते हैं। अक्सर कई माता-पिता के मन में यह कंफ्यूजन रहती है कि बच्चे को ठोस आहार देना कब और कैसे खिलाना शुरू करना चाहिए? इस विषय पर बेहतर जानकारी के लिए हमने मदरहुड हॉस्पिटल, नोएडा के कंसलटेंट पीडियाट्रिशियन और नियोनेटोलॉजिस्ट डॉ निशांत बंसल से बात की।
जन्म के बाद 6 महीने तक, मां का दूध शिशु के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। ब्रेस्ट मिल्क एंटीबॉडी, आवश्यक फैट और पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जो शिशु के लिए बेहद जरूरी होते हैं। डिलीवरी के बाद नहीं मां को दूध की गुणवत्ता और मात्रा बढ़ाने के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार लेना चाहिए। ब्रेस्ट मिल्क की आपूर्ति के लिए आप अजवाइन, मोरिंगा, मेथी के बीज और तिल जैसे सुपरफूड्स को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें।
6 महीने के आसपास आप अपने बच्चों को ठोस आहार देना शुरू कर सकते हैं। शुरुआत में आप बच्चे को सिंगल इंग्रीडिएंट्स प्यूरी, जैसे मैश किया हुआ केला या सेब की प्यूरी दे सकते हैं। यह पेट के लिए कोमल होते हैं और जाने में आसान होते हैं। उसके बाद आप धीरे-धीरे बच्चे के आहार में दलिया और खिचड़ी जैसी चीजों को शामिल करें।
जैसे-जैसे बच्चे को ठोस पदार्थ खाने की आदत हो जाए, तब उसकी डाइट में सुपरफूड्स को शामिल कर सकते हैं। इसके लिए आप अमरंथ, दाल या सब्जियों को मैच करके घी या मक्खन से छौंक कर दे सकते हैं। यह न केवल खाने में स्वादिष्ट होता है, बल्कि शिशु के शारीरिक और मस्तिष्क के विकास में भी सहायता करता है।
आप अपने बच्चों के खाने में थोड़े-बहुत हर्ब्स और मसाले भी इस्तेमाल कर सकते हैं। हल्दी, दालचीनी और जीरा जैसे मसाले न केवल खाने का स्वाद बढ़ाते हैं, बल्कि सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होते हैं। हालांकि, ध्यान रखें कि इनका बहुत अधिक मात्रा में उपयोग न करें।
लगभग 8 से 9 महीने में आपका बच्चा खुद खाने-पीने में रुचि दिखाना शुरू कर सकता है। इस दौरान आप उससे फिंगर फूड्स जैसे उबले हुए ब्रोकली के टुकड़े, शकरकंद के टुकड़े या पके पपीते के टुकड़े खाने के लिए दे सकते हैं। हालांकि, बच्चे को ऐसे खाद्य पदार्थ को देने से बचें, जो उसके गले में अटक सकते हो जैसे सबूत अंगूर या ड्राई फ्रूट्स।
जब तक बच्चा एक साल का न हो जाए, उसे कुछ चीजों को खिलाने से बचना चाहिए। उदाहरण के लिए, शहद शिशु में बोटूलिज्म का कारण बन सकता है। इसके अलावा, एक वर्ष की आयु से पहले बच्चे को गाय का दूध पिलाने से परहेज करें क्योंकि यह उसकी विकासशील किडनी के लिए कठिन हो सकता है। इसके अलावा, बच्चे को अत्यधिक नमकीन या मीठे खाद्य पदार्थ देने से बचें। बच्चे को प्रोसेस्ड और पैक्ड खाद्य पदार्थों के बजाय ताजा और घर पर बना हुआ खाना ही खिलाएं।