ब्लू व्हेल के बाद अब मोमो गेम चैलेंज ने उड़ाई पेरेंट्स की नींद, जानें कितना खतरनाक है यह  

सोशल मीडिया के माध्‍यम से प्रसारित हो रही इस गेम में प्‍लेयर्स को दिया जाता है सुसाइड का टास्‍क।

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Written By: Yogita Yadav | Published : August 31, 2018 1:34 PM IST

डरावनी आंखों वाली गुडि़या के चेहरे के साथ वाट्सएप के माध्‍यम से बच्‍चों की जिंदगी खराब कर रहा है यह गेम। जिसमें अंतिम टास्‍क के रूप में प्‍लेयर को अपनी जान देने का वीडियो बनाना होता है। ब्‍लू व्‍हेल गेम चैलेंज के बाद इस गेम की दस्‍तक ने पेरेंट्स की नींद उड़ा दी है। इसका खुलासा तब हुआ जब अगस्‍त की शुरूआत में अंर्जेंटीना की एक बच्‍ची अपनी सुसाइड का वीडियो बना रही थी।

जाने क्‍या है मोमो गेम चैलेंज

इसमें एक डरावने चेहरे और बड़ी आंखों वाली गुडि़या का फोटो इस गेम की पहचान है। इसकी अजीबो गरीब शक्‍ल बच्‍चों को आकर्षित करती है और वे इसकी चपेट में आ जाते हैं। इस चैलेंज के तहत बच्‍चों और टीनएजर्स को फेसबुक जैसी सोशल साइट के माध्‍यम से अनजाने नंबरों से मित्रता निमंत्रण भेजे जाते हैं। एक्‍सेप्‍ट करने पर यह वाट्सएप के माध्‍यम से मोबाइल में डाउनलोड हो जाता है और फि‍र एक के बाद एक चैलेंजिंग टास्‍क दिए जाने लगते हैं। जिसमें अंतिम टास्‍क के रूप में अपनी जान देना होता है। ब्‍लू व्‍हेल चैलेंज की ही तरह यह प्‍लेयर के लिए जानलेवा साबित होती है।

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यहां सामने आया पहला मामला

मोमो गेम चैलेंज का पहला मामला अर्जेटीना में अगस्‍त की शुरूआत में देखने में आया। जहां एक किशोर उम्र की लड़की अपनी आत्‍महत्‍या के टास्‍ट का वीडियो शूट कर रही थी। भारत में इसकी दस्‍तक की आहट को पहचानते हुए विभिन्‍न राज्‍य सरकारों ने एडवाइजरी जारी कर दी है।

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ये है पेरेंट्स को सलाह

पश्चिम बंगाल के एसोसिएशन ऑफ हेड्स ऑफ आईसीएसई स्कूल ने सभी छात्रों के माता-पिता से आग्रह किया है कि वह अपने बच्चों पर नजर रखें। इस संगठन की पश्चिम बंगाल इकाई के महासचिव नबरून डे ने गुरुवार को बताया कि अभी तक उन्हें ऐसी खबर नहीं मिली है कि किसी भी स्कूल के छात्र को इस तरह का संदेश मिला है और न ही संगठन को सीआईडी या पुलिस ने इस संबंध में कोई सलाह दी है।

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उन्होंने कहा, हालांकि मीडिया में दो दिन पहले आई खबरों को देखते हुए हमने अपने सदस्य स्कूलों से कहा है कि वह मोमो और ब्लू व्हेल जैसे ऑनलाइन गेम्स के खतरों से आगाह करने के लिए बच्चों और उनके अभिभावकों के बीच जागरुकता अभियान चलाएं।

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